– सौरभ पाण्डेय भोजपुरी के भासाई तागत भर ना, बलुक एकर आजु ले बनल रहला के तागत प केहू निकहे से सोचे लागो आ अंदाजे लागो, त ऊ एह बात प ढेर अचकचाई जे ई भासा कतना काबिल, आ कतना लोचगर भासा हऽ ! भासा के तौर प भोजपुरी लोचगरपूरा पढ़ीं…

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– ओ. पी. सिंह पिछला लेकसभा में चुनाव हरला का बाद कांग्रेस के हालात अइसन बनि गइल बा कि ऊ चुनाव जीते के फार्मूला नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे खोजत चलत बिया. ओकरा लागत बा कि सगरी राज मोदी के स्टाइल में लुकाइल बा आ ओकर नकल करि के मोदी के मात दीहलपूरा पढ़ीं…

– रामरक्षा मिश्र विमल हमनी के ‘गोधन’ (भैया दूज) मनावे के तरीका अलग होला। आजु भोरहीं मए बहिनि अपना भाई के भर मन सरापेली सन आ फेरु जीभि में रेंगनी के काँट गड़ाके प्रायश्चित करत आपन बात लौटावेली सन आ शुभकामना प्रकट करेली सन। ई बहुत जरूरी बा नया पीढ़ीपूरा पढ़ीं…

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं मूज का रसरिआ में आम का पतईयन से झलर-मलर झलर-मलर झलरी लगइतीं। मईया लछिमी जो अंखिया घुमइतू त राह में अंजोरिआ बिछइतीं हरदी चउरवा सेपूरा पढ़ीं…

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, मन से पुलक-उजास भरs गहन अन्हरिया परे पराई जन -जन में विश्वास भरs हिय के जोत जगावs सगरो फाटो बादल करिया हे। अमर जोत फइलावsपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह अपना के जनम का गलती से हिन्दू बाकिर संस्कार से इस्लामी बतावे वाला चचवा के चाल लागत बा कामयाब हो गइल. हिन्दू बहुल हिन्दुस्तान के एही चलते नाम रखलसि इण्डिया, भारत त बस बुड़बक बनावे ला लिखाइल-कहाइल. राज चलवलसि गवर्नमेंट आफ इण्डिया. देश के बँटवारा मजहबीपूरा पढ़ीं…

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत जुड़ाले पेटे पेट अदहन अस भइल बात कबो ना सिराले मुँह से लार अस टपक जाले । पजरे क परतीत साँच ना होले मनई बहरूपियापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह आजु एगो गीत बरबस याद आ गइल – तोहरा से राजी ना ए बलमुआ, तोहरा से राजी ना. हमके नीम्बुआ बिना तरसवले बलमुआ तोहरा से राजी ना. एह प्रेमगीत में नायिका के ओरहनो बा आ प्रेम निवेदनो बा. बाकिर जालिम बलमुआ समुझे तब नू बाति बने.पूरा पढ़ीं…

जमशेदपुर के प्रतिनिधि साहित्यिक संस्था ‘रचनाकार’ का बैनर तले एकर संस्थापक सचिव डॉ परमेश्वर दूबे ‘शाहाबादी’ के शोध ग्रंथ “पूर्वी उत्तरप्रदेश की भोजपुरी लोककथाओं का सामाजिक अध्ययन” के लोकार्पण 8 अक्टूबर 2017 के एगो विशेष समारोह में कइल गइल। ई आयोजन टेल्को कॉलोनी स्थित संगीत समाज सभागार, जमशेदपुर (झारखंड) मेंपूरा पढ़ीं…

● अगर सिनेमा में जाए के सपना होखे ? ● फिलिम बनावे के चाहत होखे ? ● फिलिम के जुनून होखे ? ● सिनेमा के सफर में रुचि होखे ? ● सिनेकर्मी बने के चाहत होखे ? ● फिलिम निर्माण में कैरियर बनावे के होखे ? त बॉलीवुड सिनेमा स्कूलपूरा पढ़ीं…