भउजी हो! का बबुआ? आपन नोटवा भंजा लिहलू कि ना ? हमार नोटवा त कहिये भँज गइल, रउरा अपना कनियवा वाला नोट जल्दी भंजा लीं। का भउजी, तोहरा हमेशा मजाके सुझेला! हम पाँच सौ आ हजरिया नोट का बारे में पूछनी हँ। अरे ओहिजा अबहीं लमहर लमहर लाइन लागत बा।पूरा पढ़ीं…

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‘अँजोरिया’ भोजपुरी समाज, साहित्य आ संस्कृति के पत्रिका हटे. बीच में कुछ कारण से एकरा के भोजपुरिका पर डाल दीहल रहुवे बाकिर पाठकन के कमी देखत ओकरा के बन्द क देबे के फैसला मजबूरी में लेबे के पड़ल. अब फेरू सगरी सामग्री वापस अँजोरिया प आ गइल बा. समाचार, साहित्यपूरा पढ़ीं…

– नीमन सिंह बतइब हो हम का करीं….. कइसे करीं कइसे रहीं का खाई का पहिनी ? बतइब हो हम का करीं…. कहवां मूती कहवां हगीं केकरा संगे बात बिचारी बतइब हो हम का करीं….. केहू कहे हई करs केहू कहे हउ करs केहू कहे मउज करs बतइब हो हमपूरा पढ़ीं…

सेतु न्यास मुंबई का सौजन्य से भागलपुर, देवरिया में विश्व भोजपुरी सम्मेलन के सालाना बइठक का मौका पर एगो भोजपुरी कवि सम्मेलनो आयोजित भइल जवना में स्थनीय कवि नित्यानंद आनन्द का साथ ही बाहरो से आइल कवि लोग आपन कविता सुना भा गा के सुनेवालन के भोजपुरी कविता के विस्तारपूरा पढ़ीं…

भारत के राष्ट्रपति रहल, परमाणु वैज्ञानिक, महान राष्ट्रभक्त, सरस्वती साधक अवुल पकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम साहब के आज अचानके निधन हो गइल. देश दुनिया में मिसाइल मैन का नाम से मशहूर अब्दुल कलाम साहब के याद ना रहल कि जब मिसाइल छोड़ल जाले त ओकरा पहिले पूरा तइयारी होला आपूरा पढ़ीं…

सेवा में प्रधान मंत्री, भारत सरकार द्वारा – भोजपुरिका डाॅटकाॅम महाशय, हम रास बिहारी गिरी (रवि) आ भोजपुरीका वेबसाइट के जरिए रउआ से आपन दुखड़ा सुनावे के चाहत बानी. खराब लागी त ई समझ के माफ़ कर देम की ई एगो पीड़िता के अनदेखी से निकलल ब्यथा ह. हमारा संगेपूरा पढ़ीं…

– ओम प्रकाश सिंह साल 1975 भा 1976 रहुवे जब पहिला बेर हमरा एगो भोजपुरी के खण्डकाव्य रमबोला के जानकारी एगो दोस्त से मिलल. ऊ हमरा के ओह काव्य के एगो अंश भेजले रहुवन जवना के हम आपन एगो पत्रिका भोजपुरिहा के पहिलका अंक में शामिल कइले रहीं. वइसे तपूरा पढ़ीं…

मशहूर भोजपुरी राइटर आ टीवी पत्रकार मनोज भावुक भोजपुरी के सबले लोकप्रिय चैनल ‘महुआ प्लस’ के क्रिएटिव कंसल्टेंट बनावल गइल बाड़ें. लोग कहेला कि टेलीविजन पत्रकारिता में प्रतिभावान लोग नइखे बाकिर कुछ टेलीविजन पत्रकार लगातार एह भरम के तूड़त रहेलें. एहीमें मनोजो भावुक शामिल बाड़न. चैनलन में रहतो ऊ दुनियापूरा पढ़ीं…

– रासबिहारी गिरी नमस्कार ! एगो कहानी हमरा मन में बहुत दिन से घुमत रहुए. कहानी वोह समय के ह जब हम बहुत छोट रहनी, आ हम आपन बाबूजी आउर माई से सुनत रहनी. जब हम फिलिम में काम करे लगनी त ई कहानी हमके परेशान करे लागल. हमरा गावपूरा पढ़ीं…

<h3>- अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु”</h3> कबो ई सवाल हमरा मन में बारी-बारी घुमे बाकि काल पुरान मित्र डॉक्टर ओमप्रकाश जी के सन्देश से फिर से ताजा हो गइल. सवाल जेतना आसान बा जवाब ओतना आसान नइखे काहे से कारन खोजे में सबसे ज्यादा भोजपुरिये के करेजा छलनी होई. कुछ खासपूरा पढ़ीं…