Category: बतकुच्चन

गति से दुर्गति ले (बतकुच्चन – 178)

एगो गति संज्ञा होले आ दोसरका गति भा गत विशेषण. दुनू में छोटकी इ के मात्रा लागेला बाकिर दोसरका गति से छोटकी इ के मात्रा हट गइल काहे कि उ…

ड्राइवरी के व्याकरण (बतकुच्चन 177)

अइसन कबो ना होखे जब हम बतकुच्चन लिखे से पहिले मगजमारी करत शब्द कोश भा व्याकरण के किताब ना पलटत होखीं. कबो नया नया कुछ खोजे ला त कबो दिमाग…

झड़ुआवल आ बहारल के चरचा (बतकुच्चन – 175)

पिछला अतवार के बाबा लस्टमानंद से भेंट हो गइल. बाबा के आदेश भइल कि हम बतकुच्चन में झाड़ू पर चरचा करीं. बाबा के त ना बतवनी बाकिर रउरा के बता…

माई बाबूजी जब मम्मी आ डैडी हो गइले (बतकुच्चन 170)

माई बाबूजी कब मम्मी डैडी हो गइल लोग केहू के पता ना लागल. बाकिर आजु टीचर के गुरू कहला पर बखेड़ा खड़ा करे के कोशिश हो रहल बा. एहसे कि…

गोलबंदी, गठबन्हन आ कि गिरोहबन्दी (बतकुच्चन 169)

लागत ब कि मउराइल लोग फेरु मउराइल हो गइल बा. जान में जान आ गइल बा. कहल जात बा कि दहाड़त शेर प काबू पा लिहले बाड़े जंगल के सियार…

शायद पालिटिक्स अब कुछ बदल गइल बा (बतकुच्चन 168)

बात कहिले खर्रा, गोली लागे चाहे छर्रा. कहे सुने ला त ई ठीक लागी बाकिर बेवहार मे आदमी सोच समुझ के बोलेला. साँच बोलल जरूरी होखेला बाकिर जहाँ ले हो…