कइसे बनल भोले शंकर?
आज क आलेख..

लखनऊ खातिर रवानगी
मुंबा देवी के नाराजगिए वजह रहल होखी कि हमनी का फिलिम भोलेशंकर के शूटिंग २१ नवम्बर से मुंबई में ना कर पवलीं. ओह दिन फिलिम के निर्माता गुलशन भाटिया अपना बेटा गौरव आ हमरा साथे मिथुन दा से भेंट करे उनुका घरे मड आइलैण्ड गइलन. मिथुनो दा दुखी रहलन कि ऊ चाहियो के शूटिंग नइखन कर पावत. ऊ अपना आ डाक्टर सुनील का बीच भईल करार के सगरी पेपर देखवलन, हालांकि ओकर कवनो जरूरत ना रहे. बाकिर मिथुन दा इहे चाहत रहलन कि हमनी का उनुका के गलत मत समझीं जा. ऊ पूरा मामिला से जूड़ल एक ह एक गो पुर्जा देखवलन. अब चुंकि ओह बातन के फिलिम भोले शंकर के मेंकिंग से कवनो खास लेना देना नइखे, एहसे ओकरा विस्तार में गइला के जरुरत नईखे. भाटिया जी तनी परेशान रहलन काहे कि तब ले हम मिथुन दा का साथे कवनो लिखित करार ना कइले रहीं. हमरा त मिथुन दा के जुबान के अहमियत मालूम रहे बाकरि तबहियो हम भाटिया जी के दिल के बात उनुका से कह दिहनी. भाटिया जी के कहला पर हम पहिलहीं से लिखित करार बनवा के ले आइल रहीं. मिथुन दा के महानता देखीं कि एसोसिएशन का बैन का बावजूद ऊहां के एग्रीमेंट पर तुरते साइन कर दिहनी आ उहो बिना एको लाइन पढ़ले. हम भाटिया जी का तरफ देखनी त उनुका चेहरा पर संतोष आ हैरानी के मिलल जुलल भाव रहुवे. बाद में मिथुन दा का घर से निकलला पर उनुका के बतलवनी कि इंडस्ट्री में जुबान के कीमत अधिका होखेला आ कागज के कम. आ अब ई बाति भाटियो जी माने लागल बानी.

"तू कह तारू तो कहिया तोरे घरे आवत आनी" - मूल के साथ "सूद" वसूले क साज़िश रचत सरपंच (नरेंद्र पजवानी)
मिथुन का घर से बहरी निकलनी स त अगिला काम रहुवे लखनऊ शेड्यूल के सही समय पर शुरु करे के. जी न्यूज में हमार एगो सहयोगी के लखनऊ में एगो दोस्त बाड़े विशाल कोहली. आ कोहली जी के दोस्त पांडे जी के लखनऊ का करीब के एगो गांव लुधमऊ में एगो बड़हन फार्म हाउस बाटे. एकर विशालता के अंदाजा एही से लगा लीं कि गोमती नदी एह फार्म हाउस का बीच से बहेले. पांडेजी इटावा के रहे वाला हउवन आ बड़ा मानवतावादी इंसान हउवन. उनहीं के सेवा एग्रीकल्चरल फार्म आ आसपास का गांवन में भोले शंकर फिलिम के शूटिंग पहिला दिसम्बर से होखे वाला रहल. से मिथुन दा का घर से निकल के भाटिया जी आ गौरव त अपना घरे चल गइल लोग, आ हम जा बईठनी आफिस में. करीब सत्तर लोग के टीम के लखनऊ चहुँपावल, ओह लोग के रहे के इंतजाम कईल आ फेर लखनऊ में सभ काम सुबहित चलत रहो एकर सरंजाम करे के रहे. आगे बढ़े से पहिले एगो बाति आउर बता दीं कि अगर रउरा फिलिम मेंकिग में तनिको रुचि बा त एगो बाति गांठ बान्ह के राख लीं, एहिजा बिना मरले स्वर्ग ना भेंटाव! मतलब कि जवन कुछ करे के बा रउरे करे के बा, बाकी लोग बुझला काम बिगाड़हीं खातिर आइल रही. खास करिके अगर प्रोडक्शन देखे वाला बेइमान निकल जाव त फेर भगवाने बेड़ा पार कर सकेले. हर केहू एहिजा मौका का ताड़ में रहेला. मुंबई में आटो में सफर करे वाला शूटिंग पर एसी गाड़ी मांगी आ घर में चाहे पंखो ना लागल होखे शूटिंग पर रहे खातिर एयरेकंडीशन्ड कमरा मांगी. अब ई बुराई धीरे धीरे भोजपुरिओ सिनेमा में घुसल जा रहल बा.
खैर, शूटिंग से दू दिन पहिले हम लखनऊ चहुंप गइनी. गड़बड़ ई हो गईल कि रहे का जगहा आ शूटिंग का लोकेशन का बीच क दूरी तनी अधिका रहे आ जब हमनी का शुटिंग करत रहीं त कोहरा पड़ल शुरु हो जाव त सबेरे सातो बजे के शिफ्ट नौ बजे ले शूरु करे खातिर सूरज देवता के इंतजार करे के पड़े. पहिलका दिन के शूटिंग में कुछ स्थानीय कलाकारन के जरूरत रहुवे. गाँव के सरपंच खातिर हम कन्हैयालाल जइसन कमीनापन देखा सके लायक कलाकार नरेन्द्र पजवानी से मिलनी आ भोले आ शंकर के बचपन का रोल खातिर तय भईल शिवेन्दु आ उज्जवल के नाम. पारवती के बचपन के रोल करे के काम लखनऊवे के एगो बाल कलाकार बेबी निष्ठा सकार लिहली.

"का हो संकरवा के माई, तू कहा रह तारू?"- भोले (मास्टर शिवेंदु) आ शंकर (मास्टर उज्ज्वल) के महतारी (शबनम कपूर) से छेड़छाड़ करत गांव के सरपंच (नरेंद्र पजवानी)
वइसे त हम तय कइले रहीं कि शूटिंग १ दिसम्बर के शुरू करेम आ ऊ एह चलते कि ३० नवम्बर तकले यूनिट हर हाल में लखनऊ चहुँपिए जाई. बाकिर बलिहारी रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कि आजुकाल्ह ट्रेन राइट टाइम पर चले लागल बाड़ी सन. पूरा यूनिट ३० नवम्बर के फजीरहीं चहुँप गईल त हम आनन फानन में तय कइनी कि शूटिंग एक दिन पहिलहीं शुरु कर देत बानी. फिलिम के शूटिंग के दिन आगे घसके के किस्सा त मुंबई से आईल क्रू खूब सुनले रहुवे, बाकिर शूटिंग तय तारीख से पहिले शुरु होखे के मउका ऊ लोग पहिलके हालि देख रहल रहे. हमहूं तारीफ करेम पूरा यूनिट के, एक एक लाइन मैन आ एक एक स्पाट ब्वाय के, कि ऊ लोग रात दिन कान्ह से कान्ह मिला के फिलिम के शूटिंग में मदद कईल.
भोले शंकर के पहिलका शॉट गांव लुधमऊ में लोक विश्राम के पावन काल में ३० नवम्बर के नरेन्द्र पजवानी, शबनम कपूर, मास्टर शिवेन्दु आ मास्टर उज्जवल पर फिल्मावल गईल. संयोग से फिलिमो के ई पहिलके सीन हऽ. पहिलका सीन के अधिकतर शॉट्स हम पहिलके दिने फिल्मवनी. भोजपुरी फिलिमन में शॉट डिवीजन के ढेर भाव ना दिहल जाव. आ निर्माता निर्देशकन के कोशिश इहे रहेला कि फिलिम जतने कम से कम शॉट में फिल्मा दिहल जाव ओतने बढ़िया. कलाकारो एहमें खुश रहेले काहे कि ओह लोग के मेहनत कम करे के पड़ेला. बाकिर निर्देशक के एह बाति के हरमेसा खयाल राखे के चाहीं कि भाषा हिन्दी होखे, भोजपुरी होखे भा कवनो दोसर, ओकरा अपना कला का साथे कवनो समझौता ना करे के चाहीं. का कवनो गायक खाली एही चलते बेसुरा गाई कि ऊ हिन्दी फिलिम के ना भोजपुरी फिलिमके गीत गावत बा? भोले शंकर के मेकिंग कवनो मामिला में कवनो हिन्दी फिलिम से अनइस ना राखे के फैसला हम शूटिंग का दिन से पहिलहीं से ले रखले रहीं. अब एह पर अमल करे के वक्त आ चहुँपल रहे. बाकी अगिला अंक में, पढ़त रहीं कइसे बनल भोले शंकर ?
कहल सुनल माफ.
पंकज शु्क्ला
निर्देशक भोले शंकर
(पाठक आपन प्रतिक्रिया पंकज शुक्ल के pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकेलें.)
