Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

सच बा गुरु के बचनिया

सच बा गुरु के बचनिया हो रामा जगतिया में केहु नाही अपना,
केहु नाही अपना हो सब कुछ सपना जगतिया में केहु नाही अपना.

काम नाही अइहैं धन दौलतिया ना होइहैं कोइ संगी संघतिया,
सूर, रहीम गइलैं मीरा जइसन ग्यनिया छोड़ि छोड़ि आपन निशनियाँ.
जगतिया में केहु नाही अपना.

तोहके नचावेले माया के पुतरिया ग्यान पर चलावे सगरे कटरिया,
अबहु ले सोच भइया धर के धयनवा हो जइहैं तब तोहरो ठेकनवा.
जगतिया में केहु नाही अपना.

एक दिन उड़ी जइहैं काया के सगनवा केतनो तू करबऽऽ जतनवा,
भाई बन्धु सब देखइहन नयनवा माया मिली न राम ए भइया.
जगतिया में केहु नाही अपना.

सच बा गुरु के बचनिया हो रामा जगतिया में केहु नाही अपना,


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