Month: जुलाई 2015

भोजपुरी आजु ले जिन्दा बिया अउरी आगहूं जियत रही

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” श्रद्धालु कभी परेशान ना होले, परेशानी उनकर बा जे यात्रा अउरी तीर्थयात्रा दुनो के लाभ लेबे चाहत बा. ठीक इहे जुमला आज भोजपुरियो खातिर कहा…

ईद का मौका पर बजरंगी भाईजान से जिगरवाला के मुकाबला

हर साल ईद का मौका पर आपन फिलिम रिलीज करे खातिर इस्लामी सभ्यता आ संस्कृति वाला बालीवुड में बेचैनी रहेला आ एकरा के बहुते खास मानल जाला. देखादेखी भोजपुरिओ सिनेमा…

मिले मियां के माँड़ ना बिरयानी के फरमाईश!

– ओम प्रकाश सिंह अब एहिजा एह कहाउत के संबंध मियाँ लोग से नइखे. मियाँ के मतलब पतिदेव से, आदमी से बा. मियाँ आ बेगम के इस्तेमाल हमेशा से मरद…

पटना में “लकीर” लोकार्पित

अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना के कार्यकारिणी के बइठक पिछला हफ्ता 5 जुलाई का दिने बेली रोड, जगदेव पथ, पटना में भइल. एह मौका पर जमशेदपुर के चर्चित कवि…

फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के बदनामी काहे.. भाग २

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” जमाना लाख बुरा चाहे त का होला, उहे होला जे मंजूरे खुदा होला. निकलल बानी सर कफ़न बांध के याद रखीह, मिट जाई हर रावन…

रमबोला के याद करत आपन बात

– ओम प्रकाश सिंह साल 1975 भा 1976 रहुवे जब पहिला बेर हमरा एगो भोजपुरी के खण्डकाव्य रमबोला के जानकारी एगो दोस्त से मिलल. ऊ हमरा के ओह काव्य के…

महुआ प्लस के क्रिएटिव कंसल्टेंट बनलें मनोज भावुक

मशहूर भोजपुरी राइटर आ टीवी पत्रकार मनोज भावुक भोजपुरी के सबले लोकप्रिय चैनल ‘महुआ प्लस’ के क्रिएटिव कंसल्टेंट बनावल गइल बाड़ें. लोग कहेला कि टेलीविजन पत्रकारिता में प्रतिभावान लोग नइखे…

फूहड़ता लेके खाली भोजपुरी के चर्चा काहे…

<h3>- अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु”</h3> कबो ई सवाल हमरा मन में बारी-बारी घुमे बाकि काल पुरान मित्र डॉक्टर ओमप्रकाश जी के सन्देश से फिर से ताजा हो गइल. सवाल जेतना…

कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके लपक के लढ़िया के धूरा…

भोजपुरी सिनेमा के प्रचारकन का नामे एगो चिट्ठी

हे प्रचारक बन्धु, रउरा अपना गाहकन के सिनेमा आ कृति के प्रचार कइल आपन पेशा बनवले बानी जवन स्वागत जोग बा. बाकिर का कबो सोचले बानी कि भोजपुरी स‌िनेमा में…