– रामरक्षा मिश्र विमल जिम्मेदारी सघन बन में हेभी गाड़ी के रास्ता खुरपी आ लाठी के बल नया संसार स्वतंत्र प्रभार   जिम्मेदारी जाबल मुँह भींजल आँखि फर्ज के उपदेश आ निर्देश गोपाल के ठन ठन नपुंसक चिंतन   जिम्मेदारी तलवार के धार मित्रन के दुतरफा वार आदर्श विचार साँपपूरा पढ़ीं…

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– केशव मोहन पाण्डेय जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल झुमेला नगरिया नू हो।। गरजि-चमकि मेघपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल भादो महीना के अन्हरिया के चौथ के बहुरा कहल जाला.कहीं-कहीं एकरा के गाइ माई के पूजा के परब मानल जाला.गाइ आपन दूध पियाके आदिमी के पालेले आ पोसेले,हमनियो के कृतज्ञ होके गाइ के  सम्मान करेके चाहीं, पूजेके चाहीं.ओइसे, हम एकरा के सत्य आउर धर्म कापूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल सावन के पुरनवासी के इंतजार हर घर के होला काहेंकि एह दिन देश भर में राखी के तेवहार मनावल जाला. राखी माने रक्षाबंधन. ई हिंदू धर्म के लोकप्रियता के कमाल हटे कि रक्षाबंधन के तेवहार के विस्तार हिंदू धर्म से भाई-बहिन के धरम तक होपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल. शहर-ओहर में त लइकियो ईहे गेमवा खेलेली सन बाकिर गाँव अबहिंयो एगो परंपरा का साथे आनंद लेत लउकेला. गाँव मेंपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह माया महाठगिनि हम जानी. कबीर त ई बाति कहि के आराम से निकल गइलन. आजु के जमाना रहीत त महामाया भा मायावती के चेला चाटी उनुकर खटिया खड़ा कर दिहले रहीत लोग. महामाया के माया तनिका पुरान हो गइल से नयका पीढ़ी के लोग उनुका मायापूरा पढ़ीं…