Category: बतकुच्चन

संघी चाल में अझूरा गइल तबलीगी जमात

एकरा पहिले कि रउरा आगे पढीं साफ क दीहल जरुरी बा कि ई उलटबाँसि ह, एकरा के सीरियसली लिहला के जरुरत नइखे. देश के सिकूलर, लिबरल, पत्तलकार, विपक्ष सभे एह…

हारब त हारब बाकिर तोहरा के जीते ना देब : बतंगड़ – 104

हिन्दुवन के कमजोरी ह कि ऊ जीव हत्या पसन्द ना करसु. इहां ले कि जे मांसभक्षी होला उहो अपना सोझा काटल पसन्द ना करे. जे काटेला ऊ झटका में काटेला…

बरियार चोर सेन्हे पर बिरहा गावे : बतंगड़ – 103

वइसे त गोस्वामी तुलसीदास लिख गइल बानी कि समरथ के नहीं दोष गुसाईं बाकिर जमाना बदलल त कहाउतो बदलबे करी आ अब के कहाउत ई बा कि बरियार चोर सेन्हे…

अटल जी का बहाने : बतंगड़ – 100

के जानत रहुवे कि बतंगड़ के 100वां कड़ी बाजपेयी जी के मातम मनावे का काम आई. अटल जी के लोग बेपनाह प्यार कइल, सम्मान कइल बाकिर बहुते कम लोग रहल…

पप्पू बनि के जीयल आसान ना होखे : बतंगड़ – 99

पप्पू बनि के जीयल आसान ना होखे. ओकरा खातिर बहुते तेज दिमाग राखे के होला. अइसन अइसन बाति सोचे-कहे के पड़ेला जे दोसर केहू सपनो में ना सोच सके. बाकिर…

सबहीं नचावत मोदी साईं : बतंगड़ – 98

लरिकाईं में एगो कहानी सुनले रहीं कि बहेलियन का जाल में फँसे वाला चिरईयन के दशा देख दुखी भइल एगो संत चिरईयन के रटा दिहलें कि – शिकारी आएगा, जाल…

पाँच कवर भीतर, तब देवता पितर : बतंगड़ – 97

एगो जमाना उहो रहुवे राजीव गाँधी का बेरा जब जनता में ई बहुते प्रचलित हो गइल रहल कि सौ में निनान्बे बेइमान, तबहियों हमार देश महान. कहे वाला त मजाक…

बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल : बतंगड़ – 96

पुरनका जमाना से सुनत आइल बानी स ई तंज कि – बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल. पूत अगर कपूत हो जाव तबो महतारी ओकरा के कपूत माने ला…

मुस्लिम-इण्डिया बनाम हिन्दू-पाकिस्तान : बतंगड़ – 95

जस-जस दिन नियराइल जात बा तस-तस राजनीति के रंग अउरो सियाह होखल जात बा. एक बाति त सभके मानही के पड़ी कि आवे वाला लोकसभा चुनाव देशो खातिर आ एहिजा…