पौरा

September 8, 2020 Editor 0

रामनरेश शर्मा ‘शिक्षक’ बेटी लक्ष्मी के शादी खातिर रमई छानि दिहले. कहीं वर-घर ना मिलल, कहीं वर मिले त घर ना रहे, त कहीं घर […]

सदमा

May 1, 2020 Editor 0

कृष्णानन्द कृष्ण रिटायर्ड़ भइला का बादो दीनदयाल जी के दिनचर्या में कवनो बदलाव ना आइल रहे. उहे पूजा-पाठ, सध्या-वन्दन आ खाली समय में कवनो ना […]

माँछी

July 3, 2019 Editor 0

दिनेश पाण्डेय उहाँ का सँगहीं रहनीं। बइठार रहे त चलीं सउदा-सुलुफ का सँगे कुछ मटरगस्तियो हो जाई, एक पंथ दुइ काज। तय भइल जे किराना […]

करमगति

August 4, 2017 Editor 0

(लोककथा) शिव जी का सङे पार्वती जी आकासी राहे कहीं चलल जात रही कि उनकर नजर नीचे एगो गरीब परिवार पर पड़ल। ऊ शिव जी […]

थाती

May 14, 2017 Editor 0

– नीरज सिंह पुरनका शिवाला के पुजारी पं. गोबिन मिसिर के पराती के राग पहिले उठे कि मियाँ टोली के मुरुगवन के बांग पहिले सुनाय- […]

आखिर के ठगाता

December 20, 2016 Editor 5

– डा० अमरेन्द्र मिश्र शेखर के गांजा के इ पहिलका दम रहे। अवरू सब साथी गांजा के दम पचावे आ जोम से मुँह आ नाक […]

No Image

एक चिटुकी सेनुर

November 28, 2016 Editor 2

(भोजपुरी कहानी) – सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’ राति अबहिन दुइयो घरी नाहीं बीतल होई बाकिर बरखा आ अन्हरिया क मारे अधराति के लखां सन्नाटा पसरि गइल […]

No Image

माँगि आ कोखि

April 17, 2016 Editor 0

– रामदेव शुक्ल ‘अकाट गरीबी में जाँगर फटकत जनम बिता देबू कि तनिएसा मन बदलि के अमीर हो जइबू? सोचि समुझि ल, अपने मालिक से […]

No Image

देशनिकाला

September 22, 2015 Editor 0

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ रबीस जापान में कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के पद पर काम करत रहस. उनका उहँवा एगो जापानी लइकी से नेह-सनेह बढ़ल आ […]

No Image

कबहुँ न नाथ नींद भरि सोयो

July 4, 2015 Editor 1

– कमलाकर त्रिपाठी बाँके बिहारी घर से दुई-तीन कोस चलल होइहँ कि ओनकर माई चिल्लइलिन, ”रोका हो गड़िवान, दुलहिन क साँस उल्टा होय गइल.“ बाँके […]

No Image

लाल निशान

June 9, 2015 Editor 0

– बिन्दु सिन्हा किर्र…. दरभंगा सकरी रोड पर सन्नाटा भइला से बस आउर ट्रक के चाल अइसहीं तेज हो जाला. झटका से ब्रेक लेला से […]