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Author: कार्यकारी सम्पादक

भजपूरी* काहें लिखवावत बानी भाई ?

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नीक-जबून-7

डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ आजु स्टाफ रूम में इंस्पेक्शन के बात एक-एक क के उघरत रहे. हमरा प्राचार्य डॉ. संजय सिंह ‘सेंगर’ जी याद आ गइल रहीं आ हम भावुक हो गइल रहीं. 5 जनवरी के उहाँ से खड़े-खड़े भइल आधा घंटा के बतकही के एक-एक शब्द हमरा याद रहे. हमार कलिग लोग के भी आँखि भरि आइल. भइल ई रहे कि सेंगर जी का विद्यालय के एगो सब-स्टाफ के दूनो किडनी फेल हो गइल. ओकरा तीन गो लइकी रही सन आ एकहूँ के अभी बियाह ना भइल रहे. ओह गरीब परिवार...

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किताबि आ पत्रिका के परिचय – 13

डॉ. अरुणमोहन भारवि के कुछ रचना परशुराम (भोजपुरी पौराणिक उपन्यास) 1977 में भोजपुरी संस्थान, 2, ईस्ट गार्डिनर रोड, पटना से प्रकाशित. राख भउर आग (भोजपुरी जनवादी उपन्यास) 1985 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 से प्रकाशित.   मुट्ठी भर भोर (भोजपुरी कहानी संकलन) 2013 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 से प्रकाशित.   जब तोप मोकाबिल हो (भोजपुरी रिपोर्ताज संकलन) 2013 में अरुणोदय प्रकाशन, आर्य आवास, भारतीय स्टेट बैंक (मुख्य शाखा) के सामने, बक्सर- 802101 से प्रकाशित.   भारवि जी भोजपुरी के वरिष्ठ...

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पाँच दिन के भोजपुरी नाट्योत्सव

बिहार के सिवान में पाँच दिन चले वाला भोजपुरी नाटकन के उत्सव जीरादेई ब्लॉक के नरेन्द्रपुर (नरीनपुर) गाँव में होखे जा रहल बा. भोजपुरी नाटक खेले वाली मशहूर संस्था रंगश्री एह नाटकन के मंचित करी. पाँच दिन में पाँच गो नाटक खेलल जाई. (स्रोत : लव...

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दिल्ली के नाट्योत्सव में मंचित भइल “ठाकुर के कुइयाँ”

मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली द्वारा आयोजित नाट्योत्सव के धमाकेदार शुरुआत दिल्ली सरकार के कला-संस्कृति मंत्री श्री कपिल मिश्र आ अकादमी के उपाध्यक्ष श्री संजॉय सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन का सङे भइल. 21 फरवरी से 23 फरवरी तक चलेवाला एह महोत्सव के पहिला दिन मुंशी प्रेमचंद के सुप्रसिद्ध कहानी “ठाकुर का कुआँ” पर आधारित भोजपुरी नाटक ठाकुर के कुइयाँ के मंचन भोजपुरी के सुप्रसिद्ध नाट्य संस्था रंगश्री द्वारा कइल गइल. उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के मूल हिंदी कहानी के नाट्य रूपांतरण, परिकल्पना, अनुवाद आ निर्देशन लव कान्त सिंह के रहे. ई नाटक दर्शकन का सङही अकादमी के उपाध्यक्ष आ सभ अधिकारी लोग के भी बहुत पसन्द आइल....

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फगुआ के चकल्लस

– लव कान्त सिंह फगुआ के शुरू हो गइल रहे चकल्लस ऊ हमरा तरफ देखलस या कहलस भइया जी हम तहरा के रंग लगायेम हम कहनी, ओसे पहिले भाग जाएम। हम भाग के गइनी दोसरा गली में ऊ दउड़ल रंग लेले पिचकारी के नली में लागल बांचल मुश्किल बा एह होली में हम भाग के पहुँच गइनी रंग के टोली में। उन्हां सब देखते आइल हुल बगल में खड़ा रहे राहुल उनका चेहरा पर कौनो अइसे रंग लगवले रहे जइसे पप्पू के कवनो जबर्दस्ती पास करवले रहे। सोनिया जी भी लाल-पियर होत रहली ममता जी कुर्सीये पर ही सूतत...

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दू गो गीत

– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी 1 पगे पग ठोकर समय के नचवना कइसन जिनगी सटत रोज पेवना.   घुमल अस चकरी पलिहर जोताइल नमियो ना  खेते  बीया  बोआइल उमेदे से अंखुवा , फोरी  न भुंइयाँ इहे  किसानी ,आ  ओकर बोलवना. कइसन जिनगी……   बहल पछिमहिया बीरवा झुराइल अब माथे लउर , आउर घहराइल जरल नाही  चूल्हा कई कई बेरा बबुआ क बतिया कटइला बिछवना. कइसन जिनगी……   झै – झै आ कट कट सांझे सबेरे बिना दिया बाती कुच कुच अन्हेरे फाटल झुल्ला शरम टुक्का टुक्का इहे बा मजूरी, टाटी क छवना. कइसन जिनगी……   भुंवरी बा बिसुकल बबुनी लोराइल...

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किताबि आ पत्रिका के परिचय–12

डॉ. नंदकिशोर तिवारी द्वारा संस्कृत के कवि भास के भोजपुरी में अनूदित कुछ नाटक डॉ. नंदकिशोर तिवारी संस्कृत के कवि भास के एगारह गो नाटकन के भोजपुरी में अनूदित कर चुकल बानी. ई सभ नाटक रोहतास जिला भोजपुरी साहित्य परिषद, निराला साहित्य मंदिर, बिजली शहीद, सासाराम, रोहतास (बिहार) से प्रकाशित भइल बाड़े सन. एहिजा उहाँके कुछ (निम्नांकित) नाटकन के प्रस्तुत कइल जा रहल बा- उरूभंग दूतवाक्यम् कर्णभार एवम् मध्यम व्यायोग- स्वप्नवासवदत्तम् दूत घटोत्कच विश्वास के साथ कहल जा सकत बा कि एह अनूदित नाटकन के स्तरीयता असंदिग्ध बा आ भोजपुरी साहित्य इहनी पर गर्व कर सकता. – डॉ. रामरक्षा...

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किताबि आ पत्रिका के परिचय – 11

भोजपुरी के कुछ ऑफलाइन पत्रिका भोजपुरी के कुछ पत्रिका, जवन ऑनलाइन नइखी सन. एहमें से जो कवनो पत्रिका, ऑनलाइन होई त हमरा जानकारी में नइखे आ खुशी के विषय होई हमनी खातिर. एहमें से दु-तिन गो पत्रिकनके प्रकाशन थथमल बा भा फिलहाल हमरा जानकारी में नइखे. – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल rmishravimal@gmail.com...

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नीक-जबून-6

          डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल के डायरी बगसर बिसरत नइखे ए पारी के जाड़ा के छुट्टी के बहुत उत्साह रहे. बहुत दिन बाद, लगभग 30-31बरिस बाद 24 दिसंबर के भारवि जी (अरुणमोहन भारवि) से मुलाकात भइल. घंटों बतियावल आदिमी. बात ना ओराइ आ टाइम जल्दी-जल्दी बीतल जाइ . साथ में भाई मनोज चौबे भी रहन जेकर भोजपुरी संगीत के अच्छा-खासा जोगदान बा. बक्सर के ओह घरी के बात एक-एक कइके फिलिम का रील मतिन आँखि का सोझा आ रहल बिया. हम इंटर में रहीं. डॉ. कमला प्रसाद मिश्र “विप्र” जी से हमार पिताजी परिचय करा...

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