Category: निबन्ध

सत्य आ धर्म का पालन के व्रत- ‘बहुरा’

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल भादो महीना के अन्हरिया के चौथ के बहुरा कहल जाला.कहीं-कहीं एकरा के गाइ माई के पूजा के परब मानल जाला.गाइ आपन दूध पियाके आदिमी के…

जबले हरियरी रही, कजरी गवात रही

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल चाहे शहर होखे भा गाँव आ गाँव में त अउरी, सावन के महीना आवते शुरू हो जाला लइकन के कबड्डी, खो-खो, चीका आ फनात के मजदार खेल.…

पद्मश्री के हकदार भरत शर्मा ‘व्यास’

भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गायक भरत शर्मा “व्यास” खातिर पद्मश्री अलंकरण के हम शुरुएसे आग्रही हईं। श्री शर्मा के व्यापक पैमाना पर ख्याति मिलेके आरंभिक वर्ष हटे 1989 के आरंभ। आर…

अपना मूल के जनला समझला के माने

– डा. अशोक द्विवेदी गँवई लोक में पलल-बढ़ल मनई, अगर तनिको संवेदनशील होई आ हृदय-संबाद के मरम बूझे वाला होई, त अपना लोक के स्वर का नेह-नाता आ हिरऊ -भाव…

देवलास : अदभुत धार्मिक स्‍थल

– देवकान्त पाण्डेय उत्‍तर प्रदेश के मऊ जिला के मुहम्‍मदाबाद गोहना तहसील में मऊ शहर से करीब 28 कि.मी. दूर आजमगढ़-मुहम्‍मदाबाद गोहना-घोसी रोड पर स्थित देवलास मऊ जिला के प्रमुख…

अश्लील गायकी आ भोजपुरी के अस्मिता

– भगवती प्रसाद द्विवेदी भोजपुरी में लोकगायकी के एगो लमहर, निठाह आ बड़ा सुघर परम्परा रहल बा. खाली पचीस-तीस करोड़ भोजपुरी बोले वाला लोगने में ना, बलुक देश-विदेश के अउर…

‘लोक’ के आधुनिकता बनाम यांत्रिक आधुनिकीकरण

– डा. प्रमोद कुमार तिवारी लोक के नाँव लेहला पऽ मन में ओकर दू गो छवि बनेला. एगो छवि में कलकल नदी बहेले, फल से गदराइल पेड़ लउकेला, गीत आ…

भोजपुरी-वर्तनी के आधार

– स्व. आचार्य विश्वनाथ सिंह (ई दस्तावेजी आलेख एह खातिर दिहल जाता कि भोजपुरी लिखे-पढे़े में लोगन के सहायक-होखो) भोजपुरी भाषा में उच्च कोटि के साहित्य-रचने करे खातिर ना, ओकर…

‘हिन्दी डे’ माने ‘हिन्दी-दिवस’ पर ‘भाषा-विचार’

-डाॅ. अशोक द्विवेदी आज दुनिया के बहुते भाषा मर-बिला रहल बाड़ी सऽ. एकर मतलब ई ना भइल कि जवन भाषा कवनो क्षेत्र-विशेष आ उहाँ के जन-जीवन में जियतो बाड़ी सऽ…

मातृभाषा के महत्व

– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कवनो व्यक्ति,समाज,देश भा राष्ट्र के बनावे-जनावे के जबरदस्त जरिआ होले ओकर आपन भाषा. ओकर आपन मातृभाषा आ राज/राष्ट्रभाषा. दुनिया के आन देश ओकरा संस्कृति, शिक्षा,…