– ओमप्रकाश अमृतांशु अखड़ेड़े लिहबू का जनवा हो ? ऊसिनाइल परानवा. लूकवा लूकारी लेई धावे अंगार के, झउंसाइल मुहंवा कुदरती सिंगार के, पपड़िया गइल तालवा-पोखरवा हो, ऊसिनाइल परानवा. हिरणा पियासा ऐने-ओने धावे, कोइली-पपिहा के जीव छछनावे, खदकत पसेनवा में तनवा हो, ऊसिनाइल परानवा. घामवा के आंचवा में जरि गइलें चामपूरा पढ़ीं…

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– केशव मोहन पाण्डेय हमरा गाँव के बरम बाबा खाली पीपर के पेड़े ना रहले, आस्था के ठाँव रहले, श्रद्धा के भाव रहले. सामाजिक, पारिवारिक आ ग्रामीण जीवन-शैली के मिलन के छाँव रहले. समूचे टोला के पहचान रहले. मौसम कइसनको होखे, ऊ त एगो तपसी जस अपना तप से सबकेपूरा पढ़ीं…

– ओमप्रकाश अमृतांशु (माई के दिन प खास क के) माई से बढ़के ना गुरू, भगवान , माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. आँचरा के छईयां में दुधवा पिआइके, मुखवा निहारेली तेलवा लगाइके, कोरवा में सुखवा के होखेला बिहान. माई देवी, माई दुर्गा सबसे महान. लोरिया सुनावेली चँदा बोलाावेली, नजरिपूरा पढ़ीं…

प्रधानमंत्री के कुर्सी के ललायित नरेन्द्र मोदी बिहार के जनता से आपन कइल वादा भुला गइलन .  चुनावी रैली आ चाय के चर्चा के दौरान कहत फिरत रहन कि हम बिहार के विशेष राज्य के दर्जा दिलाइब . हम बिहार के विकास खातिर विशेष आर्थिक पैकेज ले के आइब.  सोमवार के जब भाजपा के घोषणापूरा पढ़ीं…

भाजपा उतर-पूर्वी दिल्ली लोकसभा संसदीय सीट के प्रत्याशी मनोज तिवारी पहिले अटल बिहारी बाजपेयी के सरकार में मैथिली के मान्यता मिलल रहे. मोदी सरकार में भोजपुरी के मान्यता दिलावे के हमार कोशिश रही. 20 करोड़ भोजपुरी भाषी लोगन के साथे कांग्रेस बार-बार छल कइले बिया. एह बयान प भोजपुरी समाजपूरा पढ़ीं…

सोलहवी लोकसभा खातिर उत्तर-पूर्वी  दिल्ली से भाजपा के  उम्मीदवार मनोज तिवारी अपना चुनाव प्रचार में भरोसा दिलावत बाड़न कि- मोदी सरकार बनी त भोजपुरी भाषा के संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करावल हमार सबसे पहिला काम होखी. पिछला दस साल से कांग्रेस हमनी, यानी भोजपुरी के मांग करेवाला, लोगन के अश्वासन दे केपूरा पढ़ीं…

केशव मोहन पाण्ड़ेय पिचकारी के धार, गुलाल के बौछार, अपना लोगन के प्यार, इहे त हउए होली के तेवहार .  जी, भारत के धरती के हीं उपजाऊपन के महिमा देखीं आ भोजपुरिया जीवटता देखीं कि भारत के लाल जे लोग अर्टेसिया, कैलि.फोर्निया, यू ए एस में रहे ला लोग, होली केपूरा पढ़ीं…

– ओमप्रकाश अमृतांशु लह-लह लहसेला नीमिया के गछिया, शीतल बहेला बेयार, ताहि तर मईया करेली सिंगार. सोनरा के बिटिया झूमका ले आइल, ले अइली गरवा के हार, अद्भूत रूपवा चमकेला चम-चम, टिका शोभेला लिलार, ताहि तर मईया करेली सिंगार. मालिनी बिटिया गजरा ले अइली, करेली वीनती गोहार, ओढ़उल फूलवा सेपूरा पढ़ीं…

– ओमप्रकाश अमृतांशु साहित्य समाज के आइना होखेला. साहित्य में समाज के दरद, प्रेम, वियोग के भाव समाहित रहेला. भोजपुरी कहानी कवनो भाषा से कम नइखे. प्रतिरोध के स्वर अत्यंत मुखर बा. भोजपुरी कहानी के विषय जमिन से जुड़ल आ स्पष्ट होखेला. आज के समसामयिक विषय चाहे कवनो प्रकार केपूरा पढ़ीं…

ओमप्रकाश अमृतांशु मंच पे काशी के बाजार . एक ओर मस्जिद, बीच में मंदिर, किनारे में छोटहन फूस के झोपड़ी. झोपड़ी पे पसरल अंजोर, जहंवा कबीर आ उनकर मतारी नीमा के संवाद चलत बा. नीमा – आज बाजार में का भइल रहे ? कबीर – मुसुका के कुछुओ ना माई.पूरा पढ़ीं…