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Author: Sub-editor

भउजी हो!

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सनेही आ लेखक लोगन से निहोरा

‘अँजोरिया’ भोजपुरी समाज, साहित्य आ संस्कृति के पत्रिका हटे. बीच में कुछ कारण से एकरा के भोजपुरिका पर डाल दीहल रहुवे बाकिर पाठकन के कमी देखत ओकरा के बन्द क देबे के फैसला मजबूरी में लेबे के पड़ल. अब फेरू सगरी सामग्री वापस अँजोरिया प आ गइल बा. समाचार, साहित्य से मनोरंजन तक के रउरा चाव के विविध सामग्री परोसे के शुरुवे से हमार मन रहल बा आ आपन हर कोशिश कइले बानी कि भोजपुरिया समाज के ज्यादा से ज्यादा संतुष्ट कर सकीं आउर भोजपुरिया स्वाभिमान के संपुष्ट कर सकीं. 1. आत्मीय सनेही लोगन से निहोरा बा कि अँजोरिया पर रोज कम से कम एक बेर जरूर आईं सभे, जवने नीक लागे, पढ़ीं सभे आ आपन बहुमूल्य टिप्पणी दिहीं सभे. 2. आदरणीय लेखक लोगन से निहोरा बा कि रउँआ सभ आपन हर विधा आ विषय के सामग्री प्रकाशित करे खातिर नीचे लिखल दूनो मेल आइडी पर आपन रचना हिंदी के यूनिकोड भा कवनो फंट में टाइप कइके भेजीं. anjoria@outlook.com ksbhojpurika@gmail.com सधन्यवाद, राउर संपादक,...

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अहजह

– नीमन सिंह बतइब हो हम का करीं….. कइसे करीं कइसे रहीं का खाई का पहिनी ? बतइब हो हम का करीं…. कहवां मूती कहवां हगीं केकरा संगे बात बिचारी बतइब हो हम का करीं….. केहू कहे हई करs केहू कहे हउ करs केहू कहे मउज करs बतइब हो हम का करीं….. जेकरा कउनो लूर नईखे उहो बतावे हउ करs मन करे तवन करs जवन कहे तवन करs हम त अहजह में पड़ गइल बानी.. बतइब हो हम का...

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भोजपुरी कवि सम्मेलन

सेतु न्यास मुंबई का सौजन्य से भागलपुर, देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सालाना बइठक का मौका पर एगो भोजपुरी कवि सम्मेलनो आयोजित भइल जवना में स्थनीय कवि नित्यानंद आनन्द का साथ ही बाहरो से आइल कवि लोग आपन कविता सुना भा गा के सुनेवालन के भोजपुरी कविता के विस्तार से परिचित करवलें. कवि सम्मेलन के शुरूआत में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी कवियन आ सुने जुटल भोजपुरी प्रेमियन के स्वागत कइलन. अध्यक्षता कइलन पं. हरिराम द्विवेदी आ संचालन के जिम्मा सम्हरलन मऊ से आइल कवि डा. कमलेश्वर राय. कविता पाठ के शुरुआत भइल भाई भालचन्द त्रिपाठी के गावल वाणी वन्दना से : माई वीणा के तार झनकावेलु, सुबुधि जगावेलु ना. मन के सगरो विकार, देलु छन में निकाल माई के नेहिया के दियना जरावेलु, सुबुधि जगावेलु ना. तब अइलन पंडित विजय मिश्र जे आपन बहुते लोकप्रिय कविता ‘लइका ई नोकरिहा बा’ सुनवलन जवना में दहेज लोभी बाप अपना नोकरिहा बेटा खातिर दहेज के माँगपत्र पढ़त बा. एकरा बाद नंबर आइल नवकवि अशोक तिवारी जे आजुए रचित आपन कविता सुनवलन आ आजु के सामाजिक राजनीतिक हालात के चित्रण करत गाँव आ शहर के फरक देखवलन : ई कइसन बा खेल फकीरा ब्रेन शहर के तेज हो गइल, गाँव के माथा फेल फकीरा. एकरा बाद मंच पर अइलन नित्यानंद आनंद जे बचपन के एगो बानगी ‘आपन गउँवा आपन यार’ कविता में सुनवलन. राजनीतिक विचारधारा से समाजवादी होखला...

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मिसाइलमैन अब्दुल कलाम उड़ गइलन

भारत के राष्ट्रपति रहल, परमाणु वैज्ञानिक, महान राष्ट्रभक्त, सरस्वती साधक अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम साहब के आज अचानके निधन हो गइल. देश दुनिया में मिसाइल मैन का नाम से मशहूर अब्दुल कलाम साहब के याद ना रहल कि जब मिसाइल छोड़ल जाले त ओकरा पहिले पूरा तइयारी होला आ पल पल के हिसाब राखे के पड़ेला. आजु शिलांग के आई आई एम के कार्यक्रम में शामिल होखे चहुँपल कलाम साहब का बारे में केहू के इचिको अनेसा ना रहल कि आजु उनकर आखिरी दिन होखे जा रहल बा. 84 बरीस के अब्दुल कलाम आजु साँझ बेरा करीब साढ़े छह बजे कार्यक्रम का दौरान गिर पड़लन आ उनकर खराब तबियत देखत आनन फानन में बेथानी अस्पताल में भरती करावल गइल जहाै से उनकर प्राण पखेरू हमेशा हमेशा ला उड़ गइल. बस आपन कृति आ यादगार छोड़ गइल. उनकर पार्थिव शरीर दिल्ली ले आवे के इन्तजाम हो रहल बा. जीवन परिचय : अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम के जनम 15 अक्टूबर का दिने साल 1931 में तमिलनाडु के रामेश्वरम में भइल रहे. उनका पिता के नाम जैनुलाब्दीन रहे आ माता के नाम असिअम्मा. पिता बहुते गरीब रहलन आ मल्लाही से आपन जीवन यापन करत रहलें. एह चलते अब्दुल कलाम के अपना स्कूली पढ़ाई का समय मेहनत मजदुरिओ करे के पड़त रहे. ऊ अखबारो बाँटे के काम कइलन स्कूली पढ़ाई का दौरान जेहसे कि घर के खरचा में आपम योगदान दे...

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भोजपुरी लेके पाठक पाठिका लोग के राय – 1

सेवा में प्रधान मंत्री, भारत सरकार द्वारा – भोजपुरिका डाॅटकाॅम महाशय, हम रास बिहारी गिरी (रवि) आ भोजपुरीका वेबसाइट के जरिए रउआ से आपन दुखड़ा सुनावे के चाहत बानी. खराब लागी त ई समझ के माफ़ कर देम की ई एगो पीड़िता के अनदेखी से निकलल ब्यथा ह. हमारा संगे पहिलहीं धोखा भइल राज्य के बँटवारा के नाम पर. हमके वोह समय यूपी, बिहार, अउर एमपइ में बाँट दिआइल आ अब त अउरी छितरा दीहल बा हमरा के, झारखण्ड, उत्तरांचल, अउर छत्तीसगढ़ बना के. रउआ सभ के कहना बा कि हम राज्यभासा के अधिकारी नइखीं. राउर बात सही बा. हम राज्यभासा के लायक हइये नइखीं, हम त राष्ट्रभासा लायक बानी, रउए देखीं, जवन भासा हिन्दुस्तान में हिंदी का बाद सबले अधिका जगहा बोलल जाला ऊ राज्यभासा कइसे हो सकेला, ऊ त राष्ट्रभासा बने के जोग बा आ हम चाहत बानी कि रउरा हमरा के हमार अधिकार दिआईं. जेहसे कि हम हिन्दुस्ताने ना हिन्दुस्तान के बहरो हिन्दुस्तान के गरिमा बढ़ाईं. एमे राउर दोस नइखे. हमर संतान तनिको कमा लेलें त हमसे सौतेली माई लेखन बेवहार करे लागेलन. बाकिर हमरा नाम पर आपन दुकान जरूर चमकावेलन. ऊ सब कपूतन से हमर इहे निवेदन बा कि हमारा खातिर सोचऽ सन. हम मर जाएब त केकरा नाम पर तोहनी के दुकान चली? जय हिन्द! जय भोजपुरी! रउरा जबाब के इंतजार में रउरा देश के एगो अभागिन भासा भोजपुरी मार्फत, रास बिहारी गिरी (रवि)...

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रमबोला के याद करत आपन बात

– ओम प्रकाश सिंह साल 1975 भा 1976 रहुवे जब पहिला बेर हमरा एगो भोजपुरी के खण्डकाव्य रमबोला के जानकारी एगो दोस्त से मिलल. ऊ हमरा के ओह काव्य के एगो अंश भेजले रहुवन जवना के हम आपन एगो पत्रिका भोजपुरिहा के पहिलका अंक में शामिल कइले रहीं. वइसे त ओह पत्रिका के जिक्र भोजपुरी प्रकाशन के सई बरीस नाम के एगो शोध किताब में आइल बा बाकिर बहुत कुछ कारण से ऊ पत्रिका आगे ना निकल पावल. बाकिर रमबोला के ऊ अंश हमरा जबानी याद हो गइल रहुवे. जबे मौका मिले ओह अंश के हम अपना यार दोस्तन के सुनावत रहीं. बरीस बीतल. हम काॅलेज के देहरी पार करत रोजी का बाजार में आ गइनी बाकिर भोजपुरिहा के ललक आ याद पाछा ना छोड़लस. समय के फेर आ सितारन के गर्दिश का बीच बहुत उतार चढ़ाव देखत हम बलिया आ गइनी आ एकरे के आपन कर्मभूमि बना लिहनी. काम के कमी रहे से फुरसत में एगो दोस्त के इंटरनेट कैफे में बइठल करीं. ओहिजे से शुरुआत भइल रहुवे भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट अंजोरिया के. बाद में एकर अफसोस हमेशा रहल कि ओकर नाम हम भोजपुरिहा काहे ना धइनी. खैर बात बहक जाई आ बात बहकावे के आजु ना त मौका बा ना जरूरत. एहसे लवटत बानी फेरू रमबोला पर. रहि रहि के हमरा हरेन्द्र हिमकर नाम के ओह कवि के याद आवे. नेट पर सर्च कइल करीं बाकिर...

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महुआ प्लस के क्रिएटिव कंसल्टेंट बनलें मनोज भावुक

मशहूर भोजपुरी राइटर आ टीवी पत्रकार मनोज भावुक भोजपुरी के सबले लोकप्रिय चैनल ‘महुआ प्लस’ के क्रिएटिव कंसल्टेंट बनावल गइल बाड़ें. लोग कहेला कि टेलीविजन पत्रकारिता में प्रतिभावान लोग नइखे बाकिर कुछ टेलीविजन पत्रकार लगातार एह भरम के तूड़त रहेलें. एहीमें मनोजो भावुक शामिल बाड़न. चैनलन में रहतो ऊ दुनिया के अपना रचनात्मकता से खुश कर दिहलें. मनोज भावुक के साहित्य-जगत के अनेके प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुकल बा. उनकर ग़ज़ल-संग्रह ‘तस्वीर जिंदगी के’ खातिर उनुका भारतीय भाषा परिषद सम्मान आ भाऊराव देवरस सेवा सम्मान से नवाज़ल गइल बा. टी-सीरीज एह ग़ज़लन के आडियो रीलिज कइले बा जवन भोजपुरी के पहिलका ग़ज़ल -अल्बम हवे. मूलरूप से बिहार के सिवान जिला के मनोज भावुक यूपी के रेनुकूट में पलले-बढ़ले. हाल फिलहाल मनोज भावुक विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दिल्ली इकाई के अध्यक्ष आ दुनिया के अनेके भोजपुरी संस्थान से संस्थापक, सलाहकार भा सदस्य के रुप में जुड़ल बाड़े. 90 का दशक में मनोज भावुक बतौर फ़्रीलांसर पटना दूरदर्शन आ कुछ अखबारन ला काम शुरू कइलन. 1998 में भोजपुरी के पहिला टीवी सीरियल ‘सांची पिरितिया’ में अभिनेता बनलें आ 1999 में ‘तहरे से घर बसाएब’ नाम के टीवी सीरियल में बतौर कथा-पटकथा, संवाद आ गीत लेखक रहलन. दुनू सीरियल पटना दूरदर्शन से प्रसारित भइल रहे. साल 2008 में बतौर प्रोग्रामिंग हेड ‘हमार टीवी’ से जुड़ल आ प्रोग्रामिंग कंटेंट अउर स्पेशल प्रोजेक्ट्स एंकरिंग का साथही फिल्म, साहित्य, संगीत, फैशन, गॉसिप, डोमेस्टिक बिहेवियर, करियर, हेल्थ,...

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फँस गइले प्रेम – 1

– रासबिहारी गिरी नमस्कार ! एगो कहानी हमरा मन में बहुत दिन से घुमत रहुए. कहानी वोह समय के ह जब हम बहुत छोट रहनी, आ हम आपन बाबूजी आउर माई से सुनत रहनी. जब हम फिलिम में काम करे लगनी त ई कहानी हमके परेशान करे लागल. हमरा गाव में एगो दुलहा पिटाइल रहे. ओह कहानी पर हम जबो बात करीं केहु न केहु ई कह देव कि कहानी चली ना, आउर हम आगे बढे से रुक जात रहीं. बाकिर हमार हौसला बढ़ल “बी डी ओ साहेब” के शूटिंग के दौरान अशोक अखौरी से बातचीत कर के. उहाँ के कहनीं कि अबहीं मार धाड़ के बीच एगो सामाजिक फिल्म आई त लोग जरूर पसंद करी. फिलिम के नाम राखे पर बिचार भइल त हम कहनी कि फिलिम के नाम रखाई ‘लतखोर दूल्हा’. उहाँ से कोलकाता अइला के बाद पप्पू बाबू यानि पप्पू भारती से बात भइल. उँहो के कहानी कुछ खास ना लागल. तबहियें खबर आइल कि खेसारी लाल यादव के “लतखोर” फिलिम बनत बा. मन में आइल कि अब अपना फिलिम के नामो बदले के पड़ी. पप्पू बाबू से फेरू बात भइल त ऊ कुछ बदलाव के बाद काम करे पर तइयार हो गइले. जादूगर घनश्याम मिश्रा जी हमेशा हमार साथ दिहले. अब कहानी अपना लगे रहे. ओकरा स्क्रिप्ट पर काम होखे लागल. संगे संगे बजट बनल जवन 38 लाख के आस पास भइल. एकरा बाद हम,...

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