चुटपुटिहा

भोला बाबू का पीछे एगो पिल्ला लागल रहुवे.
भोला बाबू चिचियात भागल जात रहलन कि हम त जियो सिम डलववले बानी. ई ससुरा वोडाफोन के नेटवर्क कइसे ध लिहलसि.


– ओकरा ला तू शराब छोड़ दीहलऽ, सगरी नशा छोड़ दीहलऽ. बाकिर बुझाइल ना कि ओकरा से बिआह काहे ना कइलऽ ?

– अरे यार, का बताईं. ओकरो ले नीमन नू भेंटा गइल !


मरीज के जाँच कइला का बाद डाक्टर बतवलनि कि –
तोहार बेमारी पुरान ह आ गँवे गँवे तोहरा के खात बिया.

ई सुन के मरीज फुसफुसाइल – डाक्टर साहब तनी धीरे बोलीं. बाहरे बइठल बाड़ी.


लड़िका – बुझाता कि हमनी के बिआह ना हो पाई.
लड़िकी – काहे ? बाबूजी का कहुंई ?
लड़िका – तोहरा बाबूजी से त भेंटे ना भउवे. तोहरा घरे गँउई त तोहरा बहिन से भेंट हो गउवे. आ गजब के धांसू बिया तोहर बहिनिया ! सोचतानी कि ओकरे से बिआह क लीं.


सावित्री जमाना पहिलहीं अपना पति सत्यवान के यमराजो का हाथ से छीन ले आइल रही साबित कर गइल रही कि अगर मेहरारू ठान लेव त यमराजो ओकरा मरद के बचा ना सकसु.


शादी का सालगिरह पर एक जने अपना मेहरारू के हीरा के हार दिहलें.
मेहरारू ओकरा बाद उनुका से छह महीना ले ना बतियवलसि.
काहें ?
….

इहे तय भइल रहुवे.


अंजोरिया पर प्रकाशित होखत चुटपुटिहा लोग के बहुते पसन्द आवत रहुवे बाकिर भोजपुरिका पर चुटपुटिहा छूट गइल रहुवे. अब एकरा के एहिजो शुरु कइल जात बा.


अगिलका