Abhay Tripathi

बनारस, उत्तर प्रदेश

- अभय त्रिपाठी

कलयुगी माया के महिमा

कलयुगी माया के महिमा से सारी दुनिया दबाईल बा,
का ज्ञानी का अज्ञानी सब एहि माया में अझुराईल बा।
पढ़ब लिखब होखब नवाब कऽ नारा दुनिया से भुलाईल बा,
अब तऽ गोली तमंचा में ही दुनिया के अर्थ समाईल बा।
कलयुगी माया के महिमा.........

नेहरु गाँधी के आदर्श के नारा शिक्षक ही भुलाईल बा,
डाकू गु्ण्डन के सम्मान के खातिर विद्यापीठ अघाईल बा।
जेकर कउनो मान ही नइखे ओकरे मान मनाईल बा,
रिश्वत खाके भी नेताजी के बत्तीसा खीस निपोराईल बा।
कलयुगी माया के महिमा.........

प्रेम प्यार के फेरा में अब तऽ बिटिया से आँख लड़ाइल बा,
सजनी खातिर माई काटत जरको ना लोर चुआईल बा।
ईऽ कहनी तऽ अइसन बाटे खुद के आँख देखाईल बा,
का सोचीं हम एकरा आगे जब एहि से मनवा पटाईल बा।
कलयुगी माया के महिमा.........

अईसन भी नईखे बबुआ लोगिन दुनिया से प्रेम मिटाईल बा,
विध्वसं के बाद निर्माण भी होखी ई सपना देखाईल बा।
पूछब ऊपर नारायण से कि ई खेल से केकर दिल बहलाईल बा,
बन्द कर दीं अब कलयुग के खेला रऊए नाक कटाइल बा।।
कलयुगी माया के महिमा.........


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