Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

सुखवा सपना भइल बा

सुखवा सपना भइल बा, ना जाने कँहवा गइल बा.

आडम्बर के मंच लगल बा, हाहाकार भाषण बनल बा.
शान्ति हो गइल उद्विग्न बा, धैर्य संतोष में आइल विध्न बा.
सुखवा सपना भइल बा, ना जाने कँहवा गइल बा.

सांत्वना सहानुभूति के बजर पडल बा, मिथ्या उपहास के तूती बा.
भरसाईं में जरल लाज शरम बा, फुहडता निर्लज्जता भइल धरम बा.
सुखवा सपना भइल बा, ना जाने कँहवा गइल बा.

छप्पर फार के बरसत कलेश बा, शिक्षा संस्कार के गिरल स्तर बा.
भालू बन्दर से वेत्ता लोग बदतर बा, यजिगर काया के सख्त अभाव बा.
सुखवा सपना भइल बा, ना जाने कँहवा गइल बा.

क्षुद्रता लालच के लगल आसन बा, भ्रष्टाचार करत शासन बा.
आदर सम्मान के लागल गोली बा, लड़का लोग बाबू के फोड़त माथा बा.
सुखवा सपना भइल बा, ना जाने कँहवा गइल बा.


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