जय हो बाबा लस्टमानंद के! पिछला अतवार के घूर के चरचा में अइसन टीप दिहलन कि सोचल धरा गइल आ हम घूर का घुरची में घुरचिया के रह गइनी. सोचे लगनी त लागल कि आखिर हम बतकुच्चन में करेनी का, घुरबिनिया छोड़ के. बाकिर घूर आखिर कइसे अतना इज्जति पापूरा पढ़ीं…

Advertisements

हम त अपना बेटा से परेशान बानी. 60 हजार रुपिया मकान से किराया मिलेला आ ऊ हमनी के साठो रुपिया ना देव. हम मरद मेहरारू कबो कवनो रिश्तेदार के दीहल खाना खा लेलीं त कबो रो रो के रात बीता देनी सँ. अपने घर में बेगाना बना दीहल गइल बापूरा पढ़ीं…

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से खूब तेज चलत ट्रक एक-ब-एक किरकिरा उठल. ट्रक का डाला पर बइठल खलासी बीड़ी पीयत कवनो फिल्मी धुन गुनगुनात रहे. ट्रक रूकल त बींडी फेंकपूरा पढ़ीं…

– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती बदली समाज अब स्वच्छता अभियाने से, जागरुक होत हई घर-घर बबुनिया. बाबुजी हमरा के ओइजा ना बिअहब, जवना घरे बनल ना होई लैटिनिया. देखीं महराजगंज प्रियंका सखी का कइली, ससुरा के छोड़ मायका गइली दुलहिनिया. सौम्या अग्रवाल जिलाधिकारी ओइजा के, ब्रांड अंबेस्डर के कइली घोषनिया. संतकबीरपूरा पढ़ीं…

भासा संस्कार से बनेला आ संस्कार भासा से. भासा संस्कार देखावेले आ संस्कार भासा के इस्तेमाल के कमान सम्हारेले. कमान सम्हारे खातिर कई बेर कमानी चढ़ावे पड़ेला आ कई बेर कमाने से काम चल जाला. एह कमाने आ कमाई वाला कमाने के कवनो संबंध ना होखे. कमाने कहे के मतलबपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय ओह दिन साइत बिगड़ल रहे कि आंगछ खराब रहे. गाँव के लरिका मधुमाछी के छत्ता में ढेला मार के परइले सन. ओने रामचेला जेठ के दुपहरिया में पछुआ के झोंका के कम करे खातिर आँख मुलमुलावत पेड़ का नीचे आगे के ठाड़ भइल रहले. दू गो माछीपूरा पढ़ीं…