Abhay Tripathi
बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी
कलयुग के नेता.
जय कलयुग के नेता भ्राता, भ्रष्टाचार के तुम हो दाता.
जे तोहरी जी हुजुरी बजावे, सुख सुविधा वो सब कुछ पावे,
चोर गद्दार के तू रखवाला मिल भारत के करें दिवाला.
जय कलयुग के नेता भ्राता, भ्रष्टाचार के तुम हो दाता.
जेकरे द्वारे तू चला जावे धन्य धन्य ऊऽऽ जन कहलाई,
खद्दर से तन आपन सजाके कहलइल तू गाँधी के भाई.
जय कलयुग के नेता भ्राता, भ्रष्टाचार के तुम हो दाता.
जे तोहके धन पहुँचवलस लक्ष्मी ओकरे घर में गइलस,
जब आवे चुनाव के बारी पैदल चले लऽऽ छोड़ सवारी.
जय कलयुग के नेता भ्राता, भ्रष्टाचार के तुम हो दाता.
हाथ जोड़ के तु बतियाऽव मुरख जनता के फुसलाऽऽव,
जीत इलेक्शन घर तू बइऽऽठ बड़ ताव से मूँछ तू ऐंठऽ.
आपन तोहरे बाटे चिन्ता जय कलयुग के नेता भ्राता.
जय कलयुग के नेता भ्राता, भ्रष्टाचार के तुम हो दाता.