गाँव के एगो रंगदार आपन भईंसिया सड़के पर बान्हत रहुवे. आवे जाए वाला लोग ओकरा से परेशान रहलन. आखिर पंचइती बइठल आ कहल गइल कि बाबू तू आपन भईंस कहीं अउर बान्हल करऽ आ रहिया पर से खूंटवा हटा ल. रंगदार कहलसि कि पंचन के फैसला सिर माथे बाकिर खूंटवापूरा पढ़ीं…

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डायरी   – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल   आज का पीढ़ी में भोजपुरी खातिर अनुराग देखिके बहुत नीक लागता। बाकिर, सोशल साइट पर गइला पर तब मन बहुत दुखी होला, जब लागेला कि भोजपुरी के लेके कुछ अइसन गिरोह बन गइल बाड़े सन, जेकरा भाषा में शिष्टता दूर-दूर तक नापूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा के अकेल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल अबकी मलेशिया में 21 जुलाई 2018 के होखे जा रहल बा. एह अवार्ड समारोह के जानकारी देत यशी फिल्म्स के अभय सिन्हा बतवलें कि एह अवार्ड समारोह में भोजपुरी मेगास्टार मनोज तिवारी, हिन्दी फिल्मों के सुनील शेट्टी, भोजपुरी सुपरस्टार रविकिशन, दिनेशलाल यादव निरहुआ,पूरा पढ़ीं…

यू ट्यूब पर 13 करोड़ 5 लाख 67 हजार बार से अधिका बेर देखल गइल एह फिल्मी वीडियो के 70 हजार लोग नापसन्द कइले बा. बाकिर एही गाना के 2 लाख 42 हजार लोग पसन्दो कइले बा. भोजपुरी गीत गवनई का बारे में एकरा के महज एगो उदाहरण का रुपपूरा पढ़ीं…

– डॉ अशोक द्विवेदी लोक के संस्कृति, लोक-हृदय के भीतर निरन्तर बहत रहे वाली आत्मीय अन्तर्धारा हऽ। जीवन में तमाम आधुनिक बदलाव का बादो ई अन्तर्धारा, संवेदन-स्तर पर, लोगन का मन के बन्हले, अपना धारा में अपने आप बहाइ ले जाले। ऋतु चक्र आ मौसम का फेर बदल का साथ,पूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह पिछला हप्ता आपन बतंगड़ अधवे पर छोड़ले रहीं कि अगिला बेर एकरा के पूरा करब. बाकिर आजु के दुनिया में एक हप्ता बहुते लमहर हो जाला. चुनाव बीतते गुजरात के दलित समस्या, हरियाणा के जाट आरक्षण समस्या, पंजाब के नशाखोरी समस्या वइसहीं गायब हो जाला जइसेपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह हर बेर जब बतंगड़ लिखे बइठिलें त मन में कवनो ना कवनो खाका बन चुकल रहेला आ बाति पर बाति निकलत जाले आ बतंगड़ई पूरा हो जाले. बाकिर पता ना काहे आजु मन बेचैन बा. कई बेर श्रीमती जी टोकबो करेली कि का रात दिन कंपूटरवापूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह लोकतन्त्र, डेमोक्रेसी, में लोक-लाज ना रहि जाव त ओकरा दैत्यतन्त्र, डेमॉनक्रेसी, बने में देर ना लागे. एहघरी देश के विरोधी गोलन के हरकत देखि के त इहे लागत बा कि अगर एहनी के वश चले त दैत्यतन्त्र हावी होखे में देर ना लागी. संजोग से अबहींपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह एह घरी देश में एकही बात सुनाई देत बा – एकरा के हटावल बहुते जरुरी हो गइल बा. अगर कहीं ई पाँच बरीस अउर रहि गइल त हमनी के जिनिगी नरक करा दी. चारे बरीस में ई जइसन जइसन काम करा दिहले बा कि एकरा केपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह सबसे पहिले त रउरा सभे के रामनवमी के हार्दिक बधाई आ शुभकामना. बहुते सौभाग्य से अइसन मौका मिलल बा कि अतवार का दिने अपना बतंगड़ में अपना ईष्ट के जनमदिन भेंटाइल बा. समय समय के बाति ह. हिन्दू लोग तनिका सा एकवटल बा त देश केपूरा पढ़ीं…

– ओ. पी. सिंह फगुआ बीत गइल बा आ अब चइत चलत बा. परम्परा का हिसाब से चइत में फगुआ ना गआव बाकिर मौका प एह ले बढ़िया कवनो लाइन याद नइखे पड़त त एकरे इस्तेमाल क लिहनी ह. एगो फगुआ में सुनले रहीं ई गीत – तोहरा से राजीपूरा पढ़ीं…