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चार गो भतार ले के लड़े 'सतभतरी'

January 17, 2012 OmPrakash Singh 2

– अशोक मिश्र काल्हु भिनुसहरे मुसद्दीलाल गली में खुलल पंसारी के दुकान का सोझा भेंटा गइलन. जाड़ो में ऊ पसीना-पसीना होखत रहले, उनुकर हालत देखि […]

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करोड़पति बनावेले मनरेगा

January 11, 2012 OmPrakash Singh 2

– अशोक मिश्र भोरे हम अखबार पढ़े में डूबल रहली तबहिये सुपुत्र चिंटू सवाल दगलसि, ‘पापा! अच्छा ई बताईं कि लोग करोड़पति कइसे बन जाला […]

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कहो फलाने अब का होई

October 18, 2011 OmPrakash Singh 1

– अशोक मिश्र सबेरे मार्निंग वॉक करे निकलनी त सोचली कि उस्ताद मुजरिम से मिल लिहल जाव. से वॉक से लवटति घरी उनुका ‘गरीबखाना’ पर […]

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स्वर्ग में बहाली

September 20, 2011 OmPrakash Singh 0

– अशोक मिश्र हमरा जगहा रउरा होखतीं, त चिहुँक गइल रहतीं. काहे कि हमरा सोझा एगो बहुते सुघड़ ‘सुंदरी’ खड़ा मुस्कुरात रहल. पहिले त हम […]

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ई का हो रहल बा ?

April 4, 2011 OmPrakash Singh 0

– अशोक मिश्र एक बेर एह सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एगो फिल्म में गीत गवले रहले, ये क्या हो रहा है, भाई ये क्या […]