– डॉ अशोक द्विवेदी कविता के बारे में साहित्य शास्त्र के आचार्य लोगन के कहनाम बा कि कविता शब्द-अर्थ के आपुसी तनाव, संगति आ सुघराई से भरल अभिव्यक्ति हऽ। कवि अपना संवेदना आ अनुभव के अपना कल्पना-शक्ति से भाषा का जरिये कविता के रूप देला। कवनो भाषा आ ओकरा काव्य-रूपनपूरा पढ़ीं…

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– शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’ हम गरीबने पर अइसन, अन्हेर काहें? देहि धुनलो पर खइला में देर काहें? दिन भर करत-करत काम, झाँवर हो गइले चाम, छिन भर देहिया के सुबहित ना, मिलले आराम, नीक कइलो पर विधना क फेर काहें? का अंजोर का अन्हार, एकही लेखा हमार, कबो सूखा केपूरा पढ़ीं…

– अशोक कुमार तिवारी हो गइल छीछिल छुछुन्नर, दिल कहाँ दरियाव बा, अब उठावे ना, गिरा देबे में सबकर चाव बा। लगल आगी रहे धनकत भले, हमरा ठेंग से जर रहल बा झोपड़ी, सूतल सूचना गाँव बा। बात-बीतल हो गइल बाटे धरम-ईमान के शेष बा लड़ले-लड़ावल, अब कहाँ फरियाव बापूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल हिंदी लीखे में पानी छूटेला हमरा भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ? पग पग पर गूगल के सरन लिहींला कवनो भाषा से अनुवाद करींला भलहीं पेपर के कोश्चन बूझे ना केहू समझा-समझा के लिखवावत बानी भाई. बचने ना लिंगो पर आफति आई हाथी आ दहियो केपूरा पढ़ीं…

– डॉ राधेश्याम केसरी केतना बदल गइल संसार, कतहुँ नइखे अब त प्यार। खाली लाभ के खातिर, झूठे बनल बनवटी प्यार। बचवन के फुटपाथे असरा, बाप छोड़ जिमेवारी भागल। छोड़ परानी भाग गइल बा, मर्दा मुई मतलबी यार। माई कटलस मुड़ी बेटी के, अँधियारा सगरो चोटी के। अपना जमला केपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी के जुबली स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ आ गरम लिट्टी अंजना सिह के जोड़ी के फिलिम – जिगर – अबकी का ईद का मौका प 23 जून के रिलीज होखे वाली बिया. संजोग बा कि एही दिने सलमानो खान के फिलिम टयूबलाइट के रिलीज होखल पहिले से तय बा.पूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह जइसे – नाचे ना जाने अङनवे टेढ़ – वाला सहारा ले लीहल जाला जब चाल सही ना बइठे, वइसहीं अपना गलती के खीसि दोसरा प मढ़ देबे के परिपाटी पुरान ह. अंगरेजी मे एकरा के लूजर्स लीम्प का नाम से जानल जाला. खेल का मैदान मेंपूरा पढ़ीं…

– भगवती प्रसाद द्विवेदी आजु जब खेती-किसानी में जीव-जाँगर आ जिनिगी खपावेवाला गरीब किसान खुदकुशी करे खातिर अलचार हो जात बाड़न, त एह निठुर समय में एगो अइसन ऋषि रचनाकार के बरबस इयाद आवत बा, जे ताजिनिगी गाँव के तंगहाल मजूर-किसान के जरत-बरत मुद्दन के अपना सम्पूर्ण रचनाशीलता के मार्फतपूरा पढ़ीं…

– डॉ राधेश्याम केसरी सूरज खड़ा कपारे आइल,गर्मी में मनवा अकुलाइल। दुपहरिया में छाता तनले,बबूर खड़े सीवान। टहनी,टहनी बया चिरईया, डल्ले रहे मचान। उ बबूर के तरवां मनई, बैईठ ,बैईठ सुस्ताइल। गइल पताले पानी तरवां, गड़ही,पोखर सुखल इनरवां। जल-कल पर सब दउरे लागल, जिउवा बा बौराइल। छानी छप्पर के तरकारी,पूरा पढ़ीं…

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ आजु स्टाफ रूम में इंस्पेक्शन के बात एक-एक क के उघरत रहे. हमरा प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ जी याद आ गइल रहीं आ हम भावुक हो गइल रहीं. 5 जनवरी के उहाँ से खड़े-खड़े भइल आधा घंटा केपूरा पढ़ीं…

लिटी-चोखा – डॉ. कमल किशोर सिंह आहार अनोखा लिटी चोखा का महिमा हम बखान करीं. ई ‘बर्बाकिउ बिचित्र बिहारी’ बेहतर लागे घर से बहरी, दुअरा-दालान, मेला-बाज़ार, कहंवो  कोना  में  छहरी. नहीं  चुहानी  चौका-बर्तन बस चाही गोइठा-लकड़ी. मरदो का मालूम मकुनी में मर-मसाला कवन परी. आलू, प्याज, टमाटर, बैगन बनेला चोखापूरा पढ़ीं…