अभय त्रिपाठी

डोले बसन्ती बयार साहित्य
डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार।
गेहुँआ मँटरिया से लहरल सिवनवा,
होखे निहाल भइया सगरो किसनवा.
धरती के बाढ़ल श्रृंगार, मगन मन होला हमार।।
डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार।
बिहँसेला फुलवा, महकेला क्यारी,
ताक झाँक भँवरा लगावे फुलवारी.
मौसम में आइल बहार, मगन मन होला हमार।।
डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार।
आईल कोयलिया अमवाँ के डरिया,
पीयर चुनरिया पहिरे सवरियाँ
सोहेला पनघट किनार, मगन मन होला हमार।।
डोले बसन्ती बयार मगन मन होला हमार।

