Month: दिसम्बर 2017

सहलऽ काहें ? मरउव्वत में – बतंगड़ 67

– ओ. पी. सिंह आजु अगर हम मौनी बाबा के वन्दना कइला बिना आपन बतंगड़ शुरु क दीं त ऊ बहुत बड़ अपराध हो जाई. मौनी बाबा जबले कुरसी धइले…

ना खुदा ही मिला ना बिसाले सनम – बतंगड़ 66

– ओ. पी. सिंह केन्द्र के केबिनेट त तिलाक का खिलाफ बने वाला तलाक के मंजूरी दे दिहलसि बाकिर ई कानून मुसलमाने प लागू होखे वाला बा. अपना के हिन्दू…

राजनीति में नीचतई आ कि नीचतई में राजनीति – बतंगड़ 65

– ओ. पी. सिंह राजनीति में नीचतई के कवनो सीमा ना होखे. आ दिन प दिन ई अउरी नीचे गिरल जात बा. गुजरात के चुनाव कांग्रेस आ भाजपा का बीच…

तोहरा ले बढ़िया हिन्दू हम – बतंगड़ 64

– ओ. पी. सिंह देश कहवाँ सा कहवाँ आ गइल. चरखाना वाला गमछी आ जालीदार टोपी पहिरल अब आउट आफ फैशन हो गइल आ कुर्ता का उपर से जनेऊ पहिरे…

देशद्रोही के ताजपोशी – बतंगड़ 63

– ओ. पी. सिंह राष्ट्रवादी भा भक्त भइल खराब बाति ना होखे बाकिर गुजरात चर्च के माथ अधिकारी, जिनका के आर्कबिशप के पदनाम से जानल जाला, एकरा के पाप का…

अदालत, आयोग आ बोर्डो ले बड़ हो गइल मीडिया के मूड – बतंगड़ 62

– ओ. पी. सिंह पिछला दिने मूडी कुछ लोग के मूड बिगाड़ दिहलसि. कहलसि का, से सभे अपना-अपना मूड से समुझल. मियाँ बूझले पियाज त मियाइन बूझली अदरख. जेकरा शास्त्र…