आज त वोट हऽ… बहुत आदमी के किस्मत के फैसला होखे वाला बा… बहुते आदमी टेंशन में बा… बाकिर हम रिलैक्स बानी. जवनो पार्टी के बोर्ड बने ओ से हमार का… हम त सभे का साथ उठे बइठेनी. खैर, वोट प्रचार का दौरान का का ना देखनी… सबसे इम्पारटेंट बात…पूरा पढ़ीं…

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राम निहोरा अपना गाँव जवार के बड़ा पुरान नेता हउवें. कौ हाली त परधानी जीत गइल बाड़े. एक दिन भिनसहरे बाबा लस्टमानंद का दुअरा पर अइले. बाबा तब बैलन के सानीपानी दे के गोबर गोथार करत रहले. नेताजी दूरे से पुकरले, का हो, का करऽतारऽ? बाबा जबाब दिहलें, बस दूपूरा पढ़ीं…

भोजपुरिया भईया केकेआर सेमीफाइनल में ना पहुँच सकल… एकर दुख त बड़लही बाटे, उपर से आईपीएल में घपला… मन बड़ा परेशान बाटे… अब का बताईं ललित भईया का बारे में… हम कुछ अलगे ओपिनियन राखत रहीं… सब माटी में मिल गइल… खैर अब अगिला साल से हम आईपीएल में दिलपूरा पढ़ीं…

– जयन्ती पाण्डेय पिछला दिने लस्टमानन्द दिल्ली गइल रहलन. का कहीं का नजारा रहे. जब से दिल्ली में मेट्रो रेलगाड़ी चले लागल तबसे ओहिजा का लोगन का जिनिगी में बहार आ गइल बा. कालेज जाये वाली बबुनी के रोमांस करे के एगो नया जगहा भेंटा गइल बा. अब जब बबुनीपूरा पढ़ीं…

– आलोक पुराणिक बाबाजी लोग के हल्ला बा आजुकाल्ह. दिल्ली के बाबा भीमानन्द के कालगर्ली रैकेट देख के इहे समुझ में नइख आवत कि अब बाबाजी लोग के मुहल्ला कवन बा. सगरी मुहल्ला ओहि लोग के लउकत बा. जेकरा के बाबजी बुझऽ उहे कालगर्ल के भँड़ुआ निकलत बा. जेकरा केपूरा पढ़ीं…

– भोजपुरिया भईया गरमी से कोलकाता परेशान बाटे… अउर परेशानी त तब बढ़ जाला जब केकेआर हार जाला… खैर कहे वाला कह रहल बा कि आईपीएल के हर मैच… खरीदल बेचल जा रहल बा… का ललित अंकल ई हम का सुन रहल बानी? खैर दादा इज दादा… अरे तुमसे बढ़करपूरा पढ़ीं…

– जयन्ती पाण्डे रउआ कहीं चल जाईं, भारत के कवनो कोना में. सब जगहा रउआ पत्थर दिल के लोग भेंटाई. आखिर काहें ना? जेकरा पर जिम्मेदारी बा कि ऊ सबके आदमी बनाई. ओकरो दिमाग में पत्थरे भर गइल बा. हँ, बात मास्टर लोग के कइल जाता. आज के मास्टर लोगपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? सुनलू हऽ? बहिर थोड़े हईं. कवना बात का बारे में पूछत बानी? सुने में आवत बा कि देश में शौचालय से बेसी मोबाइल हो गइल बा. त एहमें अचरज का बा? एगो शौचालय से कई लोग के काम चल जाला, जबकि एक एक आदमी के दूपूरा पढ़ीं…

– आलोक पुराणिक हाय हाय का चर्चा निकल पड़ल बा कि दिल्ली से आटो वाला हटावल जइहें. दिल्ली के अगर आटो वालन से अलगा कर के देखीं, त दिल्ली बहुतही चिरकुट टाइप के शहर ह. ई शहर कतना चंट आ बदमाश ह, एकर पता दिल्ली आवते लाग जाला, आटो वालनपूरा पढ़ीं…

भउजी हो! का बबुआ? कइसे कइसे? कहवाँ रहतानी आजुकाल्हु कि देखलो दुलम भइल बा? जानत रहली हँ कि आजु २१ गो तोप के सलामी मिलला बिना ना रही. जानते बाड़ू हमार काम धाम. कबो कबो खाइलो पियल दुलम हो जाले. खैर तू बताव? चिदम्बरम के इस्तीफा पर का राय बा?पूरा पढ़ीं…

– जयन्ती पाण्डे वइसे त कलकत्ता शहर के बड़ाबाजार के सेठ अमीरचंद का लगे बहुत दौलत रह, करिया आ सफेद दूनो. कारोबारो कई गो रहे. जायज कम आ नाजायज बेसी. धन रहे त नाँवो रहे चारू ओर. समाज में रुतबा रहे. तबो अमरचंद के बुझाव कि कवनो ना कवनो कमीपूरा पढ़ीं…