﻿<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>
<rss version="2.0">
<channel> 

<item> 
<title>आखिरी बात</title>
<description>अतवार, ७ फरवरी २०१०</description> 
<link>http://www.anjoria.com/</link>
</item>

<item><title>आवत ही बरखे नही जात न भीगे नेह</title>
<description>तुलसी तहाँ न जाइये कंचन बरसे मेह. सामने से वार करे वाला दुश्मन से निबटल आसान होला बाकिर संगे रह के घात करे वाला लोगन से जतना दूर जाइल जा सके चल जायें के चाहीं. एने बहुत कुछ अइसन भइल जवना से प्रीत के दूध फाट गइल रहे तबहियो रिश्ता निबाहे का अन्दाज में चलल जात रहीं. अब रिश्तो निबाहल मुश्किल लागऽता काहे कि कवनो रिश्ता तबहिये ले चल सकेला जब ले ऊ दूतरफा होखो. एह समाज से हम आपन सारा सामग्री त पहिलही हटा लिहले रहीं बाकिर लिंक के नेवता हकारी चलत रहुवे. देखनी कि जब उहोनेवता हकारी एह समाज के मंजूर नइखे त आजु से सगरी संबंध तूड़े के एलान कर देत बानी. संचालक लोग के चाहीं कि एह आरएसएस लिंक के हटा देव लोग.</description><link>http://www.anjoria.com</link></item>
</channel> 
</rss> 