Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

आयल मधुमास कोयलिया बोले

आयल मधुमास कोयलिया बोले .

लाल लाल सेमरु पलास बन फूले
सुमनो की क्यारी में भँवरा मन डोले,
किसलय किशोरी डारन संङ झूले
महुआ मगन हो गन्ध द्वार खोले.

आयल मधुमास कोयलिया बोले .

सुगन्धित पवन भइ चलल होले होले
ढोलक मंजिरा से गूँजल घर टोले,
रंग पिचकारी मिल करत किकोले
छनि छनि भंग सब बनल बमभोले.

आयल मधुमास कोयलिया बोले .

उड्ल गुलाल लाल भर भर झोले
मीत के एहसास बढल मन के हिडोले,
धरती आकाश सगरे प्रेम रस घोले
मख्खियन के झुण्ड पराग के टटोले.

आयल मधुमास कोयलिया बोले .


This site has been tested for proper viewing with Internet Explorer6.0, Opera9.2, and Mozilla Firefox at 1280x1024 resolution.