Month: सितम्बर 2017

भोजपुरिया समाज : कब बदली तेवर

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरिया समाज शुरूए से कबो ना थाकेवाली मेहनत, जीवटता, संघर्षशीलता, अपना दम-खम आउर बल-बेंवत का बदउलत मनमाफिक मुकाम हासिल करे खातिर जानल जाला। ‘कर बहियाँ-बल आपनो,…

रोहिंग्या रोहेंगा – बतंगड़ 54

– ओ. पी. सिंह कुछ बात बा हिन्दुस्तान में कि नमकहराम एकरा खिलाफो रहेलें आ एहिजे ठाँवो खोजेलें. हिन्दुस्तान के बड़हन जमात रहला का बावजूद एहिजा हिन्दूवन के आवाज पसरे…

हिन्दी के ‘खाता’ आ हिन्दी के ‘त्राता’ से रार पर मनुहार

– डॉ प्रकाश उदय भइया हो, (पाती के संपादक) जतने मयगर तूँ भाई, संपादक तूँ ओतने कसाई। लिखे खातिर तहरा दिकदिकवला के मारे असकत से हमार मुहब्बत बेर-बेर बीचे में…

साँच उघारल जरूरी बा !

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में गुजरल । भोजपुरी बोली-बानी से…

लंकेश वध आ ओकरा प होखत चुतियापा – बतंगड़ 53

– ओ. पी. सिंह पिछला हफ्ता कर्नाटक के बैंगलुरु में एगो अंगरेजी पत्रकार गौरी लंकेश के कुछ बदमाश गोली मार के खून क डललें आ ओकरा कुछेके मिनट में शुरु…

ना नीमन काम करे ना दरबारे ध के जाय – बतंगड़ 52

– ओ. पी. सिंह प्राइवेसी के मुद्दा एहघरी पब्लिक में बा. केहू हरान त केहू परेशान बा आपन प्राइवेसी बनवले राखे खातिर. ऊ लोग चाहत नइखे कि ओह लोग के…

बघवा के डर नइखे टीपटीपवा के डर बा – बतंगड़ 51

– ओ. पी. सिंह लरिकाईं में सुनल एगो कहानी याद आ गइल जब तृणमूलिया दीदीया कह बइठली के हमरा मोदी से शिकायत नइखे अमित शाह से बा. ओह कहानी के…