अब बहस एह पर कि मोदी सरकार भाजपा के बहुमत वाली होखी कि एन डी ए के बहुमत वाली

– दयानंद पाण्डेय

NaMoएक बार का, हज़ार बार मान लेत बानी भा निश्चिते मान लेत बानी कि नरेंद्र मोदी कुछ अउर ना आर एस एस के बिसात पर एक मामूली मोहरा हउवन. इहो मान लेत बानी कि उनकर पुरनका चेहरा सांप्रदायिकता के पाँक में सनाइल बा. गुजरात के ‘नरसंहारो’ उनुके नाँवे दर्ज बड़ले बा. आ इहो कि मोदी एगो लड़िकी के जासूसी करवडलन. इहो कि अपना मेहरारू जसोदाबेन के छोड़ दिहलन. एक बार का हज़ार बार इहो मान लेत बानी कि मोदी मीडियो के खरीद लिहले बाड़न आ मीडिया के पोसुआ कुकुर बना लिहले बाड़न.

त का बस इहे सब मोदी के एतना लोकप्रिय बना दिहलसि ?

त मुस्लिम तुष्टीकरण, जातिवादी राजनीति अउर कांग्रेस के एकवंशी शासन, सोनिया राहुल के रिमोट से चलत मनमोहन सरकार के अंतर्विरोध, कमरतोड़ मंहगाई अउर सुरसा जस पसरल भ्रष्टाचार मोदी के एह तरह खड़ा करे में का कवनो भूमिका ना निभवलसि ? जाने काहे दु राजनीतिक टिप्पणीकार आ राजनीतिक पार्टी सब ई कहे से परहेज करत बाड़े. बाकिर एगो कड़ुआ सचाई इहो बा कि मुस्लिम तुष्टिकरण के राजनीतिए मोदीे के राजनीति खातिर एगो बड़हन कालीन बिछा दिहलसि. चउतरफ़ा मोदी विरोध मोदी के एह कदर अजेय बना के खड़ा क दिहलसि आ अब मोदी विरोध खिसियाइल बिलइआ खंभा नोचे वाला कहाउत में बदल गइल बा. कुछ धर्मनिरपेक्ष ताकतन के अति विरोध आ लफ़्फ़ाज़ी मोदी के उ ताकत दे दिहलसि जवन ताकत उनुका के आर एस एसो ना दे पावत रहुवे. लगभग सगरी राजनीतिक पार्टी, इहाँले कि खुद भाजपो जवना तरह के मुस्लिम तुष्टीकरण के राजनीति में लथपथाइल बाड़ी सँ. एगो राजनीतिक बीमारी मोदी के अइसन कद दे दिहलसि अब मोदी एगो राजनीतिके ना, एगो प्रतिमान बन मोदी फ़ोबिया बन चलल बाड़न. का भितर, का बाहर तमाम स्पीड ब्रेकर, बैरियर, बाधा आ हिच के एह चुनाव में मोदी के बदलैन केहू खोजलो नइखे भेंटात.

त काहें ?

त का भारत के राजनीति ए ह कदर बंजर हो गइल बिया ?

एकर पड़ताल केहू काहे नइखे कइल चाहत ? करत काहे नइखे? मोदी के खिलाफ़ धर्मनिर्पेक्षता के बीन बजवला, एगो लड़िकी, एगो मेहरारू के आड़ लिहलो अब केहू का कामे नइखे आवत. ई त ठीक बा बाकिर कवनो राजनीतिक व्यक्तित्वो मोदी का नियरा आ के काहे नइखे खाड़ हो जात ? बड़-बड़ आडवाणी बह गइले. मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह बह गइले. राहुल, प्रियंका आ सोनिया गांधी के घिघ्घी बन्हा गइल बा. मनमोहन सिंह त एकदमे लापता हो गइल बाढ़न. मुलायम, मायावती, जयललिता, ममता, नीतीश कुमार वगैरह सब जने फ़िलर बन गइले.

अच्छा त अरविंद केजरीवाल?

निश्चिते अरविंद केजरीवाल मोदी का नाक में दम भर सकत रहलें. सिर्फ़ नाक में दमे ना कर सकत रहले बलुक मोदी के राजनीति पर लगामो लगा सकत रहले. आ बहुते संभव रहे कि उ मोदी ला एतना खाली जगह बनही ना देतें. आ मोदी के कद अइसन ना बन पवले रहीत. बाकिर अब आजु का तारीख में कांग्रेसिया डिप्लोमेसी में अझूरा के उ दगाइल कारतूस बन गइल बाड़न. रामगोपाल यादव के शब्दन में कहल जाव त अब उ एगो राह भटक मिसाइल बन गइल बाड़न. एगो समय उहो रहुवे जब भारत का राजनीति में अरविंद केजरीवाल एकदम ताजा हवा बन के आइल रहले. लागत रहे कि उ सचमुच कुछ कर देखइहें. बाकिर उनकर अनुभवहीनता आ उनकर बछड़-उत्साह सगरी गुड़ गोबर क दिहलसि. बेजा उत्साह में उनका बुझइबे ना कइल कि दिल्ली पूरा राज्य ना ह, उनुका बहुमत नइखे मिलल आ कि कांग्रेस अपना विरोधियन ला लाक्षागृह बनावे के पुरान एक्सपर्ट हियऽ. उ इहो भूला गइलन कि अबे हाले में अन्ना हजारे आ रामदेव के आंदोलन कांग्रेस अपना डिप्लोमेसी में डकार गइल बिया त उ कवना खेत के मूरई हउवन?

दोसरे उनका सरकार के अनेरियापन, सोमनाथ आ राखी बिड़लान जइसन मंत्री उनकर अलगे किरकिरी करवलसि. असमय सरकार छोड़ के भगोड़ा करार क दिहल गइलन से अलगा. लोकसभा में बइठे के उनुकर लालसा आ हड़बड़ी उनुका राजनीतिए प ना बलुक उनुके बहाने जनता के देखल साफ सुथर राजनीतिओ प पानी फेर दिहलसि. अब अरविंद केजरीवाल के विफलता एगो बड़हन सूनापन खड़ा क दिहलसि कवनो नया राजनीतिक बदलैन ला. आ अब रउरा मानीं भा मत, सांप्रदायिक होखीं भा सेकुलर, अब ई मान लीं कि अपना तमाम खामी आ खूबियन का साथ नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के एगो नया वैकल्पिक साँच हो गइल बाड़ें.

बाकिर अजब मंजर बा एह घरी. मोदी विरोध आ मोदी समर्थने में दुनिया जीयत बिया. अउरियो गम बा जमाना में मोदी का सिवा ! एगो मोदी से जनता के एतना मुहब्बत, एतना समर्थन आ कुछ लोग के मोदी से एह कदर नफ़रत, एतना खुन्नस! का कहे के बा ! जाने का बा कि कुछ लोग के मोदी के बाउरो बात नीक लागत बा त कुछ लोग के मोदी के नीमनो बात बाउर लागत बा. या इलाही ई माजरा का बा ! अजबे बा इहो कि जे लोग धर्म, ब्राह्मण, काशी वगैरह से नफ़रत करते रहे आजु उहे लोग एही धर्म, ब्राह्मण, काशी वगैरह से निरंतर देश बचा लेबे के दम भरत बाड़ें. उनुका के ओकर ताकत बतावत बाड़ें. मोदी बाड़ें कि एह लोग का छाती प एहनीए के लफ़्फ़ाज़ी का चलते सवार बाड़न. काश कि ई लोग समय रहते कांग्रेस के भ्रष्टाचारी नीतियन, महगाई अउर अनाचार के खिलाफ़ो लामबंद भइल रहतें त मोदी से देश के बचावे ला एह लोग के एह कदर हांफे के ना पड़ीत. मोदी आ चुकल बा आ ई लोग तेली के बैल लेखा आंख अउर दिमाग पर पट्टी बन्हले अबहियों धर्मनिरपेक्षता के जुगाली में जोताइल पड़ल बाड़ें. मोदी विरोध अब खिसियाईल बिलइया खंभा नोचे में बदल गइल लउकत बा. केहू माने भा ना आजु के सचाई इहे बा. काशी में नरेंद्र मोदी के नामांकन जुलूस त न भूतो, न भविष्यति के तौर पर दर्ज हो गइल बा. कांग्रेस के लोग भा तमाम अउर लोग मोदी के कवनो कीमत प नइखे चाहत, तबहियों. खैर, अब ई एगो बीतल बहस बा.

अब नया बहस ई बा कि मोदी के सरकार बनल त तय बा बाकिर ई मोदी सरकार भाजपा के बहुमत वाली होखी कि एन डी ए के बहुमत वाली. जवनो होखे. मोदी सरकार से दू तीन गो चीज़ त सचहूं ठीक हो जाई, ई पक्का बा. जइसे कि कश्मीर समस्या ते निश्चिते मोदी निपटा दीहें. काहे कि कश्मीर समस्या निपटावे ला जवना सख्ती के दरकार बा उ मुस्लिम तुष्टीकरण में लागल कवनो सरकात त कतई ना कर सके. आ कांग्रेस त हरगिजे ना. अलगाववादी नेतवन के सुर देखीं कि अबहियें से बदले लागल बा. बलुक पाकिस्तान से लगवले अमरीका ले के सुर बदल गइल बा. अमरीकी अखबार त नरेंद्र मोदी के तुलना अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन से करे लागल बाड़ें.

दुसरका जवन बड़ बात कहले बाड़े मोदी कि उ संसद के अपराधियन से मुक्त करा दीहें. एकरा ला जीत के आइल सांसदने के शपथ पत्र में दिहल जानकारिए के उ सुप्रीम कोर्ट के मार्फ़त कमेटी बनवा के जँचवा के तुरते कार्रवाई करीहें.उ सांसद भले भाजपे के काहे ना होखे. ई बहुते जरूरीओ बा.

तिसरका खास बात जवन मोदी काशी में नामांकन भरे का बेरा दिहल बयान में कहलन. गंगा साफ करावे वाली बात. साबरमती साफ करावे के हवाला उ दिहबे कइलन. गंगे के बहाने तमाम अउरियो नदी साफ होखीहें स. मुसलमानो ला उ पसीजले आ बतवले कि जइसे गुजरात में पतंग बनावे वालन के व्यवसाय खातिर बहुत कुछ कइलन. कि पतंग व्यवसाय पैतीस करोड़ से बढ़ के सात सौ करोड़ के हो गइल बा. त उ काशी के बुनकरो ला बहुत कुछ करीहें. तबहियों एक बात त तय बा कि मुस्लिम मतदाता त मोदी के पक्ष में तबहियों नइखन आवे वाला ई पूरा से तय बा मोदी के डर मुसलमानन का दिल से जाे वाला नइखे जल्दी. जइबो करी त मुस्लिम वोट के चूल्हा पर रोटी सेंके वाली पार्टी जाए ना दीहें सँ. मोदी के खराब रिकार्ड अपना जगह बा बाकिर तबहियों कुछ टिप्पणीकारन के मानना बा कि मोदी के तमाम विरोध का बावजूद मोदी के बात पर यकीन कइला के जरूरत बा. देश के आगे बढ़ावे ला कड़वाहट भूला के आगे त बढ़ही के पड़ी. जर्मनी में हिटलर के इतिहासो भूला के लोग आगे बढ़ल बा.

हिंदुस्तानो के जर्मनी का राह चले देबे में कवनो हरज नइखे. शैलेंद्र एगो भोजपुरी फ़िलिम ‘हे गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबों’ ला गाना लिखले रहलें जवना के चंद्रगुप्त के निर्देशन में लता मंगेशकर गवले रही : ‘हे गंगा मैया तोंहे पियरी चढ़इबो, सैयां से करि द मिलनवा हो राम !’ त अबहीं सौ सवालनमें एक सवाल बा कि का गंगा मईया के बुलावा प काशी आइल नरेंद्रो मोदी के गंगा मईया का उनुका सईंया से मिलवा दीहें? अउर कि उ उनका के प्रधान मंत्री बनवा दीहें ? अबहीं त मदन मोहन मालवीय के मूर्ति समाजवादी पार्टी अउर कांग्रेस के लोग धो दिहल ई कहि के कि मोदी ओकरा के माला पहिरा के अपवित्र कर दिहलन. त का उ लोग विवेकानंद अउर पटेल के मूर्तिओ ले गंगाजल आ दूध से धो के पवित्र ना करी ? आ का कि अगर मोदी जीत गइलन काशी से त का उ पूरा काशीए गंगाजल से धोईहें ? आ जे धोवबे करीहें त भला कइसे? अबहीं त आलम ई बा कि मोदी मंदिर के बात नइखन करत, ना ही हिंदू मुसलमान के. बाकिर सेकूलर कहाए वाली पार्टिए सब, कांग्रेस, सपा, बसपा वगैरहे हिंदू मुसलमान के माला फेरत बाड़ी सँ. ई नज़ारा ठीक वइसने बा जइसे कबो पश्चिम बंगाल में जब नंदीग्राम, सिंगूर घटत रहे तब ओहिजा के वामपंथी सरकार मज़दूरन का खिलाफ़ खाड़ रहुवे आ तृणमूल कांग्रेस अउर भाजपा जइसन पार्टी सब मज़दूरन का साथे खाड़ रहली सँ.एह चुनावो में उहे बात जइसे दुहरावल जात बा कि अयोध्या, मथुरा, काशी के नारा देबे वाली भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी काशी में रहियो के विश्वनाथ मंदिर आ मस्जिद के बात नइखन करत आ समाजवादी पार्टी के लोग मदनमोहन मालवीय के मूर्ति गंगा जल से धो के पवित्र करत बा. का त मोदी माला पहिरा के ओकरा के अपवित्र क देले बाड़न. कबो बड़े गुलाम अली खां गवले रहले आ बिस्मिल्ला खां बजवले रहले उहे दादरा जाने काहें याद आवत बा : ‘का करुं सजनी आए न बालम !’ कम से कम सत्ता त अइसे नइखे आवे वाली दोस्त लोग ! रउरा लाख गावत रहीं आ गंगाजल से मूर्तियन के पवित्र करत रहीं. देश के राजनीति अब बदल गइल बा. भारत में धर्म आ जाति-पाति एक निर्मम सचाई ज़रुर बा बाकिर निर्णायको होखे ई कतई ज़रुरी नइखे. नरेंद्र मोदी के नईकी राजनीति फ़िलहाल एही राह प बा. अब रउरा नरेंद्र मोदी के फ़ासिस्ट कह लीं, तानाशाह कह लीं भा सांप्रदायिक भा हत्यारा ! जनता सुने वाली नइखे. कम से कम एह चुनाव में. उ अबकी के चुनाव मंहगाई अउर भ्रष्टाचार के मुकाबिल विकास अउर रोजगार के सपना से तउले जात बिया.
आँख खोलीं आ गंगा के किनारे उगत एह सूरज के प्रणाम करीं, मत करीं ई रउरा प बा. बाकिर सूरज डूबत बा कृपा क के ई कहला से बाच सकीं त बाचे के कोशिश करीं. जनता त अपना फ़ैसले के चश्मा आ तरजूई दुनू बदल लिहले बिया. रउरो बदलीं. आ हँ, आपन विरोध ज़रुर जारी राखीं जेहसे कि ई आदमी अपना तानाशाही से बाज आवे!


ई लेख दयानंद पाण्डेय के ब्लाॅग से अनुवाद कइल गइल बा.

लेखक परिचय

अपना कहानी आ उपन्यासन का मार्फत लगातार चरचा में रहे वाला दयानंद पांडेय के जन्म ३० जनवरी १९५८ के गोरखपुर जिला के बेदौली गाँव में भइल रहे. हिन्दी में एम॰ए॰ कइला से पहिलही ऊ पत्रकारिता में आ गइले. साल 1978 से पत्रकारिता में. इनकर उपन्यास आ कहानियन के बाइस गो किताब प्रकाशित हो चुकल बा. एह उपन्यास “लोक कवि अब गाते नहीं” खातिर उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान उनका के प्रेमचंद सम्मान से सम्मानित कइले रहे आ “एक जीनियस की विवादास्पद मौत” खातिर यशपाल सम्मान से.

बड़की दी का यक्ष प्रश्न के अनुवाद अंगरेजी में, बर्फ़ में फंसी मछली के पंजाबी में आ मन्ना जल्दी आना के अनुवाद उर्दू प्रकाशित हो चुकल बा.

बांसगांव की मुनमुन, वे जो हारे हुए, हारमोनियम के हज़ार टुकड़े, लोक कवि अब गाते नहीं, अपने-अपने युद्ध, दरकते दरवाज़े, जाने-अनजाने पुल (उपन्यास), 11 प्रतिनिधि कहानियां, बर्फ़ में फंसी मछली, सुमि का स्पेस, एक जीनियस की विवादास्पद मौत, सुंदर लड़कियों वाला शहर, बड़की दी का यक्ष प्रश्न, संवाद (कहानी संग्रह), कुछ मुलाकातें, कुछ बातें [सिनेमा, साहित्य, संगीत और कला क्षेत्र के लोगन के इंटरव्यू] यादों का मधुबन (संस्मरण), मीडिया तो अब काले धन की गोद में [लेख के संग्रह], एक जनांदोलन के गर्भपात की त्रासदी [ राजनीतिक लेख के संग्रह], सूरज का शिकारी (बचवन ला लिखल कहानियन के संग्रह), प्रेमचंद व्यक्तित्व और रचना दृष्टि (संपादित) अउर सुनील गावस्कर के प्रसिद्ध किताब ‘माई आइडल्स’ के हिंदी अनुवाद ‘मेरे प्रिय खिलाड़ी’ नाम से आ पॉलिन कोलर के ‘आई वाज़ हिटलर्स मेड’ के हिंदी अनुवाद ‘मैं हिटलर की दासी थी’ के संपादन प्रकाशित बा.

दयानंद पांडेय जी के संपर्क सूत्र

5/7, डालीबाग आफ़िसर्स कालोनी, लखनऊ- 226001
मोबाइल नं॰ 0522-2207728, 09335233424, 09415130127
e-mail : dayanand.pandey@yahoo.com
dayanand.pandey.novelist@gmail.com

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