अभय त्रिपाठी

वाह रे करम वाह रे धरम
मोह माया के त्याग के भईया ले लिहले सन्यास,
लेकिन जियरा ललचे लागल तोड़ दिहले बनवास।
तोड़ दिहले बनवास बन गईले सबकर नेता प्यारा,
ले आईब राम राज कऽऽ दिहले जग मे नारा।
राम राज तऽऽ आईल नाही लेकिन जब ऊऽ गईले जेल,
मचा दिहले पूरे समाज में हिंसा के ठेलम ठेल।
कहे अभय कविराय कि भईया मत कर अईसन जुरम,
अति भईला पर सब चिल्लाई वाह रे करम वाह रे धरम।।

