डॉ. जयकान्त सिंह ‘जय’ हमरा समझ से संस्कृत के देवभाषा एह से कहल गइल कि एकरा में रचल प्राय: हर कविता चाहे श्लोक समस्त सृष्टि खातिर जीवन मंत्र के काम करेला. नमूना के रूप में एगो श्लोक देखीं – ” अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलं वनौषधम्. अयोग्यो पुरुषो नास्ति, योजकस्त्र दुर्लभ:.पूरा पढ़ीं…

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भोजपुरी साहित्य के गौरव आ एगो मजबूत पाया जगन्नाथ जी काल्हु शनिचर 14 मार्च 2020 के साँझि खा साढ़े चार बजे पटना के अपना साधनापुरी निवास पर आपन आँखि मूदि लिहलीं. भोजपुरी गजल में जगन्नाथ जी के बड़हन योगदान का चलते उनुका के भोजपुरी के गालिब नाँव से जानल जाएपूरा पढ़ीं…

डॉ अशोक द्विवेदी ‘कबीर कूता राम का/मुतिया मेरा नाउँ। गले राम की जेंवड़ी/जित खैंचे, तित जाउँ।।’ कबीर उत्तर भारत के अइसन फक्कड़ मौला सन्त रहलन, जे अपना सहज लोकचर्या आ ठेठ बोली-भाषा के कारन सबसे अलग पहिचान बनवलन। उनका कविता में ‘अनुभूत सत्य’ का प्रेम पगल भक्ति के अलावा अगरपूरा पढ़ीं…

जन्म: 01 जुलाई 1936, बलिया जिला के बलिहार गाँव में। श्रीमती बबुना देवी आ श्री घनश्याम मिश्र क एकलौता पुत्र । शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा गाँव में, माध्यमिक गोरखपुर में आ उच्च शिक्षा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी में । ‘‘नवजागरण के सन्दर्भ में हिन्दी पत्रकारिता का अनुशीलन’’ विषय पर शोध आपूरा पढ़ीं…

– प्रमोद कुमार तिवारी भोजपुरिया माटी में कुछ त अइसन बा, जवना से एह इलाका के साहित्यकारन में ललित भाव के रस छलके लागेला, कुछ तऽ अइसन बा कि जे भी आपन बचपन भोजपुरिया इलाका में बितवले बा, ऊ पूरा जिनगी भोजपुरी लोक के रस में भींजत रहेला। एह माटीपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी साहित्य के साधक साहित्यकार पाण्डेय कपिल जी के निधन प काल्ह वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भोजपुरी विभाग में स्मृति – सभा के आयोजन कइल गइल जवना के अध्यक्षता पूर्व भोजपुरी विभागाध्यक्ष आ भोजपुरी – हिंदी के वरिष्ठ विद्वान डॉ.गदाधर सिंह जी कइनी । पाण्डेय कपिल स्मृति –पूरा पढ़ीं…

-डा.अशोक द्विवेदी लोकमन आ लोकरंग के चतुर चितेरा भिखारी ठाकुर आजुओ भोजपुरी के सबसे चर्चित व्यक्ति बाड़न. केहू उनके समय-संदर्भ के सर्वाधिक चर्चित नाटककार का रूप में, भोजपुरी के ‘शेक्सपियर’ मानल त केहू भोजपुरी भाषा-साहित्य के प्रचार-प्रसार खातिर ‘भारतेन्दु’ का नाँव से नवाजल. पुरबी राग के जनक महेन्दर मिसिर कापूरा पढ़ीं…

– देवेन्द्र आर्य जाए के उमिरो ना रहल आ अइसन कवनो जल्दबाजिओ ना रहुवे. निकहा नीमन चलत गोष्ठी के परवान चढ़ा, ईद के मुबारकबाद देत आखिरी सलाम क लिहलन. ना दोस्तन के कुछ करे के मौका दिहलन ना घरवालन के. दिल के दर्द के गैस समुझत रह गइलन आ चलपूरा पढ़ीं…

भोजपुरी संगीत के एगो बहुत बड़ पुरोधा चलि गइल, बिसवास नइखे होत बाकिर ई साँच बा. रामायन शैली के अपना समय के सबसे बड़ आ स्थापित गायक ब्यास गायत्री ठाकुर अब नइखन. ठाकुरजी खाली गायके ना रहीं बलुक आसु गीतकारो रहीं. रामायन,महाभारत आ पुरानन के कहानी त रउँवा जहें सेपूरा पढ़ीं…

– विपिन बहार सांच कहीं त भिखारी ठाकुर जइसन महान हस्ती प टीका टिप्पणी करे के अधिकार हमरा जइसन तुच्छ आदमी के नइखे. हम त बस उनका कृतित्व आ व्यक्तित्व के मनन चिंतन क के पसंगो भर अपना जिनिगी में ढाल लिहीं त धन समझब. अब पता ना इ सौभाग्यपूरा पढ़ीं…

– मुन्ना कुमार पाण्डेय (शोधार्थी) “अबहीं नाम भईल बा थोरा । जब यह छूट जाई तन मोरा ।। तेकरा बाद पच्चास बरीसा । तेकरा बाद बीस दस तीसा ।। तेकरा बाद नाम हो जईहन । पंडित कवि सज्जन जस गईहन ।। (१) आज हम उनकर जन्मदिन पर इहाँ दिल्ली मेंपूरा पढ़ीं…