(वसन्त पंचमी, 1ली फरवरी 2017, प मंगल कामना करत) – अशोक द्विवेदी कठुआइल उछाह लोगन के, मेहराइल कन -कन कवन गीत हम गाईं बसन्ती पियरी रँगे न मन !! हर मजहब के रंग निराला राजनीति के गरम मसाला खण्ड खण्ड पाखण्ड बसन्ती चटकल मन – दरपन !! गठबन्धन के होयपूरा पढ़ीं…

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राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित भोजपुरी फिलिम देसवा के निर्देशक नीतिन चन्द्रा अपना निर्देशन में बनावल एगो वीडियो पिछला 21 जनवरी 2017 के यू ट्यूब प डलले बाड़न. एह वीडियो के खूब प्रशंसा होत बा. त सोचनी कि काहे ना रउरो सभ के एह नीमन गीत के सुनवाईं. एह वीडियो केपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछलका हफ्ता बहुते कुछ देखे सुने के मिलल. ओही में से कुछ बातन के चरचा. खादी विभाग के कलेण्डर प चरखा चलावत मोदी के देख उनुका विरोधियन के करेजा फाट गइल. चारो तरफ चरखी नाच गइल आ मोदी के विरोधियन के करेजा फाट गइल. ओह लोगपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह आपन देश गजबे ह. एहिजा तरह तरह के अजूबा देखे के मिलि जाला. सबले बरियार नेता के तानाशाह बतावत तरह तरह के विशेषणन से नवाज दीहल जाला आ नवाजे वाला निश्चिन्त रहेला कि ओकरा खिलाफ कवनो कार्रवाई नइखे होखे वाला. जे खुद जेल भेजे लायक होलापूरा पढ़ीं…

माया माहाठगिनि “माया माहाठगिनि” डॉ. गदाधर सिंह के भोजपुरी ललित निबंध संग्रह हटे, जवना के द्वितीय संस्करण के प्रकाशन सन् 2013 में निलय प्रकाशन, वीर कुँअर सिंह विश्वविद्यालय परिसर, आरा, भोजपुर (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 100 रुपया बाटे आ एह्में 120 गो पन्ना बा. एह ललित निबंध संग्रहपूरा पढ़ीं…

मुट्ठी भर भोर ” मुट्ठी भर भोर ” डॉ. अरुणमोहन भारवि के भोजपुरी कहानी संकलन हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2013 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 300 रुपया बाटे आ 120 गो पन्ना बा. एहपूरा पढ़ीं…

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी रसियाव खाईं आ टन-टन काम करत रहीं आजु स्टाफ रूम में अपना गीत के एगो लाइन गुनगुनात रहीं- “ननदी का बोलिया में बने रसियाव रे. सरगो से नीमन बाटे सइँया के गाँव रे.“ साहा सर के जिग्यासा पर चर्चा शुरू हो गइल कि “रसियावपूरा पढ़ीं…

मातृभाषाई अस्मिता बोध “मातृभाषाई अस्मिता बोध” डॉ. जयकांत सिंह के भोजपुरी मातृभाषा चिंतन पर एगो प्रबंधात्मक पुस्तक बिया, जवना के प्रकाशन सन् 2016 में राजर्षि प्रकाशन, मुजफ्फरपुर – 842001 (बिहार) से भइल बा. एकर कीमत 51 रुपया बाटे.   ई किताब तीन भाग में बिया। 1.भूमिका 2.मातृभाषा शिक्षा के औचित्यपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता लिखले रहीं कि नाम में का धइल बा आ एह हफ्ता फेरु नामे के चरचा ले के बइठ गइनी. बाकि करीं त का ? कुछ दिन पहिले ले नोटबन्दी के चरचा रहुवे. कहीं से शुरू करीं बात घुमा फिरा के नोटबन्दी प आ जातपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह नाम में का धइल बा. नाम कुछऊओ होखे, काम बढ़िया रहल त नाम होईये जाई आ काम खराब हो गइल त सगरी बनलो नाम खराब हो जाए से बचावल ना जा सकी. अलग बाति बा कि कई बेर कुछ लोग के लागेला नेकनेम ना त बदनामेपूरा पढ़ीं…