No Image

भोजपुरी साहित्य के धरोहर हऽ – रमबोला

November 30, 2015 Editor 2

– हरेन्द्र हिमकर धरती के रग-रग में भइल राग अदिमी -अदिमी हो गइल नाग डंसलनि समाज के पोर-पोर देहिया-देहिया में लगल आग। अंगे-अंगे धहकल धिधोर […]

Advertisements
No Image

लुत्ती लागल बा

November 28, 2015 Editor 0

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी बिला गइल माथा के संतुलन बेगाथा के बौंडियात बानी एनी ओनि सुनाइल एघर से भागल बा ॥ बुझाता ए एनियों लुत्ती […]

No Image

शरद सुहावन

November 23, 2015 Editor 0

– डाॅ. अशोक द्विवेदी रतिया झरेले जलबुनिया फजीरे बनि झालर झरे फेरु उतरेले भुइंयाँ किरिनियाँ सरेहिया में मोती चरे ! सुति उठि दउरेले नन्हकी उघारे […]

No Image

भोजपुरी-वर्तनी के आधार

November 19, 2015 Editor 1

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के […]

No Image

भोजपुरी भाषी के मातृभाषाई के अस्मिताबोध – 3

November 15, 2015 Editor 0

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ वैदिककाल होखे भा पौराणिककाल, ऐतिहासिक काल होखे भा आधुनिक काल, भोजपुरी भाषी जनसमुदाय राष्ट्र अउर राष्ट्र के भाषा-संस्कृति, सम्मान-स्वाभिमान आ […]

No Image

गज़ल

November 14, 2015 Editor 0

– डा0 अशोक द्विवेदी हुक्मरानन का खुशी पर फेरु मिट जाई समाज अपना अपना घर का आगा, खोन ली खाई समाज । कर चुकल बा […]

No Image

भकुआइल बबुआ

November 3, 2015 Editor 0

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी माटी के थाती छोड़ी जब से पराइल बा, नीमन बबुआ तभिए से भकुआइल बा ॥ जिनगी के अहार न विचार परसार […]