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Category: रंगमंच

दिल्ली में मंचित भइल भोजपुरी नाटक “ठाकुर के कुइयाँ”

इन्टरनेट आ तकनीक के जमाना में रंगमंच आ रंगकर्म ओहू में भोजपुरी के रंगमंच के जिन्दा राखल भी पहाड़ चीर के रास्ता बनवला से तनिको कम नइखे. दिल्ली में नाटक त बहुते होला बाकिर भोजपुरी नाटक के बात कइल जाव त एके गो सक्रिय संस्था बिया-...

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भोजपुरी के सम्मान में दुसरका नाट्योत्सव

– ओमप्रकाश अमृतांशु रंगमंच पर किसिम-किसिम के रंग के भाव मंचित होखेला. ऊहे भाव दर्शक लोगन के मन आ दिल पे राज करेला. कुछ देर खातिर सभागार में बइठल लोग भुला जाला कि हम जवन देखत बानी तवन हकीकत ना, एगो काल्पनिक दृश्य हऊए. मंच...

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भोजपुरी में मंचन भइल ‘कबिरा खड़ा बाजार में’

ओमप्रकाश अमृतांशु मंच पे काशी के बाजार . एक ओर मस्जिद, बीच में मंदिर, किनारे में छोटहन फूस के झोपड़ी. झोपड़ी पे पसरल अंजोर, जहंवा कबीर आ उनकर मतारी नीमा के संवाद चलत बा. नीमा – आज बाजार में का भइल रहे ? कबीर – मुसुका...

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दिल्ली में भोजपुरी नाट्य महोत्सव के रंग

– ओमप्रकाश अमृतांशु संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से २६ अक्टूबर से ३० अक्टूबर ले चले वाला भोजपुरी नाट्य महोत्सव के श्रीगणेश भइल. भोजपुरी इतिहास में एगो अउरी अध्याय जुड़ गइल. महोत्सव के पहिलका दिन महेन्द्र प्रसाद...

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भोजपुरी नाटक "गिरमिटिया भारतवंशी" के मंचन

– ओमप्रकाश अमृतांशु “गिरमिटिया” शब्द अंगरेजी के एग्रीमेन्ट शब्द के बिगड़ल रूप हउए. १७ वीं सदी में अंगरेज भारत अइले आ गरीब आदमी एक-एक रोटी के मोहताज हो गइले. १८३४ से गुलामी के शर्त पर करीब ६० हजार भारतीय मजदूरन...

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सूचना

देवी गाथा “कहनिया दुर्गा माई के” दुर्गा सप्तशती की प्रामाणिक कथा की एक मौलिक एवं सुमधुर प्रस्तुति है। इसे भोजपुरी भाषा की सहज और सरल शैली में लिखा और गाया है डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल ने।
‘अँजोरिया’ भोजपुरी समाज, साहित्य आ संस्कृति के पत्रिका हटे. बीच में कुछ कारण से एकरा के भोजपुरिका पर डाल दीहल रहुवे बाकिर पाठकन के कमी देखत ओकरा के बन्द क देबे के फैसला मजबूरी में लेबे के पड़ल. अब फेरू सगरी सामग्री वापस अँजोरिया प आ गइल बा. समाचार, साहित्य से मनोरंजन तक के रउरा चाव के विविध सामग्री परोसे के शुरुवे से हमार मन रहल बा आ आपन हर कोशिश कइले बानी कि भोजपुरिया समाज के ज्यादा से ज्यादा संतुष्ट कर सकीं आउर भोजपुरिया स्वाभिमान के संपुष्ट कर सकीं. 1. आत्मीय सनेही लोगन से निहोरा बा कि अँजोरिया पर रोज कम से कम एक बेर जरूर आईं सभे, जवने नीक लागे, पढ़ीं सभे आ आपन बहुमूल्य टिप्पणी दिहीं सभे. 2. आदरणीय लेखक लोगन से निहोरा बा कि रउँआ सभ आपन हर विधा आ विषय के सामग्री प्रकाशित करे खातिर नीचे लिखल दूनो मेल आइडी पर आपन रचना हिंदी के यूनिकोड भा कवनो फंट में टाइप कइके भेजीं. anjoria@outlook.com ksbhojpurika@gmail.com