Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

कुर्सी के महिमा

कुर्सी के महिमा ए भईया देखाऽ जबरदस्त,
जे पाये ऊ मस्त हो रामा जे ना पाये त्रस्त..

सबसे पहिले बुढ़वा कुर्सी कहलाए ऊऽ प्रेसीडेन्ट,
बुढ़वन खातिर फिक्स ए भईया एकर एग्रीमेन्ट.
ना कउनो विवाद भईल बा ना बदनामी के चर्चा,
नम्बर वन के कुर्सी ईऽ बा जाने बऽच्चा बऽच्चा.
ई कुर्सी के छोड़ के बाकी कुर्सी बाऽ मदमस्त,
जे पाये ऊ मस्त हो रामा जे ना पाये त्रस्त..

पीएम सीएम सांसद भईया जाने सब कुर्सी के महिमा,
कुर्सी के पावे खातिर ख्याल न रऽखे कउनो गरिमा.
प्रजातन्त्र के नारा दे के कुर्सी के दू फाड़ कईऽल बा,
का साधू का मुजरिम भईया सबकर इऽहै जात बनल बा.
सत्ता के कुर्सी के खातिर मुजरिम बन गईऽल सरपरस्त,
जे पाये ऊ मस्त हो रामा जे ना पाये त्रस्त..

कबहु रहऽल इन्द्र के कुर्सी बात बात पर डोले लागे,
जान जाये पर कुर्सी ना देब उनकर मनवा बोले लागे.
हमके तऽ ईऽ लागत भईया आपन आफत थोपे खातिर,
पृथ्वीलोक के रोग के पीछे देवलोक के ईऽ चाल बा शातिर.
अब ना डोले इन्द्र के कुर्सी षड़यन्त्र हो गईऽल जबरदस्त.
जे पाये ऊ मस्त हो रामा जे ना पाये त्रस्त..

कुर्सी के महिमा ए भईया देखाऽ जबरदस्त,
जे पाये ऊ मस्त हो रामा जे ना पाये त्रस्त..


This site has been tested for proper viewing with Internet Explorer6.0, Opera9.2, and Mozilla Firefox at 1280x1024 resolution.