– पाण्डेय हरिराम


पाकिस्तान में जवना दिने अमेरिकी सेना ओसामा बिन लादेन के मार गिरवले रहल तहिये ई लागे लागल रहे कि अमरीका से बदला लेबे खातिर मुम्बई पर भइल आतंकी हमले का तरह के कवनो घटना अपनो देश में होखी. काहे कि हेडली का मामिला से ई साबित हो चुकल बा कि भारत पर हमला करे खातिर अल कायदा भा लश्कर ए तायबा के आई एस आई के मदद मिल सकेले. वइसहू पाकिस्तान भारत के अमरीका के समर्थक देश मानेला.

सरकारो के मालूम बा कि ई गुनाह के कइले बा बाकिर ऊ कुछ कही ना. बाद में विदेश मंत्रालय पाकिस्तान सरकार के एगो मुलायम शिकायत भेजी आ दू एक दिन में गृह मंत्रालय कवनो हिंदू संगठन, खास कर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, का ओर इशारा करी आ बात खतम हो जाई. वइसे कांग्रेस के बकबकिया नेता दिग्विजय सिंह अइसने कुछ कहल शुरूओ कर दिहले बाड़न. एकरा बाद सेकूलरिज्म के दुहाई देत कांग्रेसो साम्प्रदायिकता के लानत मलामत करी आ फेर सब कुछ थिरा जाई.

असली दुश्मन से लड़े का मुकाबिले ई बढ़िया, सहज, अउर सुरक्षित बा कि आर एस एस से लड़ लिहल जाव. एहसे चुनावो जीते में सुविधा हो जाई. साँच त ई बा कि पाकिस्तान कुछ सरकारी अउर कुछ आतंकियन का सहारे अइसन हमला करवा सकेला. शिकागो का अदालत में हेडली- राना के गवाहियन से ई साबितो हो चुकल बा. एकनी के मुकाबिला करे में भारत अबले बेअसरे रहल बा. विदेश में लुकाइल आतंकियन, अपराधियन के पकड़े खातिर सीबीआई के पिछला कोशिश में हमनी का कई बार देखले बानी जा कि जब मौका आवेला त सीबीआई के कागजात अधूरा होला भा पुरान होला. जवना चलते अपराधी चंगुल से निकल जाला. फेर हमनी के विदेश विभाग ओह अपराधियन के पनाह देबे वाला देशन के एगो कड़ा पत्र लिखी जवना के ऊ देश बिना पढ़ले रद्दी का टोकरी में डाल देले सँ.

अब सवाल उठत बा कि का कारण बा कि भारत अतना मुलायम बा आ काहे ऊ अपना अंदरूनी सियासी झगड़ा – कांग्रेस बनाम भाजपा – के निपटावे खातिर अतना बेचैन रहेला. 26/11 का हमला का बाद एलान भइल रहे कि वी आई पी लोगन के बिलावजह मिलल जेड सुरक्षा हटा लिहल जाई जेहसे कि आम जनता के सुरक्षा खातिर साधन जुटावल जा सके. बाकिर ई कबहू लागू ना भइल. पुरनका राजा महाराजन का तरह लाल बत्ती के लालसा हमनी के नेतवन में मौजूद बा. बेशक जनता मारल जाव बाकिर नेतवन के जान बाँचे के चाहीं. ओहनी के इहो फिकिर नइखे कि जनता मुतो घरी ई सोच पाये कि ओकरा के बचावे खातिर जतना कुछ हो सकत रहे कइल गइल रहे. 26/11 का बादो कुछ ना सुधरल. पता ना कतना जान जाई तब सरकार के ई अहसास होई कि एह फालतू नेतवन से आम जनता के मोल बेसी बा. जब 26/11 के घटना होत रहे त सरकार के बेसी अनेसा एह बाति के रहे कि मुम्बई में कहीं साम्प्रदायिक दंगा ना शुरू हो जाव. लेकिन अइसन ना भइल. काहे कि मुम्बई आ देशो के जनता समझदार बिया आ ईहो जानेले कि के दोस्त ह के दुश्मन. हेडली- राणा के गवाही से साफे पता चल गइल बा कि अइसन जुल्म के करवावत बा. अमेरिको एह हकीकत से वाकिफ बा.

अइसन नइखे कि 13/7 का घटना से हमनी के सरकार कुछ सीखी आ अइसन घटना दुबारा ना होखे दी. ईहो तय बाकि हमला फेर फेर होखी आ एही तरह हिन्दूवन पर तोहमत लगावल जात रही. सरकार के एकर फिकिर बेसी होखी कि कहीं साम्प्रदायिक दंगा मत हो जाव. सरकार अपना जनता के हिफाजत नइखे कर पावत. सरकारी स्कूलने का तरह सरकारी सुरक्षा इंतजामो नाकारा हो चुकल बा. आ अइसन खाली भारते में हो सकेला.



पाण्डेय हरिराम जी कोलकाता से प्रकाशित होखे वाला लोकप्रिय हिन्दी अखबार “सन्मार्ग” के संपादक हईं आ उहाँ का अपना ब्लॉग पर हिन्दी में लिखल करेनी.

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