लालू प्रसाद कबो कबो अनजाने में सही चोट कर जालें. पिछला दिने जब नीतीश कुमार के जदयू भाजपा से आपन गठबन्हन तूड़े ला बेचैन हो गइल त लालू प्रसाद के बयान आइल कि जदयू आडवाणी खातिर सती हो जाए के तइयार बा. आ साचहु उहे भइबो कइल. अब भाजपा के नुकसान चहूंपावे वाला आदमी के लालु आलोचना करसु इहो राजनीतिए ह. चूंकि बात सती होखे से चलल त कहल जा सकेला कि अब एके औरत के दू गो भतार हो जइहें. भाजपा से अलगा होके नीतीश चहीहें कि अल्पसंख्यक वोट पर उनुकर दोकानदारी चले जब कि लालू कबो ना बरदाश्त कर पइहें उनुका माई गठबन्हन के केहू छेड़े के कोशिश करो. बाकिर राजद जदयू के एह झगड़ा पर तनी बाद में. आईं पहिले देखल जाव कि लालू सती होखें के कहलें त का देख सोच के?

ढेर दिन ना भइल जब भाजपा अपना कार्यकारिणी में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के आपन चुनावी प्रचार के कमान सँउप दिहलसि त जदयू एक सुर से इहे कहलसि कि ई पार्टी के अन्दरुनी फैसला हऽ आ एकरा से जदयू के कुछ लेना देना नइखे. अगिला दिने भाजपा के महानेता, भीष्मपितामह, मार्गदर्शक, संस्थापक, अभिभावक आ पता ना जाने का का लालकृष्ण आडवाणी भाजपा में सगरी पद से इस्तीफा दे दिहलन, दू गो चीझु छोड़ के. भाजपा के प्राथमिक सदस्यता आ एनडीए के अध्यक्ष पद से. कुछ इशारा त एहिसे मिलल. उनुकर असल मकसद रहल कि एनडीए अध्यक्ष पद पर रहते आपन गोटी बइठावे के कवनो जुगत जुगाड़ लगावत रहीहें. बाकिर तीस घंटा भितरे पता लाग गइल कि उनुका रुसला के ऊ असर नइखे होखत जवन होखे के सपना देखले रहुवन. आ ऊ कहल जाला नू कि आदमी के भूख लागी अपने से खाई बकरी के भूख लागी लकड़ी चबाई. से एगो बहाना मिलल आ ऊ तुरते मान गइलन. एकतीस घंटा का भीतर सगरी विरोध हवा हो गइल आ ऊ आपन इस्तीफा वापिस ले लिहलन. बाकिर एकरा बादो ऊ आपन इशारा दिहला से चूकलन ना. सामने ना अइलन. ना कवनो बयान दिहलन, ना बतवलन कि काहे इस्तीफा दिहले रहलें आ कइसे मान गइलें. जवन कहल सुनल से दोसरे तिसर लोग.

बाकिर राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी अतना जल्दी हार मान जाव से कइसे हो सकेला. जदयू नेता शरद यादव से उनकर पटरी ठीक ठाक बइठेला. नरेन्द्र मोदी के राह में छीटात हर काँट कूस के नीतीश के भरपूर समर्थन मिलही के रहे. पकिया तौर पर त उहे बता सकेला जे एह चडाल चौकड़ी में शामिल होखे. बाकिर बाहर वाला त बस अंदाजे लगा सकेलें. से जब भीष्मपितामह के शरशय्या पर पड़लो से कवनो फायदा होत ना लउकल त जदयू अलग खेल शुरू कर दिहलसि. सवाल उठा दिहलसि कि मोदी के चुनाव प्रचार कमान सँउपला का बाद राजनाथ सिंह जवन कहलें आ भाजपा के बाकी लोग जे कहत बा तवना के मतलब साफ बा कि भाजपा मोदी के आपन उम्मीदवार बनाए के तय कर लिहले बिया आ ई बात जदयू बरदाश्त ना कर सके. दू दिन पहिले ले जवन बात भाजपा के आंतरिक मामिला रहुवे तवन अचके में जदयू के जीवन मरण के सवाल बन गइल. जिद्द ठान लिहलें नीतीश कि मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ना बनावे के बात भाजपा खुले आम कहे तबहिए ऊ मनीहें. आ भीष्मोपितामह के इच्छा पूरा हो जाई.

बाकिर नीतीशो से उहे गलती हो गइल जवन भीष्मपितामह से हो गइल रहे. शतरंज के खेल में एक चाल उलुटा पड़ जाव त फेर बाकी चाल सम्हारल मुश्किल हो जाला अगर सामने वाला खिलाड़ी हर चाल के काट जानत होखे. एह जदयू भाजपा विवाद में शेरो शायरी खुबे चलल से हमहु एगो गीत के मुखड़ा इस्तेमाल करे से अपना के रोक नइखीं पावत. “मैं ये सोचकर तेरे दर से चला था कि तू रोक लेगी मना लेगी मुझको.” आ इहे सोचलका गलत रहुवे. जब बुढ़ऊ के दाल ना गलल त तोहरा के के पूछत बा. बड़ बड़ भूत कदम तर रोवसु मुआ माँगे पुआ. आ जब नीतीश देख लिहलन कि “मगर तुमने रोका ना वापिस बुलाया, ना आवाज ही दी. मैं आहिस्ता आहिस्ता बढ़ता ही आया. यहाँ तक कि तुझसे जुदा हो गया मैं.” अब मोदी विरोधी मीडिया आ राजनीतिक गोल एक सुर से कहल शुरू कर दिहले बावे कि मोदी के महत्व मिलते भाजपा के गिरल शुरू हो गइल बा. हालांकि जवन कुछ भइल तवन भाजपा के फायदा के बात बन गइल. आडवाणी के रुसल मानल एक फायदा दिहलसि कि उनुकर गोलबंदी टूटे लागल. तब एके बहाना बाचल रहुवे एनडीए बचावे के. अब उहो बहाना कामे नइखे आवे वाला आ मोदी विरोध के अब कवनो दोसर मुद्दा बाँचल नइखे. गुजरात दंगा के काठ के हँड़िया अतना बेर चढ़ चुकल बा कि अब ओकर कवनो असर नइखे पड़े वाला. नरेन्द्र मोदी के समर्थन में भाजपा कैडर का साथे नवहियन के पूरा जमात खड़ा बा. हिन्दुस्तान में पहिला बेर देखे के मिलल बा कि कवनो नेता के जनता का दबाव का चलते सामने ले आवे के पड़ल कवनो पार्टी के. मोदी के अगुआ बनावे के फैसला भाजपा के उपर के जमात ना लिहलसि ओकरा त नीचे से आवत दबाव का चलते वइसन करे के पड़ल. अब देश के जनता के सोझा फेर एक बेर नया तरीका से सोचे समुझे के मौका मिलल बा. गठबन्हन के राजनीति के अनदेखी करत पहिला बेर कवनो दल अकेले अपना बल पर बहुमत ले आवे के सपना देखल शुरू कर दिहले बा. जानत बा कि अगर मजबूत बन के उभरल त बाकी जोगाड़ अपने आप जुट जाई आ कमजोर पड़ गइल त केहु पूछे वाला ना भेटाई. से भाजपा के एह सोच के बधाई देबे के चाहीं कि ऊ पहिले अपना के मजबूत बनावे के तय कइलसि. देश के नेतृत्व करे के दावा करे वाला गोल में अतना बेंवत त होखहीं के चाही.

– ओमप्रकाश सिंह

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