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Category: लस्टम पस्टम

बदलाव के बयार

– जयंती पांडेय पसेना से नहाइल रामचेला हाँफत हाँफत बाबा लस्टमानंद के लगे चहुँपले. सस्टांग दंडवर कइके आशीर्वाद लिहला के बाद रामचेला कहलन, गुरू आजकाल्हु गउवों में बदलाव के बयार बड़ा तेजी से बहऽता.. लस्टमानंद पुछलन, काहे? का...

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फेस बुक के दुखिया

– जयंती पांडेय ओह दिन साइत बिगड़ल रहे कि आंगछ खराब रहे. गाँव के लरिका मधुमाछी के छत्ता में ढेला मार के परइले सन. ओने रामचेला जेठ के दुपहरिया में पछुआ के झोंका के कम करे खातिर आँख मुलमुलावत पेड़ का नीचे आगे के ठाड़ भइल...

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जब घूर के दिन फिरेला

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछले, ‘बाबा हो, ई घूरो के दिन कइसे फिरेला?’ बाबा कहले, ‘जे तहरा एकर उत्पत्ति आ टीपण जाने के होखो त भोजपुरिका में बतकुच्चन करे वाला डाक्टर साहेब से सवाच ल. हम त...

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नवका रहन अउर चाल ढाल

– जयंती पांडेय गरमी के पसीना से तर-बर भइल रामचेला हाफत-डाफत गुरू लस्टमानंद का लगे पहुँचले. सस्टांग दंडवत कइके आशीर्वाद लेहला के बाद रामचेला कहलन, गुरू आजकाल गउवों में बदलाव के बयार बड़ा तेजी से बहऽता. लस्टमानंद पूछलन,...

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पत्नी आ धर्म पत्नी

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद अक्सर अपना मेहरारू के केहु से परिचय करइहें त कहिहें कि ई हमार पत्नी हईं. रामचेला एकदिन पूछ बइठले – हो बाबा! तू , भउजी के धरमपत्नी काहे ना कहेलऽ? सब लोग त अपना मेहरारू के धर्मपत्नी कहेला....

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माफी मांगे के लफंगई

– जयंती पांडेय सीताराम बनिया मुंहअन्हारे बाबा लस्टमानंद के दुअरा आ पहुंचले. बाबा ओह समय बैलन के सानी-पानी करे के तइयारी में रहले. हाथ में छईंटी रहे. सीताराम बनिया के देख के छईंटी धऽ के खड़ा हो गइले. सीताराम नीयरा आ के...

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विश्वस्तरीय ट्रेन सफर के माजा खतम हो जाई

– जयंती पांडेय रेलगाड़ी आ रेलवे टीसनन के वर्ल्ड क्लास बनावे के चरचा जोर पर बा. मोदी जी दनादन विदेश जा रहल बाड़े आ उहां से फटाफट विचार ले के चल आव तारे. जब बाबा लस्टमानंद ई बात सुनले कि रेलवे टीसनन के हवाई अड्डा अइसन बनावल...

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कालाधन बैंक में लुकाइल बा त कवन आश्चर्य

– जयंती पांडेय किताबन में, मय अखबारन में पढ़ले बानी कि संसद के एक दिन के कार्रवाई में कई लाख रुपया खर्चा होला. लेकिन बाबा तूं बतावऽ कि कालाधन आउर कई गो मामूली बात खातिर सांसद लोग संसद के कार्यवाही ना चले देला, आ कामकाज ठप...

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बेइज्जत करे खातिर इज्जत भइल

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद देश के राजनीति ले के बड़ा हरान बाड़े. जब देखऽ तब कवनो ना कवनो बात ले के चर्चा करत रहेले. बाबा रामचेला के बोला के कहले कि, जान जा रामचेला आजुकाल बड़ा कठिन स्थिति बा. अब दू दिन पहिले के बात ह कि...

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मोदी आ मंहगी के एके राशि बा

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद सबेरहीं से उदास बइठल रहले. रामचेला खेत कियोर से घूम घाम के अइले आ जब बाबा के दंडवत कऽ के उनकर मुंह देखले तऽ चिहुक उठले. अरे हरदम हंसे वाला बाबा उदास बइठल बाड़े. रामचेला कहले, ‘का हो बाबा...

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डेंगू से मिलल बकरी के इज्जत

– जयंती पांडेय दू दिन पहिले पत्रकार अजीत दूबे जी भेंटइले. बड़ा सज्जन आदमी. कहले, जानऽ जा बाबा लस्टमानंद कि पपीता के पतई के रस पियला से डेंगू जइसन बेमारी भाग जाला. बाबा अचरज में पड़ले. तले संगे खड़ा रामचेला कहले, अजीत बाबा...

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चांसो बाईचांस ना मिले

– जयंती पांडेय अचके रामचेला आ के कहले बाबा लस्टमानंद से कि हो बाबा जानऽ तारऽ ई मोदी सरकार जे बा नऽ से झूठहुं हाला मचवले बा कि महंगी कम हो गइल, लेकिन सांचो महंगी कम कहां भइल बा. जवन एक दूगो चीज के दाम घटल बा ऊ तऽ चांस हऽ...

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