Month: अक्टूबर 2017

रचनात्मक आन्दोलन के लौ भोजपुरी भासा के हर दौर में बरल बा

– सौरभ पाण्डेय भोजपुरी के भासाई तागत भर ना, बलुक एकर आजु ले बनल रहला के तागत प केहू निकहे से सोचे लागो आ अंदाजे लागो, त ऊ एह बात…

बुड़बक बुझावे, से मरद – बतंगड़ 58

– ओ. पी. सिंह पिछला लेकसभा में चुनाव हरला का बाद कांग्रेस के हालात अइसन बनि गइल बा कि ऊ चुनाव जीते के फार्मूला नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे खोजत चलत बिया. ओकरा…

गोधन

– रामरक्षा मिश्र विमल हमनी के ‘गोधन’ (भैया दूज) मनावे के तरीका अलग होला। आजु भोरहीं मए बहिनि अपना भाई के भर मन सरापेली सन आ फेरु जीभि में रेंगनी…

मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं मूज का रसरिआ में आम…

बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, मन से पुलक-उजास भरs गहन…

चचवा के चाल घर बिगाड़ दिहलसि – बतंगड़ 57

– ओ. पी. सिंह अपना के जनम का गलती से हिन्दू बाकिर संस्कार से इस्लामी बतावे वाला चचवा के चाल लागत बा कामयाब हो गइल. हिन्दू बहुल हिन्दुस्तान के एही…

दुमुंहा

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत जुड़ाले पेटे पेट अदहन अस…

तोहरा से राजी ना ए बलमुआ – बतंगड़ 56

– ओ. पी. सिंह आजु एगो गीत बरबस याद आ गइल – तोहरा से राजी ना ए बलमुआ, तोहरा से राजी ना. हमके नीम्बुआ बिना तरसवले बलमुआ तोहरा से राजी…

स्व. परमेश्वर दूबे ‘शाहाबादी’ के शोध ग्रंथ के लोकार्पण समारोह

जमशेदपुर के प्रतिनिधि साहित्यिक संस्था ‘रचनाकार’ का बैनर तले एकर संस्थापक सचिव डॉ परमेश्वर दूबे ‘शाहाबादी’ के शोध ग्रंथ “पूर्वी उत्तरप्रदेश की भोजपुरी लोककथाओं का सामाजिक अध्ययन” के लोकार्पण 8…

फिल्मी कैरियर के पहिला पड़ाव – बॉलीवुड सिनेमा स्कूल

● अगर सिनेमा में जाए के सपना होखे ? ● फिलिम बनावे के चाहत होखे ? ● फिलिम के जुनून होखे ? ● सिनेमा के सफर में रुचि होखे ?…