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Author: Editor

बघवा के डर नइखे टीपटीपवा के डर बा – बतंगड़ 51

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जाने कवन राहे अइहें

– प्रिन्स रितुराज छन छन छनके आहट सुन के मन गचके जाने कवन राहे अइहें इहे सोच के मन खटके. आदत अइसन उनकर भइल बिना सोचे मन तरसे नशा केतना नशीला होला देख के उनके अइसन सूझे. अंग अंग के अइसन रचना लागे फुरसत में रहले राम तनिको हमनियो पर रहित धयान लिहती हजार नैना हथिया. कारी कजरा मदहोस बा कइले चाल त बा पागल बनवले हाथ के मेहदी के करामत सुनऽ सुनरता प बा चार चान लगवले. कमर कमानी पातर छितर चिकन बा चाम हो माछी बइठत बिछ्लत जाले काबू में ना होला ओकर देह हो. माई बाप...

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राजनीति के रंग आ रंग के राजनीति – बतंगड़ 50

– ओ. पी. सिंह राजनीति के रंग-ढंग रंगो मैं राजनीति ले के चल आइल बा. कहल जाला कि राजनीति के असर जिनिगी के हर पहलू प पड़ेला आ एकरा से बाचल ना जा सके. बाकिर जब ई रंगो में राजनीति देखे लागे, ओकरा के गाढ़ करे लागे त नोटिस लीहल जरुरी हो जाला. केहू माने भा मत माने, अपना देश के मूल में हिन्दू संस्कार बा जवना प बाद में आइल हमलावरन के संस्कृति संस्कारन के असर पड़त गइल. हिन्दू संस्कार भेदभाव के खिलाफ रहल बा. एह संस्कार में वसुधैव कुटुम्बकम के भावना शुरु से रहल बा. एही चलते...

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खलील खाँ बहुते दिन फाख्ता उड़ा लिहलन – बतंगड़ 49

– ओ. पी. सिंह गुजरात से राज्यसभा के तीन गो सीट ला भइल चुनाव में जइसन दाँवपेंच देखे के मिलल तइसन आजु ले देखे ला ना मिलल रहुवे. लोग त मान के चलत रहुवे कि राज्यसभा चुनाव कहहीं भर के चुनाव होला. एह में सबकुछ पहिलहीं से तय रहेला. कबो कबो एक सीट प मारामारी होखबो करेला त ओहमें बहुत सस्पेंस भा थ्रिल ना होखे. अकसरहां वइसन मौकन प कवनो धनी अपना धनबल से जीत के जोगाड़ बइठा लेबेलें. बाकिर गुजरात में अबकी जवन देखे के मिलल तवन राजनीति के बढ़िया पाठ पढ़ा गइल. बहुले लोग राज्यसभा चुनाव के...

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फहरावs तिरंगा

फहरावs फहरावs तिरंगा आसमान में फहरावs । केसरिया के अमर सनेसा शान्ति रहो सुख चैन रहो तप के धनी रहो ई धरती प्रेम मगन सब नैन रहो ईहे भाव लेके ए भईया झंडा का नियरा आवs। फहरावs फहरावs तिरंगा आसमान में फहरावs। ऊजर धप धप के सनेस बा हंस बनs ज्ञानी होखs ज्ञान तेज से चमके भारत संतोषी दानी होखs वेद वि्वेकी बनो देस ई भाव फूल तू बरसावs। फहरावsफहरावs तिरंगा आसमान में फहरावsय़ हरिहर अंचरा के सनेस बा बन – जीवन के रखवारी धानी रंग खिले धरती पर चहको महको फुलवारी हरखित मन से धजा उठावs धरती भर...

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जिबह आ झटका के राजनीति – बतंगड़ 48

– ओ. पी. सिंह समुझ में नइखे आवत कि अब एह देश के राजनीति कइसे चली. अबहीं ले देश के हिन्दूवन के आ हिन्दुत्व के राजनीति करे वाला जनसंघ-भाजपा में किलर इंस्टिंक्ट ना रहला का चलते सेकुलर गिरोह एह लोग के प्यार से जिबहत रहलें आ ई लोग ओकरा के बरदाश्त करत रहुवे. सेकुलर गिरोह के दाँवपेंच देश के अदालतो सीख लिहली सँ. छह बरीस के लड़िका सरेआम गड़ाँसा ले के बकरी जिबह कर सकेला, बाकिर जन्माष्टमी का दिने नारियल से दही हाँड़ी ना फोड़ सके. दिन में पाँच बेर लाउडस्पीकर चला के अपना लोगन के बोलावल जा सकेला...

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सावन -सिसक गइल बा

– डॉ राधेश्याम केसरी ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया काँप गइल बा। मेजुका-रेवां गली- गली में, झेंगुर छोड़े मिठकी तान, रोब गांठ के अँगनैया में, डेरा डाल गइल बा! बइठ मचाने देके थपरी, दादी हुलें- सिवान। तब्बो चिरई नइखे भागत, पँखवा तोड़ गइल बा। सन किरवा क चमक दमक त, आग- सरीखा लागे ला। पकड़-पकड़ हाथे से ओके, हथवा लहक गइल बा। रोज निहारीं बदरा-बदरा, चँदा कब्बो ना लउकल! केतना देखीं ऊपर-नीचे, अँखियाँ उब गइल बा। अरूआइल चेहरा क लेखा, दुपहरिया अब लागेला। लाल बुझक्कड़ हमें बताके, पियवा सरक गइल...

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भोजपुरी रंगकर्म संस्था रंगश्री के नाट्यलेखन प्रतियोगिता

भोजपुरी भाषा आ साहित्य के प्रति भोजपुरिया लोग हमेशा से लागल रहल बा. कई दशकन से ई एगो आंदोलन के रूप ले लेले बा। एह आंदोलन के तहत भोजपुरी नाट्य साहित्य के समृद्ध करे में साल 1978 से लागल बा रंगश्री। रंगश्री संस्था के शुरुआत भले बोकारो से भइल बाकिर एकर नाट्य मंचन देश भर के कई प्रमुख शहरन में हो चुकल बा। लगभग 16 साल से रंगश्री दिल्ली में भोजपुरी रंगकर्म के खड़ा करे में आपन सक्रिय भूमिका निभा रहल बा। रंगश्री के संस्थापक आ सुप्रसिद्ध रंगकर्मी महेंद्र प्रसाद सिंह जी के भोजपुरी रंगकर्म खातिर दिल्ली सरकार “बिहार...

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करमगति

(लोककथा) शिव जी का सङे पार्वती जी आकासी राहे कहीं चलल जात रही कि उनकर नजर नीचे एगो गरीब परिवार पर पड़ल। ऊ शिव जी से कहली – ‘हऊ देखतानी। केतना गरीब बाड़े स। एकनी के कवनो बरदान देके उधार करीं।’ शिव जी कहले – ‘तहनी जनी-जात में ई बड़का बेमारी बा। बिना कुछ जनले-बुझले बकड़-बकड़ करत रहेलू। ई तीनो मरद, महरारु आ बेटा अपना-अपना करम गति के भोग रहल बाड़े। हमरा चहले भा कुछ देले एकनी के कुछ भला नइखे होखेवाला।’ पार्वती जी बोलली – ‘ई कइसे हो सकेला जे रउरा चाहीं आ एकनी के उधार ना होखी।...

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भक्तन के मुसीबत के दिन आइल बा – बतंगड़ 47

– ओ. पी. सिंह सेकूलर मीडिया में भक्तन के नाम से जानल जाए वालन के मुसीबत के दिन आ गइल बा. संकेत त हमेशा से रहुवे बाकिर ऊ दिन अतना जल्दी आ जाई ई ना लागत रहुवे. अब सवाल बा कि ई लोग अब केकर बाजा बजावे ? ममता दीदिया के ? कांग्रेस मुक्त भारत के सपना देखे वालन के जाने के चाही कि पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के उखाड़ फेंके वाला काम ममते दीदिया कइली. आ हिन्दुत्व के सबले बड़का दुश्मन बँवारा गिरोहन के बंगाल से खदेड़े के नेक कामो ममते दीदिया के ह. अबहीं ले कुछ गलतफहमी...

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