अभय त्रिपाठी

आजा आजा ए भोला हमार नगरी
आजा आजा ए भोला हमार नगरी,
तोहरा भंगिया खियाईब भरी गगरी।।
पाप पुण्य के हाट लगल बा,
केहु राजा केहु रंक बनल बा।
नाही चाही एमा हमके तऽ कइनो गठरी
आजा आजा ए भोला हमार नगरी....।।
सच्चाई दम तोड़ रहल बा,
झूठ के डमरू बाज रहल बा।
आऽईल कलजुग के घनघोर बदरी,
आजा आजा ए भोला हमार नगरी.....।।
लोक लाज सब छूट गईल बा,
भ्रष्टाचार के अलख जगल बा।
नाही अईब तऽ लुट जाई काशी नगरी,
आजा आजा ए भोला हमार नगरी...।।
दर्शन दुर्लभ ताज भईल बा,
सरकारी कारागार भईल बा।
नाही जईबे हम कबहु तोहार डगरी,
आजा आजा ए भोला हमार नगरी...।।
आजा आजा ए भोला हमार नगरी,
तोहरा भंगिया खियाईब भरी गगरी।।

