– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल. शहर-ओहर में त लइकियो ईहे गेमवा खेलेली सन बाकिर गाँव अबहिंयो एगो परंपरा का साथे आनंद लेत लउकेला. गाँव मेंपूरा पढ़ीं…

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– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल एहमें कवनो संदेह नइखे कि लोकसाहित्य में लोकगीत के जगह सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण बाटे. जनजीवन में एकरा व्यापक प्रचार के स्वीकार करत राधावल्लभ शर्मा जी मानतानी कि ई गीत भावुक आ संवेदनशील जनता के हृदय के स्वाभाविक उद्गार होले सन. ईहे कारन बा कि भिन्न-भिन्नपूरा पढ़ीं…

सगरी नवहियन के अपराधी बनावे में लागल सरकार. कवनो लइकी शिकायत कर देव कि ई आदमी भा लईका हमरा के घूरत रहुवे त ओह आदमी के जमानतो ना हो पाई. सोलह साल का उमिर में शादी ना कर सकऽ, एडल्ट फिलिम ना देख सकऽ बाकिर सहवास के सहमति दे सकेल.पूरा पढ़ीं…

पिछला दिने दिल्ली में चलत बस में एगो लड़िकी से झुण्ड में बलात्कार कइला का बाद ओकरा के मरल जइंसन हालत में बस से फेंकद दिहल गइल. ओह लड़िकी के अस्पताल में इलाज होखत बा आ ओकर हालत अब मरल कि तब मरल वाला चलत बा. एह मामिला पर चारोपूरा पढ़ीं…

सामयिकी आधी आबादी के बदलत चेहरा – ‍आस्था जिनिगी में, हार, असफलता आ पीछे छूटि गइल आम बात हऽ. सपना पूरा ना भइल त एकर मतलब ई ना हऽ कि सपना देखले छोड़ दिहल जाव. उमेद मुए के ना चाहीं. उमीद आ सपना जिया के राखल आ ओके पूरा करेपूरा पढ़ीं…

भउजी हो ! का बबुआ ? आजु त उपासल होखबू ? हँ बबुआ आजु तीज के व्रत त सभे औरत करेली. एही पर एगो सवाल बा भउजी ? तोहरा लोग खातिर त तीज, जिउतिया तरह तरह के व्रत बा बेटा भतार खातिर बढ़िया मनावे के. बाकिर मरदन के एहसे आजादपूरा पढ़ीं…

आजु हमनी सभे जानत आ मानत बानी कि देह के निरोग रखला के कवनो विकल्प नइखे. ऊ त रखही के बा. बाकिर अतने से काम नइखे चले वाला हमनी का देखले बानी जा कि उपर से पूरा तरह से निरोग लउके वाला लोग, जे नियमित व्यायाम करत रहे, सही भोजनपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी सिनेमा के मेगास्टार मनोज तिवारी, जिनका के हालही में भइल एगो सिने अवार्ड समारोह में एह दशक के सितारा कहि के सम्मानित कइल गइल रहे, आजुकाल्हु गलत कारण से चरचा में बाड़न. मनोज तिवारी के शिकायत बा कि कुछ अखबार आ मीडिया में उनुका तलाक से जुड़ल खबर गलतपूरा पढ़ीं…

पिछला हफ्ता गाजीपुर जिला के नंदगंज थाना के पुलिस तीन गो परिवार के मेहरारुवन के थाना उठा ले गइल आ ओहिजा बंधक बना के राखि लिहलसि. फिरौती का रुप में ओकर माँग रहुवे दू गो आरोपियन के थाना में हाजिरी. ओह औरतन में एगो औरत यशवंत के महतारीओ रहली जिनकरपूरा पढ़ीं…

– डा. उत्तमा दीक्षित, एसिस्टेंट प्रोफेसर (फैकेल्टी आफ विजुअल आर्ट्स, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) चुनार सीमेंट फैक्टरी का परिसर में बहुते आम घर रहे हमार. चिकित्सक पिता आ शिक्षिका मां के अकेली कन्या संतान हईं हम. दू गो भाई बाड़े, दुनु छोट. जब हमार जनम भइल त घर में कवनो खासपूरा पढ़ीं…