Category: कतरब्योंत

चार गो भतार ले के लड़े 'सतभतरी'

– अशोक मिश्र काल्हु भिनुसहरे मुसद्दीलाल गली में खुलल पंसारी के दुकान का सोझा भेंटा गइलन. जाड़ो में ऊ पसीना-पसीना होखत रहले, उनुकर हालत देखि के हमरा ताज्जुब भइल. हम…

करोड़पति बनावेले मनरेगा

– अशोक मिश्र भोरे हम अखबार पढ़े में डूबल रहली तबहिये सुपुत्र चिंटू सवाल दगलसि, ‘पापा! अच्छा ई बताईं कि लोग करोड़पति कइसे बन जाला ? चुनाव जीते से पहिले…

कहो फलाने अब का होई

– अशोक मिश्र सबेरे मार्निंग वॉक करे निकलनी त सोचली कि उस्ताद मुजरिम से मिल लिहल जाव. से वॉक से लवटति घरी उनुका ‘गरीबखाना’ पर पहुंच गइनी. हमरा के देखते…

स्वर्ग में बहाली

– अशोक मिश्र हमरा जगहा रउरा होखतीं, त चिहुँक गइल रहतीं. काहे कि हमरा सोझा एगो बहुते सुघड़ ‘सुंदरी’ खड़ा मुस्कुरात रहल. पहिले त हम समुझनी कि कवनो भूतनी हमरा…

अबही नींदे भर टूटल बा, जागल बाकी बा

– अशोक मिश्र आजु पूरा देश में चारों तरफ बस अन्ने अन्ना छवले बाड़े. जेकरे देखऽ उहे अन्ना हजारे अउर उनुका जनसरोकारन के लेके कइल आंदोलन पर ना खाली चरचा…

नकली ट्रॉफी…अब रउरा एकर मजा किरकिरा मत करीं

– अशोक मिश्र पता ना केकर शेर ह कि ‘बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का, चीरा तो कतरा-ए-खूं भी ना निकला.’ पिछला कई महीनन से वर्ल्ड कप भारत…