अभय त्रिपाठी

बनारस, उत्तर प्रदेश

भजन कर जिभिया.

भजन कर जिभिया काहे बऊरानी भजन कर जिभिया.

यह जग थोडे़ दिन कऽऽ बसेरा, रिश्ता नाता सुख सपना कऽऽ,
भ्रम टूटे बिलगानी भजन कर जिभिया काहे बऊरानी .

बालकपन में खेल में भागे बृद्ध भये तन काँपन लागे,
का करिहो अभिमानी भजन कर जिभिया काहे बऊरानी .

दिन दिन बितल जाये उमरिया समय गुजरले कुछ होईऽ न गोइयाँ,
सिर धुन धुन पछतानी भजन कर जिभिया काहे बऊरानी .

एक से बढ़कर एक गुमानी जात पात में डूबल ग्यानी,
समरथ भये अलसानी भजन कर जिभिया काहे बऊरानी .

भजन कर जिभिया काहे बऊरानी भजन कर जिभिया .