अभय त्रिपाठी

माया बा दुखदाई हो मनवा
माया बा दुखदाई हो मनवा माया बा दुखदाई,
एहि पल छीना ओहि पल दीना सदा रहे उलझाई
माया बा दुखदाई हो मनवा माया बा दुखदाई.
घर में बन में मन मन्दिर में बइऽठ के धाक जमाई,
के बा आपन के बा पराया भेद दिहि बतलाई.
माया बा दुखदाई हो मनवा माया बा दुखदाई.
बिटवा माई और बाबु से बहुते फूट कराई,
सात जनम कऽ रिश्ता भी बहुते रार मचाई.
माया बा दुखदाई हो मनवा माया बा दुखदाई.
ना कोई ले आइल बा भइया ना कोई ले जाई,
एहि से ध्यान हटा के भइया कर लऽऽ तू चतुराई.
माया बा दुखदाई हो मनवा माया बा दुखदाई.

