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Author: अमृतांशु

ऊसिनाइल परानवा

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बरम बाबा (संस्मरण)

– केशव मोहन पाण्डेय हमरा गाँव के बरम बाबा खाली पीपर के पेड़े ना रहले, आस्था के ठाँव रहले, श्रद्धा के भाव रहले. सामाजिक, पारिवारिक आ ग्रामीण जीवन-शैली के मिलन के छाँव रहले. समूचे टोला के पहचान रहले. मौसम कइसनको होखे, ऊ त एगो तपसी जस अपना तप से सबके सुख चाहें. जेठ के ताप में भी ऊ अपना नवका पतई से सबके तन शीतल आ मन शांत करे वाला बेना रहले. ऊ एगो जड़ (पीपल) हो के चेतन स्वरूप में सगरो गुड़ के भंडार रहले. हम आजु ले अपना होश में ओतना बड़का पीपल के पेड़ कहीं नइखी देखले. विशालता में भी, वैभव में भी आ विस्तार में भी. लइकाईं में जगिरहाँ में हल्दी कुँवर बाबा के अथान देखले रहनी. उनकर डाढ़ फइलल रहे बाकीर तना से दूब्बर-पातर. उतरही डाढ़ तीन-चार मीटर पर फिर से धरती के छुअले रहे, तब जा के बान्हा के ऊपर उठल रहलें. कई बेर लइकाईं के नजर में बसल दृश्य जिनगी भर हीयरा में हिलोरत रहेला. हमरा आजुओ ईयाद बा कि शायद सन 1982-83 के बात होई. अयोध्या से राम लीला मंडली आइल रहे. हमरा टोला के लगभग सगरो मेहरारू लोग आ ओह लोग के साथे दीदीओ लोग रामलीला के रस लेबे जाव. सुरक्षा के खयाल क के भाइयो लोग जाव. चाचा-काका लोग के साथे भीमो बाबा कबो-कबो जास. ओह उमीर ले माई के अँचरा से हमके अलगा रहे के कवनो सवाले ना...

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माई से बढ़के ना गुरू भगवान

– ओमप्रकाश अमृतांशु (माई के दिन प खास क के) माई से बढ़के ना गुरू, भगवान , माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. आँचरा के छईयां में दुधवा पिआइके, मुखवा निहारेली तेलवा लगाइके, कोरवा में सुखवा के होखेला बिहान. माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. लोरिया सुनावेली चँदा बोलाावेली, नजरि उतारे खतिर मरिचा जरावेली, रोअत औैलादवा के होली मुसुकान. माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. झिरी-झिरी नेहिया के बेनिया डोलावे, माई के ममता करेजवा सहलावे, घड़ी-घड़ी छिड़केली आपन पारान. माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. के बा जे माई के करजा उतारी, महिमा बा जेकर धरतिया से भारी, रोंवा-रोंवा नेवछावर पल-पल होखे बलिदान. माई देवी, माई दुर्गा सबसे...

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बिहार के ठेंगा देखवलस भाजपा के घोषणा-पत्र

प्रधानमंत्री के कुर्सी के ललायित नरेन्द्र मोदी बिहार के जनता से आपन कइल वादा भुला गइलन .  चुनावी रैली आ चाय के चर्चा के दौरान कहत फिरत रहन कि हम बिहार के विशेष राज्य के दर्जा दिलाइब . हम बिहार के विकास खातिर विशेष आर्थिक पैकेज ले के आइब.  सोमवार के जब भाजपा के घोषणा -पत्र आइल ओहमे विशेष राज्य के दर्जा त दूर के बात बा, बिहार के नाम तक नइखे .  प्रधनमंत्री के कुर्सी पावे खातिर हर पार्टी के लोग बिहार आ उत्तर प्रदेश के सिट पे नजर गड़ावेला .  इहे भाजपा के नेता लोग बिहार के विशेष राज्य के दर्जा दिलावे खातिर कसम खात रहे .  अब साफ हो गइल बिहार के केहू आगे बढ़ल नइखे देवल चाहत . बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कहना बा- भाजपा के घोषण- पत्र बिहार विरोधी बा . असम के बाढ़ समस्या सुलझावे के जिक्र त बा, बिहार के उल्लेख नइखे, जबकि बिहार देश के सबसे आधिक बाढ़ग्रस्त राज्य हउए .  जबतक बिहार के आपन ताकत ना होखी, दोसर पार्टी बिहार के राजनैतिक सौदेबाजी के मंच बनाके रखी . बिहार के विशेष राज्य के दर्जा दिलवावे के आपन वादा के घोषणा-पत्र में शामिल ना करके भाजपा बहुत बड़ धोखा देले बिया बिहार के जनता-जनार्दन के साथे .  अइसे में अगर भाजपा के खिलाफ माहौल बन जाई त सउंसे गुड़ गोबर हो जाई . – ओमप्रकाश अमृतांशु      ...

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मनोज तिवारी के समर्थन में भोजपुरी संगठन आ भोजपुरी सिनेमा के लोग आगे आइल

भाजपा उतर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा संसदीय सीट के प्रत्याशी मनोज तिवारी पहिले अटल बिहारी बाजपेयी के सरकार में मैथिली के मान्यता मिलल रहे. मोदी सरकार में भोजपुरी के मान्यता दिलावे के हमार कोशिश रही. 20 करोड़ भोजपुरी भाषी लोगन के साथे कांग्रेस बार-बार छल कइले बिया. एह बयान प भोजपुरी समाज दिल्ली के अलावे पूर्वाचंल संगठन के लोग मनोज तिवारी के समर्थन देवे के एलान कर दिहलस. अमेरिका से आइल एन आर आइ फ्रेंडस क्लब, भोजपुरी पंचायत, आ हेलो भोजपुरी जइसन संस्थो मनोज तिवारी के साथे खड़ा हो गइल. भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे मनोज तिवारी के बयान के स्वागत कइलन आ घोषणा कइलन कि समूचा भोजपुरी समाज मनोज तिवारी के समर्थन देवे खातिर तइयार बा. भोजपुरी समाज पन्द्रह साल से देश-विदेश के अलग-अलग मंच से भोजपुरी के मान्यता दिलावे के लड़ाई लड़ रहल बा. एह में मनोज तिवारी के अहम भूमिका रहल बा. मनोज तिवारी के पूरा समर्थन देत बानी जा. अभिनेता आ भाजपा प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा, भोजपुरी फिल्म अभिनेता दिनेश लाल ‘निरहुआ’,आ गीतकार बिपीन बहार लिहले समूचा भोजपुरी फिल्म इण्डस्ट्री के लोग मनोज तिवारी के समर्थन में एक जुट हो गइल बा. दिल्ली के कुल ७ गो लोकसभा सीट में से 27 गो विधान सभा क्षेत्र में पूर्वाचंली मतदाता के दबदबा बा. सर्वे के अनुसार पूर्वी दिल्ली 13 गो विधान सभा क्षेत्र में पूर्वाचंली लोगन के दबदबा बा, त पश्चिमी दिल्ली में पाँच गो विधानसभा क्षेत्र में पकड़ मजबूत...

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मोदी सरकार में भोजपुरी के मान्यता मिली…..

सोलहवी लोकसभा खातिर उत्तर-पूर्वी  दिल्ली से भाजपा के  उम्मीदवार मनोज तिवारी अपना चुनाव प्रचार में भरोसा दिलावत बाड़न कि- मोदी सरकार बनी त भोजपुरी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावल हमार सबसे पहिला काम होखी. पिछला दस साल से कांग्रेस हमनी, यानी भोजपुरी के मांग करेवाला, लोगन के अश्वासन दे के रखलस. बिहार आ उत्तर प्रदेश समेत दुनिया के बारह देशन में लगभग 20 करोड़ लोग भोजपुरी बोलेेला. संसद में कई बेर एह विषय पे भाजपा के तरफ से अवाज उठावल गइल. पी चिदंबरम के तरफ से भरोसो मिलल, बाकिर उ सब कुछ झूठ रहे. केतना देशन में भोजपुरी के मान्यता मिल चुकल बा, अपने देश में आपन भोजपुरी भाषा उपेक्षित रह गइल बिया. पन्द्रहवी लोकसभा में सभे के आशा रहे कि हमनी के आपन हक मिल जाई. भोजपुरिया भाई लोगन के भावना से खेलवाड़ भइल बा. भोजपुरी भाषा के छांव में हम खेलनी-कूदनी, गाावे-बजावे के सिखलीं, इहे हमरा के हमार पहचान दिहलसि. आज हमार पहचान बा त भोजपुरी से. जब हमार पहचान भोजपुरी से बा, त हम भोजपुरी से मुंह कइसे मोड़ लिहीं? मनोज तिवारी आरोप लगवलन कि कांग्रेस, आम आदमी पार्टी के लोग आपन फायदा खातिर चुनाव लड़त...

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होली के हिलोरा उठल सात समुन्दर पार

केशव मोहन पाण्ड़ेय पिचकारी के धार, गुलाल के बौछार, अपना लोगन के प्यार, इहे त हउए होली के तेवहार .  जी, भारत के धरती के हीं उपजाऊपन के महिमा देखीं आ भोजपुरिया जीवटता देखीं कि भारत के लाल जे लोग अर्टेसिया, कैलि.फोर्निया, यू ए एस में रहे ला लोग, होली के हिलोरा आहिजा ले पंहुचा देले बा लोग. ओहिजा के संस्था ‘भोजपुरी परिवार’ बहुत हंसी-खुशी आ उल्लास से, बड़ा मन के मिजाज से रंग के तेवहार होली खूब मौज-मस्ती के साथे, सगरो भईया-भउजी मिल के मनावल लोग . ई होली मिलन 22 मार्च के अर्टेसिया पार्क, कैलि.फोर्निया में आयाजित कइल गइल रहे .  भोजपुरिया सरोकार आ संस्कृति के रक्षा आ विस्तार खातीर भोजपुरी परिवार के स्थापना भइल . परिवार के सभ सदस्य लोग मिलके खूब तैयारी करेला लोग आ सभ मेहमान लोगिन के साथे होली खेलके, नाच-गाना करके, साथ में स्वादिष्ट भोजन के आनंद लेवे ला लोग . अबकि साल पुरे कैलि.फोर्निया से सैकड़ों लोग भाग लिहलस, जवना में आधे से अधिका भोजपुरी बोेले वाला लोग रहे .  सउंसे लोगन के इकठ्ठा होखल एह बात के प्रमाण आ समर्थन देखावता कि विदेशन में भी भोजपुरी बोली, भाषा आ संस्कृति के संरक्षण खातिर सभे प्रयत्नशील बा . कार्यक्रम के नाम रहे ‘फगुवा’ जेकर उपज हमार संस्कृति के ‘फागुन’ शब्द से भइल .  जेकर, मतलब ‘बसंत ऋतू’ होखेला . एह कार्यक्रम में हर उम्र के लोग आपन परिवार, आपन दोस्त लोगन के साथे...

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मईया करेली सिंगार

– ओमप्रकाश अमृतांशु लह-लह लहसेला नीमिया के गछिया, शीतल बहेला बेयार, ताहि तर मईया करेली सिंगार. सोनरा के बिटिया झूमका ले आइल, ले अइली गरवा के हार, अद्भूत रूपवा चमकेला चम-चम, टिका शोभेला लिलार, ताहि तर मईया करेली सिंगार. मालिनी बिटिया गजरा ले अइली, करेली वीनती गोहार, ओढ़उल फूलवा से डलिया सजवली, ये माई करीं स्वीकार, ताहि तर मईया करेली सिंगार. लली चूनरिया बाजाजवा ले आइल, जेकर सोनहुला किनार, लाले चुड़ी लाले-लाले लहठिया, चुड़िहारवा लेके भइले खाढ़, ताहि तर मईया करेली सिंगार . भैरव के दिदिया सुनेली अरजिया, भरेली सबके भंडार, चमके तिरशुल जब-जब तरूअरिया, दुष्टन के होला संहार, ताहि तर मईया करेली...

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अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ के विचार गोष्ठी आ निंदा प्रस्ताव

– ओमप्रकाश अमृतांशु साहित्य समाज के आइना होखेला. साहित्य में समाज के दरद, प्रेम, वियोग के भाव समाहित रहेला. भोजपुरी कहानी कवनो भाषा से कम नइखे. प्रतिरोध के स्वर अत्यंत मुखर बा. भोजपुरी कहानी के विषय जमिन से जुड़ल आ स्पष्ट होखेला. आज के समसामयिक विषय चाहे कवनो प्रकार के होखे, भोजपुरी के कहानियन में लउकत बा. इहे कुल्हि विचार सामने आइल जब पिछला दिनें, 23 मार्च के, अखिल भारतीय भोजपुरी लेखक संघ के ओर से खेलगांव दिल्ली में एगो विचार गोष्ठी के आयोजन भइल. विषय रहे समसामयिक समस्या आ भोजपुरी कहानी. एह गोष्ठी में दस गो चिंतक लोग अलग-अलग विषय पे प्रकाश डाले के प्रयास कइलस. जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, हिन्दी विभाग के राजेश कुमार मांझी आपन कहानी मजूर के कुछ अंश सुनवलन. गांव के समसामयिक विषय के चित्र सबके सोझा रखलन. कहलन कि विरोध के लहर जब ले ना जागी, तबले गरीबन के भाग्य ना जागी. रंगकर्मी आ कहानीकार लवकांत सिंह समाज में व्याप्त दहेज के विषय उठवलन. कहलन कि दहेज आज समाज के हर वर्ग के लोगन के नोंच-नोंच के खा रहल बा. हेलो भोजपुरी के संपादक राजकुमार अनुरागी पुरान आ जकड़ल परम्परा के तूड़े पे जोर दिहलन. पूछलन कि जवना परम्परा से समाज दुखित बा उ परम्परा काहे खातिर रही. योगेश सिंह के अनुसार समय कवनो होखे साहित्य ओहि समाज के तत्व होखे. रंगकर्मी संजय रितुराज भिखारी ठाकुर के गीत “गंगा जी के भरली अररिया” सुनाके...

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भोजपुरी में मंचन भइल ‘कबिरा खड़ा बाजार में’

ओमप्रकाश अमृतांशु मंच पे काशी के बाजार . एक ओर मस्जिद, बीच में मंदिर, किनारे में छोटहन फूस के झोपड़ी. झोपड़ी पे पसरल अंजोर, जहंवा कबीर आ उनकर मतारी नीमा के संवाद चलत बा. नीमा – आज बाजार में का भइल रहे ? कबीर – मुसुका के कुछुओ ना माई. दोकान में सेठिया सुतल रहे. हम सोंचलीं जाग जाई त थान बेचे के बात करब. देखलीं ओने दू गो कसाई एगो गाय के बन्हले जात रहलें सं. पीछे-पीछे गाय के बछड़वो जात रहे. हमके बहुते बुरा लागल. नीमा- आ तु बीच में कूद पड़लऽ. कबीर- ना त. हम ओकनी से कुछु ना कहलीं. बाकिर, हमरा एगो कवित सूझ गइल. हम खड़े-खड़े कवित कह देहनी, माई. नीमा- लोग तोहार कवितन से चिढ़ेला त तू काहे कहेलऽ ? का कहले रहलऽ ? कबीर- हम कहलीं – दिन भर रोजा रहत है, रात हनत है गाय . यह तो खून से बंदगी, कैसे खुशी खुदाय .. कबीर पढ़ल-लिखल ना रहतो बहुते विद्वान रहन. पन्द्रहवी शताब्दी में कबीर सबसे शक्तिशाली आ प्रभावशाली आदमी रहन. उ मुसलमान होइओ के मुसलमान ना रहन आ हिन्दू होइओ के हिन्दू ना. घूम-घूम के हिन्दू-मुस्लिम लोगन साथे सत्संग करत रहन. एही से उनकर रूझान निर्गुण उपासना के तरफ हो गइल रहे. कबीर हिन्दू-मुसलमान दुनो के कुप्रथा आ बाहरी आडम्बर के खुल के विरोध कइलन. कबीर के भाषा के खिचड़ी आ साधुक्कड़ी कहल जात रहे. माला पहन तिलक लगाया,...

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