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Category: चौपाल

जिए भोजपुरी ! बाकिर जिए त जिए कइसे?

भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा...

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कब ले हम राउर गाल बजाएब?

भोजपुरिका अबले ओही राह पर चलत आइल जवन अँजोरिया देखवले रहुवे. भोजपुरी के बढ़ावा देबे का मकसद से एहिजा हर प्रचार सामग्री के प्रकाशित कर देबे के परंपरा रहुवे. कई बेर एह जानकारी का बावजूद कि फिलिम पिटा गइल बिया ओकर प्रचार सामग्री...

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फगुआ के सांस्कृतिक रंग में सेंधमारी

-डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल फगुआ कहीं भा होली, ई बसंतोत्सव हउवे. बसंत जब चढ़ जाला त उतरेला कहाँ ? एहीसे त होली के रंगोत्सव के रूप में मनावल जाला. प्रकृतियो हमनी के साथ देले. नु ठंढा नु गर्मी, का मनभावन मौसम होला ! रंगन के महफिल में...

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लेकिन पिंकिया कहाँ बिया?

– ओमप्रकाश सिंह याद पड़त बा. ओह दिन खबर पढ़ले रहीं कि बालेसर ना रहलें. बालेसर का बारे में जानकारी बटोरे खातिर नेट हँउड़े लगनी त दयानंद पाण्डेयजी के लिखल एगो लेख पर नजर पड़ल. पढ़े लगनी त मन लाग गइल. खोजला पर पांडे जी के फोन...

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अबलौं नसानी अब ना नसइहों

आजु एगो खबर पढ़े के मिलल कि बिहार भोजपुरी अकादमी मालिनी अवस्थी के आपन ब्रांड अम्बेसडर बनवले बिया आ अब मालिनी जी देश विदेश में भोजपुरी के प्रचार प्रसार करीहें. बुध का दिने अखबार वालन के ई जानकारी देत अकादमी के अध्यक्ष प्रो॰...

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कइसन रही अगर अँजोरिया भोजपुरी किताब प्रकाशन का मैदान में उतरे?

किताब के लिखो जब केहू छापही वाला नइखे. किताब के छापो जब केहू खरीदही वाला नइखे. किताब कइसे खरीदे केहू जब किताब लिखइबे ना करी, छपबे ना करी. किताब कइसे खरीदाव जब घर खरची चलावले मुश्किल होखल जात बा. समस्या विकट बा. कहाँ से शुरू कइल...

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बुरा जो देखन मैं चला मुझ से बुरा न कोय!

भोजपुरी पंचायत के जुलाई २०१३ के अंक सामने बा आ ओकरा के पढ़त घरी प्रभाकर पाण्डेय के लिखल व्यंग्य रचना के एगो लाइन पर आँख अटक के रहि गइल कि “बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा ना कोय”. फेर याद आ गइल कहीं पढ़ल एगो चरचा. ओह...

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अबकी देश चूकल त फेर ढेर दिन ले सम्हरे के मौका ना मिली

साल चौदह के इंतजार देश वइसहीं करत बा जइसे कबो चौदह साल का बनवास का बाद लवटत राम ला कइले होखी. एह बीच हर राजनीतिक गोल, हर गोलबंदी में एह बात ला खींच तान जारी बा कि के बनी अगिला प्रधानमंत्री. यूपीए गोलबंदी में तिसरका नंबर के नेता...

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नवहियन के अपराधी बनावे में लागल सरकार

सगरी नवहियन के अपराधी बनावे में लागल सरकार. कवनो लइकी शिकायत कर देव कि ई आदमी भा लईका हमरा के घूरत रहुवे त ओह आदमी के जमानतो ना हो पाई. सोलह साल का उमिर में शादी ना कर सकऽ, एडल्ट फिलिम ना देख सकऽ बाकिर सहवास के सहमति दे सकेल....

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जिए भोजपुरी ! बाकिर कइसे?

पिछला दस साल से भोजपुरी के वेबसाइट चलावत अपना अनुभव से इहे सिखले बानी कि भोजपुरी में वेबसाइट चलावल बहुते मुश्किल काम होला. सबसे पहिले भोजपुरी में वेबसाइट शुरू भइल रहे अँजोरिया. एकरा बाद बहुते वेबसाइट अइलीं स. कुछेक त बहुते मजगर...

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बजलऽ ए शंख बाकि बाबा जी के पदा के

काल्हु भोरे जब ले नींद टूटल तबले खबर चारो ओर पसर चुकल रहे कि संसद पर हमला के आरोपी अफजल गुरू के फाँसी चढ़ा दिहल गइल. कुछ दिन पहिले अजमल कसाबो के एही तरह फाँसी दे दिहल गइल रहे. माने के पड़ी कि सरकार तय कर लेव त कुछूओ कर सकेले आ...

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