Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

स्वर्ग में मचल बा हाहाकार सब केहु हो जा खबरदार,
का भईल कऽऽ शोर बा मचल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

का देवी देवता अऊर का देव गुरु सबही बा घबराईल
सबकर एक ही मंत्रणा आखिर ई आफत कहाँ से आइल,
केहु कऽ भी दिमाग नाही चलल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

काऽ होइ काऽ होइ के बीच यमराज कऽ इक दूत आइल
साथ में इक मृतआत्मा के देख सबकर दिमाग चकराईल,
सब देखे लागल एक दुसरा कऽऽ शकल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

बाअदब बामुलाहिजा़ होशियार कहके यमदूत सुनवले यम संदेश
एकरा चक्कर में नर्क में आइल आफत एहिसे ब्रह्माजी दिहले आदेश,
स्वर्ग में ही सत्ता कऽ हो सकेला बदल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

सत्ता के लालची नेता के देख ऊँहा मच गईल तहलका
अइसन स्थिति फिर ना आवे कोई उपाय करे के होई पक्का,
नया नियम के सिवा रास्ता ना बचल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.

स्वर्ग और नर्क में कउनो भी नेता कऽ आवागमन हो गइल निषेध
अब मरते ही तुरन्त पुनर्जन्म देबे कऽ पारित हो गइल आदेश,
ना रहिहैं साँप ना होई लाठी कऽ दखल इन्द्र कऽ कुर्सी फिर से डोलल.


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