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Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

ई कइसन जिनगी के खेला


ई कइसन जिनगी के खेला ई कइसन जिनगी के मेला,
ना कोई कुछ ले आईल बा ना ले जाई एगुड़ो धेला।।
 
काल करावे खेला लेकिन भूल गईल सब आपन बेला,
खून के होली खेल रहल बा स्वार्थ भरल दुनिया के रेला।
ई कइसन जिनगी के खेला........।।
 
भाई के भाई दुश्मन भईल बा न नाही बाचल कउनो थैला,
नारी ही नारी के काटत जिसम हो गईल ओकरो मैला।
ई कइसन जिनगी के खेला........।।
 
इंसानन के बीच में भगवन ई कइसन हैवानी खेला,
मात खा गईल जानवर जानी बचल रह गईल ठेलम ठेला।
ई कइसन जिनगी के खेला........।।
 
कलयुग कहके केतना खेलब आपन ई माया के खेला,
खतम हो रहल दुनिया बा प्रभु अब त खोलीं आपन थैला।
ई कइसन जिनगी के खेला........।।
 
ई कइसन जिनगी के खेला ई कइसन जिनगी के मेला,
ना कोई कुछ ले आईल बा ना ले जाई एगुड़ो धेला।।