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Author: Editor

बुड़बक बुझावे, से मरद – बतंगड़ 58

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मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू

– हरीन्द्र हिमकर मईया लछिमी तू मड़ई में अइतू दुअरिआ पर दिअरी सजइतीं मड़ई में अइतू त चटइ बिछइतीं गाइ का गोबरा से अंगना लिपइतीं मूज का रसरिआ में आम का पतईयन से झलर-मलर झलर-मलर झलरी लगइतीं। मईया लछिमी जो अंखिया घुमइतू त राह में अंजोरिआ बिछइतीं हरदी चउरवा से चउका बनउतीं दूब -धान पंखुरी से चउका सजउतीं केरा का पतई पर मरचा के चिउरा आ दही गुड़ परसी के जेवना जेंवंवती। मईया एकबेर जूठन गिरइतू त असरा के कलसा सजइतीं एक बेर अइतू त लइतीं बतासा बजवइतीं दुअरा पर पिपुही आ तासा मनफेरवट तोहरो नू होइत हे माई...

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बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs

– हरीन्द्र ‘हिमकर’ बिहंसs दुल्हिन दिया जरावs कुच -कुच रात अन्हरिया हे। नेहिया के बाती उसकावs बिहंसो गांव नगरिया हे। तन के दिअरी,धन के दिअरी, मन से पुलक-उजास भरs गहन अन्हरिया परे पराई जन -जन में विश्वास भरs हिय के जोत जगावs सगरो फाटो बादल करिया हे। अमर जोत फइलावs दुल्हिन अमरित दिअरी में ढारs झुग्गी, महल, अटारी चमके समता के दिअरी बारs जमकल जहां अन्हरिया बाटे उहंवे कर अंजोरिया हे। अंचरा में मत जोत लुकावs दुलहिन जोत लुटावs तू कन-कन में फइलो उजियारा सुख सगरो पसरावs तू घर -घर दीप जरी मन हुलसी जग-मग करी बहुरिया हे। हरीन्द्र...

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चचवा के चाल घर बिगाड़ दिहलसि – बतंगड़ 57

– ओ. पी. सिंह अपना के जनम का गलती से हिन्दू बाकिर संस्कार से इस्लामी बतावे वाला चचवा के चाल लागत बा कामयाब हो गइल. हिन्दू बहुल हिन्दुस्तान के एही चलते नाम रखलसि इण्डिया, भारत त बस बुड़बक बनावे ला लिखाइल-कहाइल. राज चलवलसि गवर्नमेंट आफ इण्डिया. देश के बँटवारा मजहबी आधार पर होखे के समझौता रहला का बादो चचवा एह देश के सेकुलर बनवावे का जिद प अड़ गइल आ अपना चालबाज लोकप्रियता का चलते मनवाइओ लिहलसि कि मुसलमान एहिजे रहीहें आ उनुका अतना अधिकार मिली जतना ला हिन्दू तरस के रहि जइहें. आ एही चालबाजी के नमूना बनल...

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दुमुंहा

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि चीरा लगते अंउजाइल बहरियाए लगलें । तीखर घामे दँवकल भीत जुड़ाले पेटे पेट अदहन अस भइल बात कबो ना सिराले मुँह से लार अस टपक जाले । पजरे क परतीत साँच ना होले मनई बहरूपिया अस स्वांग रचेला समने अलगा पाछे अलगा बांचेला महाभारत । दूभर होला मीठ बोलवा के चिन्हल जानल पहिचान्हल डोड़हा लेखा दुमुंहा कीरा कब डँसी आ केहर डँसी पता ना चले...

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तोहरा से राजी ना ए बलमुआ – बतंगड़ 56

– ओ. पी. सिंह आजु एगो गीत बरबस याद आ गइल – तोहरा से राजी ना ए बलमुआ, तोहरा से राजी ना. हमके नीम्बुआ बिना तरसवले बलमुआ तोहरा से राजी ना. एह प्रेमगीत में नायिका के ओरहनो बा आ प्रेम निवेदनो बा. बाकिर जालिम बलमुआ समुझे तब नू बाति बने. पहिले सुनत रहनी कि अगर कवनो लालसा, वासना, कामना पूरा भइला बिना आदमी के मौत हो जाय त ओकरा प्रेत बने के अनेसा बनि जाला. साथही इहो सुने में आवेला कि कलियुग में आपन सगरी सरग-नरक एहिजे भुगत लेबे पड़ेला. एह घरी एह तीनो बाति के नमूना साक्षात देखे...

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फिल्मी कैरियर के पहिला पड़ाव – बॉलीवुड सिनेमा स्कूल

● अगर सिनेमा में जाए के सपना होखे ? ● फिलिम बनावे के चाहत होखे ? ● फिलिम के जुनून होखे ? ● सिनेमा के सफर में रुचि होखे ? ● सिनेकर्मी बने के चाहत होखे ? ● फिलिम निर्माण में कैरियर बनावे के होखे ? त बॉलीवुड सिनेमा स्कूल राउर पहिला पड़ाव बन सकेला. बॉलीवुड सिनेमा स्कूल शुरु कइले बा – – फिलिम निर्माण में छह महीना के डिप्लोमा कोर्स – अभिनय के सर्टिफिकेट कोर्स तीन महीना में. बॉलीवुड सिनेमा स्कूल के खास कोर्स रउरा कैरियर के एगो उड़ान दे सकेला. एहमें मिलीहें – – मुम्बई विश्वविद्यालय के...

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भोजपुरिया समाज : कब बदली तेवर

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरिया समाज शुरूए से कबो ना थाकेवाली मेहनत, जीवटता, संघर्षशीलता, अपना दम-खम आउर बल-बेंवत का बदउलत मनमाफिक मुकाम हासिल करे खातिर जानल जाला। ‘कर बहियाँ-बल आपनो, छाड़ि बिरानी आस’ इहवाँ के मनई के मूल मंतर रहल बा। तबे नू, खाली देसे में ना, बलुक विदेसो में गिरमिटिया मजूर बनाके जवना लोगन के भेजल गइल, उहे लोग उहाँ के झाड़-झंखाड़, ऊसर-बंजर आ बिरानी के खून-पसेना के गमक से, लहलहात हरियाली-खुशहाली से लबालब भरि दिहल आउर तमाम तरह के साँसत सहत ना सिरिफ आपन पहिचान बरकरार राखल, बलुक उहाँ के सभसे बड़हन पद-पदवियो पावे में कामयाब भइल।...

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विजया, के जया ? – बतंगड़ 55

– ओ. पी. सिंह संस्कृत भा संस्कृत से उपजल भाषावन में कवनो दोसरा शब्द का पहिले लाग के ओह बाद वाला शब्द के माने बदलत भा ओकरा के अउर पोढ़ करेवाला शब्द के उपसर्ग कहल जाला आ वि अइसने एगो उपसर्ग ह. जब ई कवनो दोसरा शब्द का पहिले जुड़ेला त अधिकतर मामिला में ओकर उल्टा मतलब बना देला आ कुछेक मामिलन में ओकरा के अउर बलशाली अउरी भावगर आ पोढ़ क देला. जइसे कल का उल्टा विकल, मल का उल्टा विमल वगैरह. बाकिर जय का साथे जुड़ के ओकरा के अउर भावगर अउर महान विजय बना देला. अब...

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रोहिंग्या रोहेंगा – बतंगड़ 54

– ओ. पी. सिंह कुछ बात बा हिन्दुस्तान में कि नमकहराम एकरा खिलाफो रहेलें आ एहिजे ठाँवो खोजेलें. हिन्दुस्तान के बड़हन जमात रहला का बावजूद एहिजा हिन्दूवन के आवाज पसरे ना दीहल जाव. मीडिया आपन पूरा जोर लगा देले कि हिन्दूवन का खिलाफ होखत अन्याय के खबर मीडिया में जनि आ पावे आ छोट से छोटो खबर जवना के इस्तेमाल हिन्दूवन का खिलाफ कइल जा सके ओकरा के जम के उछालल जाव. पिछला सरकार का बेरा त एह तरह के मीडिया अतना ताकतवर रहल कि केहू कुछ बोल ना पावत रहुवे. धन्य हो सोशल मीडिया के आगम, जवना का...

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