टाइम्स आफ इंडिया में छपल अपना ब्लॉग में मिन्हाज मर्चेंट एह बात पर चरचा कइले बाड़न कि आखिर का कारण बा कि भारत पर बेर बेर आतंकी हमला हो जाला. पिछला दिने हैदराबाद में भइल दू गो बम विस्फोट एह बात के रेघरियावत बा कि फिरकापरस्ती के राजनीति पाकिस्तान से आयातित आ भारत के अतिवादियन के कइल आतंक खातिर भारत के आसान निशाना बना देला. उनका एह पर शिकायत बा कि गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे संसद में जवन बयान दिहलन तवना में हैदराबाद हादसा का पीछे इंडियन मुजाहिदीन के हाथ होखे के बात पर कुछ खास ना कहल गइल.

मर्चेंट के मानना बा कि अकबरुद्दीन ओवैसी आ प्रवीण तोगड़िया जइसन लोगन के नफरत से भरल भाषण फिरकावाराना तनाव बढ़ा देला. औवेसी के राजनीति निकाला कर देबे के चाहीं आ तोगड़िया के राजनीति में घुसे ना देबे के चाहीं.

फेर 10 सितम्बर 2011 के दिल्ली बम विस्फोट का बाद लिखल अपना ब्लॉग के चरचा करत मर्चेंट लिखले बाड़न कि भारत तब ले आसान निशाना बनल रही जबले नेता लोग जनहित के अपना स्वार्थ पर तरजीह ना दी.

पाकिस्तान के उकसावल आतंकवाद जब साल 1989 से शुरू भइल तबहिए से सरकार दहशत में बिया कि ओकर अल्पसंख्यक वोट बैंक छितरा सकेला. भारत के मुसलमानन का प्रति ई नजरिया बहुते गलत दिशा में बा. एहसे सामाजिक विभाजन अउरी बिगड़त बा आ आतंकियन के हौसला मिलत बा. अर्ध शिक्षित आ आर्थिक रूप से कमजोर मुसलमान समुदाय के आर्थिक आ सामाजिक डेहरी में डाल दिहल गइल बा. आ एकरे परिणाम बा घेराइल मानसिकता.

बाकिर जइसे जइसे नवही मुसलमान जागत बाड़ें आ जाने लागल बाड़ें कि कइसे ओहन के पुरनियन के पिछड़ापन आ असुरक्षा भाव के खाई में डाल के राख दिहल बा, तबसे ओहनी के मन में विरोध अउरी पनपे लागल बा. भारत के मुसलमान चाहेलें कि उनुका के देश के आर्थिक विकास के हिस्सा बना लिहल जाव. ऊ वोट बैंक बनल रहल ना चाहसु जवना के हर पाँचवा साल में भंजावत रहे नेता लोग. ओह लोग के अब मुस्लिम मंत्रियन आ राष्ट्रपतियन के झुनझुना से संतोष नइखे.

ई झुनझुना बड़हन घाव लुका देला कि ओह समाज के नकली पंथ निरपेक्षता आ बटाला हाउस वाली राजनीति के खिलाड़ियन ला आसान निशाना बना के राखल बा. आ एह काम में मुस्लिम नेतो पूरा तरह से लागल बाड़न कि परदा ना उठे एह सच्चाई से. आम मुसलमान के सही नेतृत्व आ सत्ता से मिले वाला फायदा कबो ना मिल पावे.

मिन्हाज मर्चेंट के मानना बा कि सफल आतंकविरोधी नीति ला तीन गो बात बहुते जरूरी होला :

पहिला, कि राजनीतिक प्रतिबद्धता कि हर हाल में आतंकवाद खतम करे के बा.

दोसर, कि राजनीतिक दखलंदाजी का बिना निष्पक्ष कानून व्यवस्था के पालन.

तिसर, कि बढ़िया खुफियागिरी.

आगे अपना ब्लॉग में मर्चेंट लिखले बाड़न कि हैदराबाद विस्फोट फेरू रेघरिया दिहलसि कि संकीर्ण राजनीतिक फायदा ला देश के खुफियातंत्र के गलत प्रबंधन के का परिणाम निकली. जबले सरकार आपन संकीर्ण मानसिकता ना छोड़ी तबले आतंकवाद के ठीक से मुकाबला ना कइल जा सकी. भारत पर बेर बेर आतंकी हमला होखते रही. आ एकर दुहरा नुकसान देश के साढ़े सोलह करोड़ मुसलमानन के झेले पड़ी. संतोष एकरे बा कि सेकूलर राजनीति के ढोग करत फिरकावाराना राजनीति के कोशिशन का बावजूद देश के मुसलमान बहुत हद ले शांत आ कानून के पालन करे वाला बनल बाड़े.

मुसलमानन में शिक्षा के पसार जतने अधिका होई ओतने ऊ एह राजनीतिक नेतवन के चाल के समुझे लगीहें. आतंकी हमला का बाद सांप्रदायिक दंगा नइखे होखत. मुसलमान अब अपना के पहिले भारतीय माने लागल बाड़े. जस जस शिक्षा के फायदा ओह लोग के मिलत जात बा तस तस ऊ देश के मुख्य धारा में चलत अइहें. तब फर्जी सेकूलर नेता ओह लोग के आपन वोट बैंक का रूप में इस्तेमाल ना कर पइहें.

आखिर में मिन्हाज मर्चेंट लिखले बाड़न कि भारत के हृदय विशाल बा. फिरकावाराना राजनीति देश के बाँट के जवन नुकसान चहुंपवले बावे तवना के पलटल संभव बा. दुनु तरफ सद्भावना मौजूद बा बाकिर एह ला जरूरी बा कि फर्जी सेकूलरिज्म से छुटकारा पावल जाव. ना त भारत के बहुते महँग पड़े वाला बा ई फर्जी सेकूलरिज्म.

हो सकेला कि अनुवाद करत में कुछ गलती रह गइल होखे. मिन्हाज मर्चेंट के ई ब्लाग पढ़े ला टाइम्स आफ इंडिया पर उनकर ब्लॉग खुदे पढ़ के देखीं.

By Editor

कुछ त कहीं...

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