जन्म: 01 जुलाई 1936, बलिया जिला के बलिहार गाँव में। श्रीमती बबुना देवी आ श्री घनश्याम मिश्र क एकलौता पुत्र । शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक गोरखपुर में आ उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में । ‘‘नवजागरण के सन्दर्भ में हिन्दी पत्रकारिता का अनुशीलन’’ विषय पर शोध आपूरा पढ़ीं…

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– प्रमोद कुमार तिवारी भोजपुरिया माटी में कुछ त अइसन बा, जवना से एह इलाका के साहित्यकारन में ललित भाव के रस छलके लागेला, कुछ तऽ अइसन बा कि जे भी आपन बचपन भोजपुरिया इलाका में बितवले बा, ऊ पूरा जिनगी भोजपुरी लोक के रस में भींजत रहेला। एह माटीपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बड़की बलिहार आ नदिया के पार आजुए रामेंद्र के फोन आइल रहल हा कि बड़की बलिहार गइल रहलीं हा. नाँव सुनते ‘नदिया के पार’ फिल्म के याद आ गइल. एह सुपरहिट फिल्म के कहानी ओही गाँव के हटे. लोग कहेला कि एकदम साँच. केशव प्रसादपूरा पढ़ीं…

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल बोले खातिर बोलल जब से नोकरी के शुरुआत भइल तबे से देखत आ रहल बानी. आजु तक एहमें कवनो कमी नइखे आइल, बढ़ंतिए भइल बा. जरूरत खातिर बोलेवाला कम मिलले. लोग बूझसु कि हमहूँ बोलींले, अइसने लोग ढेर लउकले. जब-जब जाएके परेला सेवाकालीन प्रशिक्षण शिविरपूरा पढ़ीं…

– कृष्ण कुमार चंपारन सत्याग्रह से जुड़ल कई गो कहानी अइसनो बाड़ी सन, जवन साइत इतिहास के पन्ना में जल्दी ना मिलें स बाकिर ओह कहानियन के, ओह इलाका क लोग पीढ़ियन से सुनत आ रहल बाड़े। लोग बतावेला कि चंपारन का तत्कालीन मरमभेदी सच्चाइयन के सुन-देखि आ जान केपूरा पढ़ीं…

– अशोक द्विवेदी लोकभाषा भोजपुरी में अभिव्यक्ति के पुरनका रूप, अउर भाषा सब नियर भले वाचिक (कहे-सुने वाला) रहे बाकिर जब ए भाषा में लिखे-पढ़े का साथ साहित्यो रचाये लागल तब एह भाषा के साहित्य पढ़े वालन क संख्या ओह हिसाब से ना बढ़ल, जवना हिसाब से एकर बोले-बतियावे वालनपूरा पढ़ीं…

लमहर समय से नीमन नीमन बाल साहित्य रचत आवत भोजपुरी हिन्दी के अनन्य  साधक भगवती प्रसाद द्विवेदी जी के आजु उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का तरफ से दू लाख रुपिया नगद पुरस्कार का साथे बाल साहित्य भारती सम्मान से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हाथ से सम्मानित कइल गइल ह. अँजोरिया केपूरा पढ़ीं…

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी आन्दोलन के संगठनात्मक अगुवाई आ सिरिजना के अभूतपूर्व ऊँचाई देबेवाला शख्सियत के नाँव ह – आचार्य पाण्डेय कपिल। एक ओर ‘फुलसुंघी’ जइसन जियतार – यादगार उपन्यास के कामयाबी, उहँवें गीत, ग़ज़ल, दोहा के दुनिया में मील के पाथर गढ़ेवाला व्यक्तित्व। सन् 1970 से ग़ज़ल-लेखन मेंपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा पर फूहड़पन ले के हमेशा अंगुरी उठत रहेली सँ. एही अछरंग के मेटावे धोवे के कोशिश करत आवत बा बाबा मोशन पिक्‍चर्स जे भगवान आ भक्त के कहानी प अपना बनल फिलिम ‘डमरू’ से ई काम करी. भोजपुरी सिनेमा से दूर होखत दर्शकन के धारणा फेरु पवित्र करेपूरा पढ़ीं…

– आचार्य विद्यानिवास मिश्र भोजपुरी में लिखे के मन बहुते बनवलीं त एकाध कविता लिखलीं, एसे अधिक ना लिखि पवलीं। कान सोचीलें त लागेला जे का लिखीं, लिखले में कुछ रखलो बा! आ फेरो कइसे लिखीं? मन से न लिखल जाला! आ मन-मानिक होखो चाहे ना होखो-हेरइले रहेला, बेमन सेपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह भारत के देशद्रोहियन के गढ़ बन चुकल जेएनयू से शुरु भइल नारा – भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशा अल्ला, इंशा अल्ला – के आवाज बँवारा गिरोहन के गढ़ बनल दोसरो विश्वविद्यालयन से गुजरत गुजरात आ महाराष्ट्र में जोरदार तरीका से सुनाए लागल बा त एकरा पाछेपूरा पढ़ीं…