– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरिया समाज शुरूए से कबो ना थाकेवाली मेहनत, जीवटता, संघर्षशीलता, अपना दम-खम आउर बल-बेंवत का बदउलत मनमाफिक मुकाम हासिल करे खातिर जानल जाला। ‘कर बहियाँ-बल आपनो, छाड़ि बिरानी आस’ इहवाँ के मनई के मूल मंतर रहल बा। तबे नू, खाली देसे में ना, बलुक विदेसो मेंपूरा पढ़ीं…

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– ओ. पी. सिंह संस्कृत भा संस्कृत से उपजल भाषावन में कवनो दोसरा शब्द का पहिले लाग के ओह बाद वाला शब्द के माने बदलत भा ओकरा के अउर पोढ़ करेवाला शब्द के उपसर्ग कहल जाला आ वि अइसने एगो उपसर्ग ह. जब ई कवनो दोसरा शब्द का पहिले जुड़ेलापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह कुछ बात बा हिन्दुस्तान में कि नमकहराम एकरा खिलाफो रहेलें आ एहिजे ठाँवो खोजेलें. हिन्दुस्तान के बड़हन जमात रहला का बावजूद एहिजा हिन्दूवन के आवाज पसरे ना दीहल जाव. मीडिया आपन पूरा जोर लगा देले कि हिन्दूवन का खिलाफ होखत अन्याय के खबर मीडिया में जनिपूरा पढ़ीं…

– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में थउस जाला, बाकिर तवना खातिर तहरा मने ना कवनो मोह ना माया। के जाने कवन कुमुर्खी तहरा घेरले बा किपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में गुजरल । भोजपुरी बोली-बानी से हमरा भाषा के संस्कार मिलल, हँसल-बोलल आ रोवल-गावल आइल। ऊ समझ आ दीठि मिलल, जवना से हम अपना गँवई लोकपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता कर्नाटक के बैंगलुरु में एगो अंगरेजी पत्रकार गौरी लंकेश के कुछ बदमाश गोली मार के खून क डललें आ ओकरा कुछेके मिनट में शुरु हो गइल चुतिया पत्रकारन आ अउरी चुतियन के चुतियापा. आ हम का बात के बतंगड़ करीलें जे ई चुतिया केपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह प्राइवेसी के मुद्दा एहघरी पब्लिक में बा. केहू हरान त केहू परेशान बा आपन प्राइवेसी बनवले राखे खातिर. ऊ लोग चाहत नइखे कि ओह लोग के राज खुलि जाव. कहि देब हो राजा राति वाली बतीया कहि कहि के उनुका के उघार मत करा देव केहू.पूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह लरिकाईं में सुनल एगो कहानी याद आ गइल जब तृणमूलिया दीदीया कह बइठली के हमरा मोदी से शिकायत नइखे अमित शाह से बा. ओह कहानी के बुढ़ियो के बघवा के डर ना रहुवे टीपटीपवा के डर जरुर रहुवे. अब चूंकि हो सकेला कि नयकी पीढ़ी एहपूरा पढ़ीं…