– जयंती पांडेय अबहीं दिन चढ़ल शुरूए भईल रहे आ घामो अब तपल शुरु हो गइल रहे कि रामचेला बाबा लस्टमानंद के मड़ई में अइलें. उनका कांखि में एगो अखबार दबाइल रहे. ऊ अखबार निकाल के बाबा के दिहले. बाबा पढ़ल शुरू कइलें. ओह में लिखल रहे कि सूतला मेंपूरा पढ़ीं…

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– जयंती पांडेय केहु के केहु पर पइसा बकाया रहेला त ऊ आंखि लुकवावे ला. केहु कवनो बात से लजाला त केहु कवनो बात से. एह में एगो होला राष्ट्रीय शर्म. इहो राष्ट्रीय शर्म तरह-तरह के होला. कबहीं मोदी जी के गुजरात में दंगा से हो जाला त कबहीं बाबरीपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला दुपहरिया में बाबा लस्टमानंद के दुअरा मुंह लटकवले अइले आ कहले, अमरीका के एगो कम्पनी बा ऊ तऽ हमनी के देश के कंगाल बता के कहि देता कि ओकर कवनो साख नइखे. ई खबर से भारत के रेटिंग घट गइल. बाबा लस्टमानंद कहले, हँ हो ईपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय हमनी के जीवन में कई गो बात नत्थी बा जेहपर हमनी के आपन कवनो हक नईखे. जइसे आपन पड़ोसी, आपन माई बाप आ आपन नांव. ई बस हो जाला एकर चुनाव ना कइल जा सके. लेकिन आज के दुनिया में पहिलका दू गो बात त आपके अधिकारपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय अपना देश में मेहरारू जात हमेशा खतरा में रहेले. पहिले बंगाल में कवनो खतरा ना रहे पर अब त इहों खतरा बढ़ि गइल बा. अपना देस के मेहररूअन के समय-समय पर अनेकानेक दुश्मन से सामना होत रहेला आउर ओहमें सबसे पहिला नाम ओकनी के ‘सास’ के होला,पूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय रामचेला बाबा लस्टमानंद से सवचले, हो बाबा आज कल पुलिस सुधार पर बड़ा चर्चा बा. कभी सुनले रहनी कि सिपाही के मुरइठा देखि के बड़े बड़े लोगन के पैंट खराब हो जात रहे. आजुओ काल पुलिस के बारे में लोग के अच्छा विचार नइखे. बाबा तहार कापूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय राहुल गांधी अपना चुनाव प्रचार में कई हाली कहले कि गांव के विकास के खातिर जवन रुपिया आवे ला तवना में से दसे पइसा मिले ला बाकी गायब हो जाला. काफी सोचला पर ई पता ना चलल कि के खा जाला. मन में 90 पइसा हजम करेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय जब से अखबारन में मार छपे लागल कि सरकार खेती के बढ़ावा देवे के खातिर कई-कई गो सुविधा दी तबसे गांव छोड़ के सात बरिस पहिले आइल टेकमन पंडित के नाती लुटमन तिवारी ‘दीपक’ उर्फ ‘दीपक एल एम’ गांव आके खेती करे खातिर आवे के मन बनावेपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय ‘एगो कहावत बा कि पाकिट में दाम नइखे तऽ राउर कवनो मान नइखे। गांव में कहल जाला कि मरद के मरद रुपिया हऽ ना तऽ सब मरद के मर्दानगी बेकार. काल कई जगहि चुनाव के रिजल्ट आइल. बड़े बड़े ज्ञानी लोग कहल कि भ्रष्टाचार के चलते कांग्रेसपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय का हो राम चेला ई बरिस तऽ अंग्रेजी में लीप ईयर हऽ. लीप ईयर के अंग्रेजी में चाहे जवन माने होखे हमरा भोजपुरी में तऽ लीपले कहाई. मानें कि तीन साल जवन कलेंडर के गीने में गलती भईल ओकर चउथा बरिस के 60 वां दिने एक दिनपूरा पढ़ीं…

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद कलकाता अइले. उनका गांव के लोग इहां रहऽत रहे. ओहमें सबसे जियादा नांव रहे एकसिया बाबा के बेटा ठटपाल तिवारी के. अब बाबा उनका बाप से उनकर नांव पता ले लेहले आ पहुंच गइले खोजे. कलकाता के साल्ट लेक महल्ला आ सब केहु चेहरा परपूरा पढ़ीं…