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गरीबी

June 9, 2010 OmPrakash Singh 1

– संतोष कुमार पटेल जे सोना के चम्मच लेहले जनमल ऊ का जानि गरीबी का हऽ? काथी हऽ लाचारी, बेकारी का हऽ, काथी हऽ बेमारी? […]

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आजु पहिली तारीख हऽ

June 8, 2010 OmPrakash Singh 6

– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” रातिभर दुनु परानी सुति ना पउवींजा. करवट बदलत अउर एन्ने-ओन्ने के बाति करत कब बिहान हो गउए, पते ना चलुवे. सबेरे […]

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एगो प्रेम प्रलाप

May 28, 2010 OmPrakash Singh 0

– डॉ. कमल किशोर सिंह तनि सुनी एगो बात, नाहीं झूठ, कहीं सांच. रउआ बिना आपन जिनिगी पहाड़ लागेला. काटे धावे घर, नीक लागे ना […]

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भूत बा कहाँ

May 20, 2010 OmPrakash Singh 1

– डा॰ सुभाष राय जाड़ा जब हाड़ ठिठुरावे लागेला त सगरो गाँवन में कउड़ा के बहार आ जाले. दुवारे से थोरिक लम्मे घर भर क […]

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गर्मी कइलस बेहाल

May 19, 2010 OmPrakash Singh 0

– नूरैन अंसारी बहत बिया सर-सर पुरवा बयरिया. धधकत बा आग, चले लू के लहरिया. घर से कहीं निकलल मोहाल भइल बा. भाई हो गर्मी […]

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तलास

May 12, 2010 OmPrakash Singh 1

– डा॰ सुभाष राय मौसम जब साफ बा त केहू बाढ़ के खिलाफ पोस्टर लगा सकेला बिजुरी के गरिया सकेला तूफान के खिलाफ दीवाल प […]

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वापसी

April 25, 2010 OmPrakash Singh 1

– डा॰ सुभाष राय हम जरूर लउटब घाटी से निकलब स्याह चट्टान प रोशनी बिछावत रेगिस्तान की सीना से झरना जइसन फूटत बालू में जिनगी […]

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बुढ़ापा के जिनगी

April 24, 2010 OmPrakash Singh 0

– नूरैन अंसारी लोर बहत बा अंखिया से बरसात के तरह. हम जियत बानी जिनगी मुसमात के तरह. भरल बा घर कहे के अपने ही […]

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चइत

April 10, 2010 OmPrakash Singh 0

– डॉ. कमल किशोर सिंह बहे बड़ी बिमल बयरिया हो रामा , चल बइठे के बहरिया . पोर,पोर टूटेला गतरिया हो रामा , मन लागे […]

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अंग्रेजी के हुकुमत पर

April 7, 2010 OmPrakash Singh 0

अभयकृष्ण त्रिपाठी अंग्रेजी के हुकुमत पर कलम चलावत बानी रेड, माई हो गइली ममी बाबूजी के करत बानी डेड।। अतना कइला पर भी अबही ले […]

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जिनगी बेकार लागेला

April 7, 2010 OmPrakash Singh 0

– मनिर आलम हमर जिनगी हमरे अजब लागेला. आंख में लोर के सैलाब लागेला. दुनिया में तोहरा जैसन कोई नइखे. फूल जैसन चेहरा गुलाब लागेला. […]

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दामाद जी

April 7, 2010 OmPrakash Singh 2

– नूरैन अंसारी नंबर कौनो भी मेहमान के आवेला उनका बाद जी. अतिथि में सबसे श्रेष्ट मानल जालेन दामाद जी. पाहून जब कबो जालेन अपना […]

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उन्हुकर उदासी

April 6, 2010 OmPrakash Singh 0

– भगवती प्रसाद द्विवेदी हमार नाँव सुनिके बड़ा ललक से आइल रहले ऊ मिले बाकिर भेंटात कहीं कि हो गइले उदास. शहर के हमरा खँड़हरनुमा […]

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चिट्ठी

March 31, 2010 OmPrakash Singh 0

– डा॰अशोक द्विवेदी हम तोहके कइसे लिखीं? कइसे लिखीं कि बहुते खुश बानी इहाँ हम होके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेला इहवों […]

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पापी हो गइल मनवा

March 24, 2010 OmPrakash Singh 0

– अभय कृष्ण त्रिपाठी पापी हो गइल मनवा कइसे करीं राम भजनवा, प्रभुजी मोरे कइसे करीं राम भजनवा.. आइल बानी द्वार तिहारे, मन ही मन […]