कइसे बनल भोले शंकर?
आज क आलेख..
बेरोज़गारी से दू दू हाथ...

रऊरा लोग खातिर अबले त फिलिम भोले शंकर के कहानी बहुत कुछ साफ हो गईल होखी. ई कहानी एगो विधवा महतारी आ ओकर दू गो बेटन के हऽ. कहानी बतावत बिया कि कइसे एगो विधवा माँ अपना लड़िकन के अपने बूते पाल पोस के बड़ करऽतिया. कहानी बतावत बिया कि कइसे समाज के उसूल एगो औरत से ओकर शादीशुदा जिनिगी के सुख छीन लेले. आ कहानी इहो बतावत बिया कि अगर इंसान चाह ले आ परिवार ओकर साथ दे दे त गांवो के लड़िका पढ़ लिख के अपना बूते कुछ बनि सकेला. एकरा खातिर जरूरी नईखे कि ऊ सरकारिये नौकरी करो. बेरोजगारी अपन देश के बड़हन समस्या बा आ देश के कवनो कोना में रहत युवावर्ग एकरा से बाँचल नईखे. बाकिर आजु के नवजवान सरकारी नीकरी का फेर में ना पड़ि के अपना कवनो हुनर में हाथ साफ करे त रोजगार के मउका आजुवो कम नइखे. मेहनत के रास्ता कठिन आ परेशान करे वाला होला, से कई हालि शंकर जईसन लोग खराब संगति में पड़ि के गलत रास्ता पर चल देलें. बाकिर भोला जईसन लोग चाह लेव त भटकलो लोग के फेर से सही राह पर लिआ के विकास के मुख्यधारा से जोड़ सकेले.
एने कुछ दिन से भोले शंकर के मेकिंग हर दिन रउरा सभे तक नईखे चहुँप पावत. एकरा खातिर हम रउरा सभे से माफी चाहत बानी. कुछ रो रोजाना के जिनिगीके उठापटक आ कुछ माई के अगो दुर्घटना में चुटहल हो गईला का चलते हमार समय दोसरा जगहा लाग गईल रहल हा. मुंबई से मीलो दूर लखनऊ का लगे एगो छोटहन गांव फतेहपुर चौरासी में हमार माई बाबूजी रहे ला लोग. दुनू जने से कई हालि निहोरा करि चुकल बानी कि चलीं हमरा साथे मुंबई में रही बाकिर अपना माटी से एहन लोग के लगाव का आगा हमार हर जिद हार जाला. एने कई दिन से हम माईये का लगे रहनी हा आ हमार गांव अइसनका जगहा बा जहाँ हर प्रोडक्ट के दावेदारी कसौटी पर कसा जाले. रिलायंस वाले भलहीं अपना नेटवर्क के हवा आ पानी का तरहा हर जगहा मौजूद मिले के दावा करसु बाकिर हमरा गांव आवतहीं ई दावा खोखला साबित हो जाला. आ अँजोरिया तक हमार आलेख इंटरनेटे का जरिये चहुँप सकेले. से नात रिलायंस के नेटवर्क मिलल ना हम अँजोरिया खातिर आलेख भेजि पवनी.
वइसे एहबेरि सुनली कि गांवे का कगरी गंगाजी का किनार से सटले गंगा एक्सप्रेवे निकले वाली बिया. हो सकेला कि गंगा कटरी के दिन एही बहाने बहुरि जाव. ई ऊ गांव हऽ जहवां इक्कीसवींओ सदी में मूलभूत सुविधा कवनो सपना का तरह बनल बा. चुनाव आवेला, वादा होला, बाकिर नेता लोग के गाड़ी का पाछा का गुबार का तरह हर बेरि पाछा रहि जाला आम लोगन के सपना. अइसनके एगो सपना फिलिम भोले शंकर के भोले देखले बाड़े. बाकिर संगीत से दूर रहे के महतारी का जिद्द का आगा ऊ आपन सपना कुरबान कर देत बाड़रे. दोस्त यार सभे जानेला कि भोले बढ़िया गावेला. भोले के गुरओजी चाहेले कि कवनो दफ्तर में क्लर्की भा खेत में किसानी कईला का बजाय भोले अपना एह हुनर के रियाज से माँजे आ अपना गाँव के नाँव पूरा दुनिया में रौशन करे. बाकिर, जब ले माई के मर्जी ना होखी ऊ मीलन दूर मुंबई कइसे जा सकेला?

स्टेज पर गाना गावे का तईयारी में भोले (मनोज )
तमाम असमंजस का बाद माई भोले के मुंबई जाये के इजाजत देइयो देत बिया बाकिर शोहरत का शिखर पर चहुँपल आसान त होला ना. जइसन कि हम पहिलहूं कह चुकल बानी कि भगवान कवनो ईनाम देबे से पहिले हमनी के काबिलियत के इम्तिहान जरूर लेबेले. भोलहूं के अइसने इम्तिहान होत बा. आ लखनऊ में सब गाना के शूटिंग बाद हमनी के करे के रहे ओह सीन के शूटिंग जवना में भोले के सबुर के ई इम्तिहान होखे वाला बा. भोले अॡना गायिकी के गुण देखा के म्यूजिक कंपनी के अफसरान के दिल त जीत लिहले बा बाकिर कंपनी चाहत बिया कि भोले भोजपुरी रैप तईयार करसु. दोसरा लोक भाषा से रैप के संगम हो चुकल बा. ई ऊ विधा हऽ जवना जरिया आजुके पीढ़ी अपना जड़न से जुड़े के कोशिश करेले. पंजाबी के विदेशन में लोकप्रियता के अगो बड़ वजह इहे बा कि ओहिजा के पुरनका पीढ़ी अपना नवही पीढ़ी के अपना लोकगीतन के अपना हिसाब से ढाल लेबे के मोहलत दे दिहले बा. कनाडा आ ब्रिटेन जइसन देशन में पंजाबी पॉप आ रैप के संगीत के भरप पूरल बाजार बा. आ अब समय आ गईल बा कि भोजपुरीओ के विदेश में पलल बसल नयका पीढ़ी से जोड़ल जाव. एही सोच का मद्देनजर हम फिलिम भोले शंकर में एगो भोजपुरी रैप सांगो डलले बानी.
आ, आजु जवना दृश्य के बात हम करे जात बानी ऊ फिलिम में एह भोजपुरी रैप का ठीक पहिले आवऽता. ई ऊ सीन हऽ जब भोले मुंबई में शंकर का घर से तईयार हो के निकलत बा आ ओकरा शो का पहिले रिहर्सल करे के बा. रिहर्सल का ठीक पहिले कईसे शंकर के असलियत भोला का सोझा खुलत बा, एकर चर्चा बाद में कबहीं होखी. आजु एह सीन के बात. त भोले घर से निकलि के हॉल में चहुँप गईल बा. ना माई के मालूम बा की भाईयन का बीच का भईल, ना गुरुजीजानत बाड़ै कि भोले परेशान काहे बा? ई पूरा सीन करीब १८ शाट्स में पूरा भईल. जईसन कि हम पहिलहूं कह चुकल बानी को भोजपुरी सिनेमा में कवनो सीन के कम से कम शाट्स में पूरा करे के परंपरा चलल आवऽता आ शयद एहि चलते भोजपुरी सिनेमा के आजु ले ऊ दर्जा ना हासिल हो सकल जवन बस एके प्रदेश के भाषा होखला का बावजूद तमिल, तेलुगू आ मलयालम सिनेमा के हासिल हो चुकल बा. भोजपुरी सिनेमा के अधिकतर कलाकारन से ले के तकनीशीयन तकले काम के कवनो तरहा निपटा देबे में लागल रहेले. हमार आ मनोज तिवारी का बीच के तकरारो के वजह इहे रहल.

स्टेज पर भोले (मनोज )सीन समुझावत निर्देशक पंकज शुक्ल
एह पूरा सीन में गौरी का आवे से पहिले तक मनोज तिवारी के बस एकाधे लाइन के संवाद बोले के रहुवे, बाकी पूरा अभिनय बस उनुका चेहरा पर सगरी भावन के प्रकटीकरणे रहे. सीन शुरु होखत बा आ हम माइक पर शंकर के ओह संवादन के बोले लागऽतानी जवन भोले का अवचेतन मस्तिष्क में घुमड़त बा. शंकर के बाति इयाद करि करिके भोले परेशान बा. ऊ गीत नइखे गा पावत. गुरूजीआवत बाड़ै आ भोले के हौसला बन्हावत बाड़े, बाकिर भोले गा नइखे पावत. एह सारा सीनन में भोले के अपना चेहरा पर परेशानी के भाव देखावे के रहे आ मनोज तिवारी के मूड ओह दिन ढेरे खुशनुमा रहुवे. बाकिर एक दू हालि सीन के ले के हमरा आ मनोज तिवारी के तकरार भईल त हमहूं तनी तनाव में आ गईनी आ मनोजो तिवारी. पर हम ई बाति जाहिर ना होखे दिहनी काहे कि हमरा त वइसहूं मनोज तिवारी का चेहरा पर तनावे चाहत रहे. अब सिचुएशन ई बनल कि मनोज तिवारी हमरा कवनो बाति पर चिढ़ के तनाव में रहलन आ हम शॉट पर शॉट लिहले जात रहीं काहे कि उनुका चेहरा पर ठीक वईसने भाव आ चुकल रहे, जईसन हमरा अपना सीन खातिर चाहत रहे.

भोले (मनोज ) आ (गौरी)के सीन समुझावत पंकज शुक्ल
तनाव के सीन खतम भईल त एंट्री होखे के रहुवे गौरी यानि कि मोनालिसा के. मोनालिसा के एक्टिंग त वईसहीं परफेक्ट होखेला. उनुका ओह सीन में भोले के हौसला बढ़ावे के रहुवे आ भोले के तबहियों ना गा पवला पर रोवत हॉल से बहरी भाग जाए के रहुवे. महज दूईये तीन रिहर्सल में सगरी शॉट ओके हो गईली स, हालाँकि एहू सीन के हम छह शॉट्स में बँटले रहीं. मोनालिसा एहू शॉटन में कमाल के एक्टिंग कइले बाड़ी. अगिला दिने मनोज तिवारी के पैकअप रहुवे. हम मनोज तिवारी से चार दिसंबर से पनरह दिसंबर तकलहीं के समय लिहले रहुवीं आ ओह दिन १३ दिसंबर रहुवे. अगिला दिन सुबहे सुबह हम मनोज के कुछ सीन ओह गाना खातिर ले लिहनी जवना में रंभा स्टेज शो का दौरान भोले के रिझावे के कोशिश करत बाड़ी. गाना हम पहिलहीं शूट कर चुकल रहीं, बस अगिला दिने सुबहे सुबह हम मनोज तिवारी, गोपाल के सिंह आ अजय आजाद के बईठअ के तीनों के रिएक्शन शूट कईनीं आ हो गईल हमनी के लखनऊ से रवानगी के वक्त. तय शेड्यूल से एक दिन पहिलहीं हमार लखनऊ शेड्यूल पूरा हो गईल. अगिला अंक में हम लवटेम मुंबई आ जानेल जाई कि फिलिम भोले शंकर खातिर मिथुन चक्रवर्ती के पहिलका दिन का शूटिंग से पहिले कतना भाग दौड़ भईल? रउरा पढ़त रहीं कइसे बनल भोले शंकर?
कहल सुनल माफ.
पंकज शु्क्ला
निर्देशक भोले शंकर
(पाठक आपन प्रतिक्रिया पंकज शुक्ल के pankajshuklaa@gmail.com पर भेज सकेलें.)
