– डा. अशोक द्विवेदी गँवई लोक में पलल-बढ़ल मनई, अगर तनिको संवेदनशील होई आ हृदय-संबाद के मरम बूझे वाला होई, त अपना लोक के स्वर का नेह-नाता आ हिरऊ -भाव के समझ लेई. आज काकी का मुँहें एगो जानल-सुनल पुरान गीत सुनत खा हम एगो दोसरे लोक में पहुँच गउंवीं.पूरा पढ़ीं…

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– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी बियहल तिरिया के मातल नयनवा, फगुनवा में ॥ पियवा करवलस ना गवनवां, फगुनवा में ॥ सगरी सहेलिया कुल्हि भुलनी नइहरा । हमही बिहउती सम्हारत बानी अँचरा । नीक लागे न भवनवा, फगुनवा में ॥ पियवा ….. पियराइल सरसों, मटरियो गदराइल । फुलल पलास बा महुअवों अदराइलपूरा पढ़ीं…

– देवकान्त पाण्डेय उत्‍तर प्रदेश के मऊ जिला के मुहम्‍मदाबाद गोहना तहसील में मऊ शहर से करीब 28 कि.मी. दूर आजमगढ़-मुहम्‍मदाबाद गोहना-घोसी रोड पर स्थित देवलास मऊ जिला के प्रमुख पर्यटक स्‍थलन में गिनल जाला. देवल ऋषि के तपोस्थली के रूप में प्रसिद्ध ए स्‍थान के आपन कुछ विशेषता बापूरा पढ़ीं…

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” एक व्यक्ति दू नाव पर सवारी, कइसे ? समस्या विकट बा आ ओहु से विकट बा ओकर समाधान. सबसे बड़ बात ई कि समाधान के चिंता केहु के नइखे काहे से कि आज हर केहु जेतना ज्यादा मिल जाये ओतना नाव पर सवारी करे खातिरपूरा पढ़ीं…

– अशोक द्विवेदी फागुन बाट ना जोहे, बेरा प’ खुद हाजिर हो जाला. रउवा रुचेभा ना रुचे, ऊ गुदरवला से बाज ना आवे. एही से फगुवा अनंग आ रंग के त्यौहार कहाला. राग-रंग के ई उत्सव, बसन्त से सम्मत (संवत् भा होलिका दहन) आ होली से बुढ़वा मंगर ले चलेला.पूरा पढ़ीं…

फार, फारल भा फरला से लगवले फरिअवता भा फरिआवल के चरचा करे चलनी त नीर-क्षीर विवेक के बात धेयान में आ गइल. कहल जाला कि हंस नाम के पक्षी में अतना ज्ञान होला कि ऊ पानी आ दूध के अलग क के दूध त पी बाकिर पानी छोड़ देला. एहीपूरा पढ़ीं…

अनुग्रह फिल्म्स के बनावल भोजपुरी फिलिम ‘बिहारी बन गइल हीरो’ पिछला दिने बम्पर ओपनिंग ले के मुंबई आ अगल बगल के सिनेमाघरन में रिलीज कइल गइल. कुछ अउर सिनेमाघरन में ई अगिला हप्ता रिलीज होखी. एह फिलिम के देखेवाला खूब पसंद करत बाड़ें. नया स्टार कास्ट होखला के बावजूद देखेवालनपूरा पढ़ीं…

– शिलीमुख उनइस बरिस पहिले हम प्रसिद्ध कवि चन्द्रदेव सिंह क एगो रचना पढ़ले रहलीं. साइत 1997 में “पाती” अंक -२३ में छपल रहे. बरबस आज ओकर इयाद आ गइल बा त रउवो सभे के पढ़ा देत बानी – केकरा प’ करब s गुमान रामप्यारे केकरा से रही तोहर मानपूरा पढ़ीं…

– अशोक द्विवेदी आपन भाषा आपन गाँव, सुबहित मिलल न अबले ठाँव । दउरत-हाँफत,जरत घाम में, जोहीं रोज पसर भर छाँव । जिनिगी जुआ भइल शकुनी के, हम्हीं जुधिष्ठिर, हारीं दाँव । कमरी ओढ़ले लोग मिलत बा केकर केकर लीहीं नाँव । जरलो पर बा अँइठन एतना, सब अमीर ,पूरा पढ़ीं…

भारतीय जीवन के बहुते खास क्षेत्रन में अंग्रेज़ी भाषा के दखल से भारत के बड़हन नुकसान होखत बा. एह दखल का पाछे सबले बड़हन कारण बा कुछ गलतफहमी जवन हमनी के दिलो-दिमाग में बस गइल बा भा बसा दिहल गइल बा. ई गलतफहमी हई सँ – 1. अंग्रेजिए ज्ञान-विज्ञान, तकनीकपूरा पढ़ीं…

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी होरी आइल बा जरत देश बा-धू धू कईके सद्बुद्धि बिलाइल बा. कइसे कहीं कि होरी आइल बा. चंद फितरती लोग बिगाड़ें मनई इनकर नियत न ताड़ें मगज मराइल ए बेरा मे भा कवनों चुरइल समाइल बा. कइसे कहीं कि होरी आइल बा. बुढ़ पुरनियाँ लईका औरतपूरा पढ़ीं…